Special Article: शांति के नाम पर निर्दोषों का खून और  पानी एक साथ नहीं बहेगा 

जम्मू कश्मीर के पहलगाम हमले के जब से भारत ने पाकिस्तान के साथ सिन्धु जल समझौता रद्द किया है तभी से पाकिस्तान लगातर

By INA News Desk
Jul 9, 2026 - 11:30
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Special Article: शांति के नाम पर निर्दोषों का खून और  पानी एक साथ नहीं बहेगा 
शांति के नाम पर निर्दोषों का खून और  पानी एक साथ नहीं बहेगा 

लेखक: मृत्युंजय दीक्षित 
जम्मू कश्मीर के पहलगाम हमले के जब से भारत ने पाकिस्तान के साथ सिन्धु जल समझौता रद्द किया है तभी से पाकिस्तान लगातर पूरी दुनिया के समक्ष पीड़ित देश होने का नाटक कर रहा है और हाथ पांव मार रहा है  कि किसी तरह दबाव में आकर भारत सिंधु जल समझौता बहाल कर दे ।इसके साथ ही  उसके पूर्व विदेश मंत्री और पीपीपी नेता विलावल भुटटो भारत को परमाणु युद्ध की धमकियां भी  देने लग गए गये है। भारत के कड़े तेवरों के कारण सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान की बैचेनी अब काफी व्यग्र हो उठी है। इस्लामाबाद में एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन भी आयेाजित किया गया जिसमें पाकिस्तानी मंत्रियों और सांसदों ने भारत को धमकी देने का प्रयास  किया। पाक उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार  ने कहा कि सिंधु जलसंधि सिर्फ पानी बांटने का समझौता नहीं अपितु दक्षिण एशिया में शांति, स्थिरता और सहयोग की मजबूत नीव है।  
वहीं दूसरी ओर संयुक्तराष्ट्र महासभा की बैठकों में भारत एक माह में ही चार बार पाकिस्तान को आईना दिख चुका है। बिलावल ने धमकी देते हुए बयान दिया कि अगर पाकिस्तान के पानी को रोकने का प्रयास हुआ तो यह पाकिस्तान के अस्तित्व पर हमला माना जाएगा और यह परमाणु प्रतिक्रिया जैसी स्थिति पैदा कर सकता है। आज पाकिस्तान  सिंधु जल के लिए तरस रहा है और उसका असर वहां की आम जनजीवन पर दिखलाई भी पड़ने लग गया है । इतना होने पर भी पाकिस्तान अपनी नापाक हरकतों से बाज आने को तैयार नहीं है। वह लगातार भारत के विरुद्ध आतंकवादी गतिविधियों को चला रहा है और आतंकियों को संरक्षण दे रहा है।अतः हमारे रक्षामंत्री श्री राजनाथ सिंह ने भी पाकिस्तान को स्पष्ट सन्देश दे दिया है कि अब वह सिंधु जल समझौता पूरी तरह से भूल जाए  क्योंकि खून और पानी एक साथ नहीं बह सकता। 
निकल पड़े शांतिदूत -  इस बीच एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम यह हुआ है कि भारत और पाकिस्तान की तथाकथित 116 बुद्धिजीवी हस्तियों ने  भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाक प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को पत्र लिखकर शांतिवार्त  पुनः  शुरू करने की वकालत की है जिसे भारत सरकार ने स्पष्ट रूप से ठुकरा दिया है और एक बार फिर बता दिया है कि अब खून और पानी एक साथ नहीं बह सकता, नही बह सकता। 
सेंटर फार पीस एंड प्रोगेस के अध्यक्ष ओ पी शाह की तरफ से 116 प्रमुख हस्तियों ने हस्ताक्षर किए हैं जिसमें 60भारत व 56 पाकिस्तान से है। अब इन हस्तियो में जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का नाम भी जुड़ गया है।इस प्रकार ब्याह संख्या 117  हो गई है।आज भारत की जिन 61 हस्तियों ने इस पत्र में हस्ताक्षर किए हैं उनमें अधिकतर वही लोग शामिल हैं जिन्होंने भारत पर हुए अब तक के किसी भी आतंकवादी हमले की ना तो  निंदा की और न पीड़ितों के प्रति संवेदना व्यक्त की। कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर की सदा से ही पाकिस्तान के प्रति ही संवेदनाएं रही हैं , उन्हें पाकिस्तान के प्रति प्रेम रहा है ,उनके बयान पाकिस्तानी मीडिया में छाए रहते है। जम्मू कश्मीर से धारा 370 का पटाक्षेप होने के बाद  से महबूबा मुफ़्ती सईद और फारुख अब्दुल्ला परिवार पाकिस्तान प्रेम मेंअत्यंत छटपटा रहा है। राजद सांसद मनोज झा जिनकी भारत में कोई राजनैतिक हैसियत नहीं है ऐसे ही पाकिस्तान प्रेमी 61 लोगों की सूची देखने के बाद इन सभी की मंशा एकदम स्पष्ट हो रही है कि ये  लोग वास्तव में शांति  के नकली नायक बनकर भारतीयों और दुनिया के तमाम लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचना चाह रहे हैं और  अपनी उपस्थिति का एहसास  बिल्कुल उसी तरह कराना चाह रहे हैं और जिस प्रकार  अमेरिका -ईरान युद्ध के दौरान पाकिस्तानी सेना प्रमुख मुनीर और  शाहबाज शरीफ अमेरिकी गुलाम या कठपुतली बनकर  या फिर मध्यस्थ बनकर शांति का ढिंढोरा  पीट रहा था। 
यह अत्यंत दुर्भाग्य  की बात है शांति का ढिंढोरा पीटने वाले यह लोग 1970 से लेकर अब पहलगाम तक जितने भी आंतकी हमले हुए उन्हें भूल चुके हैं . भारत ने पाकिस्तान को शांति वार्ता करने के कई अवसर दिए और बारंबार दिए। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी जी तो बस लेकर पाकिस्तान गए थे उसके बाद  भारत को कारगिल का युद्ध लड़ना पड गया.
 पाकिस्तान भारत के खिलाफ न केवल आंतकवाद की समस्या ही पैदा कर रहा है अपितु भारत में शाति भंग करने व विकास कार्यों में बाधा पहुँचाने के लिए हर प्रकार की घृणित व विकृत साजिशों को लगातार अंजाम दे रहा है ।बांग्लादेश  में हिंदुओं के खिलाफ पाकिस्तान की खुफिया  एजेंसी आईएसआई ही साजिशें रच रही थी। 
आज जिन लोगों ने भारत और पाकिस्तान के साथ शांतिवार्ता शुरू करने की जो वकालत की है वे लोग तब कहाँ चले गए थे जब बांग्लादेश में हिंदुओं का कत्ले-आम हो रहा था,  हिन्दू बहिन -बेटियों  पर क्रूर और शर्मनाक अत्याचार किये जा रहे थे.  इन लोगो ने अपना पत्र ऐसे समय में लिखा है जब पाकिस्तान पाक अधिकृत कश्मीर में अपना दमनचक्र चला रहा है . पूरा पीओजेके पाकिस्तान के वर्चस्व  से स्वतन्त्र होना चाह रहा है. अतः इन हस्तियो को ऐसे समय में पीओजेके के आंदोलनकारियों के समर्थन में आना चाहिए था और पाकिस्तान से कहना चाहिए था वह पाक अधिकृत कश्मीर को पूरी तरह से स्वतंत्र करें और बलूचिस्तान को भी आजादी दे। किंतु इन लोगों’ ने ऐसा कोई मुददा अपने पत्र में नहीं उठाया है जिससे इन लोगों की मंशा पर  संदेह उत्पन्न होना स्वाभाविक ही है। सबसे बडा दुर्भाग्य यह है कि इन लोगों ने अपने पत्र के माघ्यम से पुलवामा में 40 जवानों की शहादत से लेकर पहलगाम हमलों की घटना की निंदा तक नहीं की और उसे इतनी आसानी से भूल गए। वास्तविकता यह है कि  आज जो लोग पत्र लिख रहे हैं उनके लिए पाकिस्तान से गोश्त आना -जाना बंद हो गया है यह सभी लोग इसीलिए  पाकिस्तान से वार्ता की वकालत करने लग गए हैं। इन्हें न भारत देश से कोई प्रेम है और न भारत की जनता से, ये राजनैतिक और आर्थिक स्वार्थ के लिए नाटक कर रहे हैं .
भारत तो हमेशा से ही वार्ता की वकालत करता रहा है और आज भी कर रहा है । वह कई बार हर मंच पर स्पष्ट भी कर चुका है कि अब पाकिस्तान के साथ वार्ता केवल आतंकवाद पर ही होगी बिना किसी मध्यस्थ के होगी और पाकिस्तान को पाक अधिकृत कश्मीर तत्काल प्रभाव से खाली करना ही होगा। 
ताजा घटनाक्रम में , भारत के विरुद्ध षड्यंत्रों में शामिल रहने वाला चीन भी अब सिन्धु जल संधि के मुद्दे को लेकर पाकिस्तान के समर्थन में खड़ा होने का प्रयास कर  रहा है। देश को अपने वर्त्तमान नेतृत्व, रणनीति कारकों और सेना पर विश्वास रखना चाहिए कि वे इन षड़यंत्रकारी पड़ोसीदेशों के षड़यंत्र को कभी सफल नहीं होने देंगे तथा भारत को एक सशक्त और सबल राष्ट्र के रूप में स्थापित करेंगे ।

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