साजिशें बेनकाब होते देख बेकरार आंदोलनजीवी | विशेष लेख – मृत्युंजय दीक्षित
विशेष मतदाता गहन परीक्षण अभियान (एसआईआर) और चुनाव आयुक्तों की इस्तीफे की आड़ में देश की संवैधानिक संस्थाओं
लेखक: मृत्युंजय दीक्षित
विशेष मतदाता गहन परीक्षण अभियान (एसआईआर) और चुनाव आयुक्तों की इस्तीफे की आड़ में देश की संवैधानिक संस्थाओं को कमज़ोर करके, अराजकता फैला कर सत्ता परिवर्तन का सपना देख रहे विरोधी दल तथा अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्रों के अंतर्गत भारत में कार्य करने वाले आन्दोलन जीवियों की साजिशें उनके अपने ही नेहा बोरा और प्रशांत भूषण जैसे लोगों ने बेनकाब कर दी हैं । तथाकथित जेनज़ी नेताओं को आरम्भ में मिला छुट पुट समर्थन हवा में उड़ गया है और अब पूरा राष्ट्र विरोधी तंत्र बेक़रार है।
आम जनता के सामने स्पष्ट हो गया है कि देश में हिंसा और आगजनी फ़ैलाने के लिए किए जा रहे प्रदर्शनों तथा आंदोलनों को विदेशों में बैठे भारत तथा हिन्दू विरोधी समूहों से पर्याप्त धन आर्थिक तथा बौद्धिक सहयोग मिल रहा है। राहुल गाँधी के नेतृत्व में प्रदर्शन की पोस्टर गर्ल बन चुकी नेहा बोरा, सी.जे.पी. और उनके समर्थक, बिके हुए यू ट्यूबर और विदेश में बैठे ध्रुव राठी जैसे लोग भारत में बांग्लादेश जैसी हिंसा व अराजकता फैलाकर देश को जलाने के सारे जतन कर रहे हैं। नेहा बोरा ने प्रेस वार्ता में कहा कि वो बांग्लादेश से प्रेरणा ले रहे हैं। नेहा जैसे लोगों को विदेशों से पैसा आ रहा है इसकी पुष्टि अभिनेता नेता आमिर खान के भांजे इमरान खान पर मुंबई पुलिस की कार्यवाही और अमेरिका की लोकप्रिय सिंगर मैरी लिमबैन के आरोपों ने कर दी है। इमरान मुंबई में भारत विरोधी प्रदर्शन में शामिल हुए थे ।
जिस प्रकार कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके के समर्थन और भारत तथा हिन्दुओं के विरोध में अमेरिका के न्यूयार्क से लेकर कनाडा और फिर गाजा तक भारत विरोधी नारेबाजी की जा रही है उससे यह स्पष्ट हो गया है कि साजिश बहुत गहरी है और भारत तथा हिंदू विरोधी ताकतें पूरी तरह एकजुट हो चुकी हैं। अमेरिका में भारतीय मूल की सांसद प्रमिला जायसवाल जैसे लोग एसआईआर को लेकर भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप कर रहे हैं। भारत के चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन भारत में चल रहा है किंतु उसके समर्थन मे बांग्लादेश के वो कट्टरपंथी तत्व आंदोलन कर रहे हैं जिन्होंने सत्ता बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार समर्थकों के खिलाफ तथा अल्पसंख्यकों पर क्रूर हिंसा व उपद्रव किया था। स्पष्ट है कि कांग्रेस के नेतृत्व वाले इन सभी अराजक तत्वों को पश्चिम बंगाल में भाजपा की अभूतपूर्व विजय रास नहीं आ रही है। असल में यह आंदोलन एसआईआर के विरोध में नहीं अपितु बांग्लादेशी घुसपैठियों के समर्थन में, उनको संरक्षण प्रदान करने के लिए किया जा रहा है। प्रदर्शन कारियों की इस भीड़ में वही अराजक तत्व शामिल हैं जिन्होंने सीएए कानून के खिलाफ हिंसक आंदोलन किया था और जो तथाकथित जेन ज़ी के नाम पर इकठ्ठा होकर आन्दोलन को हिंसक बनाना चाहते थे।
यह अत्यंत दुर्भााग्यपूर्ण बात है कि जिस चुनाव आयोग की छत्रछाया में गांधी परिवार की तीन- तीन पीढ़ियाँ भारत के प्रधानमंत्री पद तक पहुँची और लगभग प्रत्येक सदस्य सांसद बना वही गांधी परिवार आज चुनाव आयोग पर मतदाताओं की सूची सही करने के सार्थक प्रयास पर कीचड़ उछाल रहा है। राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी 94 से अधिक चुनाव हार चुकी है। स्वाभाविक है कि राहुल गांधी तनाव में हैं । गाँधी परिवार समझ चुका है कि को संभवतः कभी प्रधानमंत्री नहीं बन पायेंगे। यही हाल रहा तो उनके हाथ से केरल, कर्नाटक व हिमाचल प्रदेश जैसी राज्य सरकारें भी निकल सकती हैं। वर्ष 2027 में जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं वहां कांग्रेस के नेतृत्व वाले इंडी गठबंधन के हालात बहुत अच्छे नहीं हैं । पंजाब में कांग्रेस पार्टी के पास सत्ता में वापसी का एक सुनहरा अवसर था किंतु पंजाब कांग्रेस में आपसी गुटबाजी ने वह अवसर भी खो दिया है। इसी हताशा में कांग्रेस और गाँधी परिवार सभी परिवारवादी दलों को एकजुट करके देशविरोधी ताकतों के साथ मिलकर भारत को बांग्लादेश, श्रीलंका व नेपाल जैसा बनाने का प्रयास कर रहे हैं ।
गाँधी परिवार की हताशा राहुल और प्रियंका के सार्वजानिक व्यवहार में भी दिखती है। भाई- बहिन दोनों ही कभी किसी को धक्का दे रहे हैं , कभी किसी को कोहनी मार रहे है। राहुल ने एक महिला पुलिस कर्मी को किसी गुंडे की तरह पकड़ लिए वहीं प्रियंका ने पुलिस कर्मी को कोहनी मार दी। उनके व्यवहार में कुसंस्कार स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ते हैं ।
वर्ष 2014 से लेकर 2024 तक लगातार तीन बार प्रधानमंत्री बनने के बाद भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता में किसी प्रकार की गिरावट नहीं आ रही है। यही कांग्रेस और राहुल की पीड़ा है जो उनके उतावलेपन और झुंझलाहट को सीमा पार पहुंचा रहा है।
वर्ष 1952 से अब तक नौ बार एसआईआर हो चुका है जिसमें कांग्रेस के सत्ता में रहते 7 बार और एनडीए के समय में दो बार ही हुआ है। दक्षिण के सभी राज्यों में एसआईआर हो चुका है। एसआईआर के बाद तमिलनाडु में हुए चुनावों में बड़ा परिवर्तन हुआ और टीवीके की सरकार बनी। वहां कांग्रेस सरकार में शामिल हो गई और एसआईआर का कोई विरोध नहीं कर रही। केरलम के कांग्रेसी मुख्यमंत्री सतीशन ने विधानसभा चुनाव जीतने के बाद कहा था कि एसआईआर के बाद ही वह चुनाव जीते और मुख्यमंत्री बने हैं किंतु अब वही सतीशन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। यही नहीं सतीशन राहुल को प्रसन्न करने के लिए संविधान के विरुद्ध जाकर केरलम विधानसभा में एसआईआर व ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रस्ताव भी ला रहे हैं।
कांग्रेस के नेतृत्व में इंडी गठबंधन ने अराजकता का रास्ता चुना है। इसके लिए वे अराजकता फ़ैलाने में माहिर आंदोलनजीवी गिरोह का सहारा ले रहे हैं। उसी भारत-हिन्दू विरोधी आंदोलनजीवी गिरोह अपने राज खुद ही खोल दिए हैं। अब इंडी खेमे में बेचैनी ही बेचैनी है।
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