Special Article: भारत - इंडोनेशिया संबंधों की मजबूत होती डोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन देशों की यात्रा के प्रथम चरण में इंडोनेशिया पहुंचे, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया। प्रधानमंत्री
लेखक: मृत्युंजय दीक्षित
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन देशों की यात्रा के प्रथम चरण में इंडोनेशिया पहुंचे, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया। प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत -इंडोनेशिया के मजबूत रणनीतिक संबंधों को नई ऊंचाई देने वाली रही। प्रधानमंत्री मोदी की इस इंडोनेशिया यात्रा से चीन की विस्तारवादी कूटनीति को भी स्पष्ट व कड़ा संदेश दिया गया है। सबसे बड़ी मुस्लिम अबादी वाले देश इंडोनेशिया में हुआ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भव्य स्वागत अभूतपूर्व रहा। प्रधानमंत्री मोदी ने इंडोनेशिया की संसद को हिंदी भाषा में संबोधित किया और आतंकवाद का मुद्दा उठाते हुए पाकिस्तान को भी स्पष्ट संदेश दिया। इंडोनेशिया की सीमा में प्रवेश करते ही प्रधानमंत्री के विमान को वहां की वायुसेना के विमानों ने एस्कॉर्ट किया। राष्ट्रपति प्राबावो सूबियांतो समेत कई मंत्रियो ने उनका स्वागत किया जो प्रधानमंत्री मोदी व राष्ट्रपति प्राबोवो के प्रगाढ़ आत्मीय समबन्धों का परिचायक है। इंडोनेशिया ने प्रधानंत्री मोदी को अपना सर्वोच्च सम्मान ”बिन्तांग आदिपूर्ण आफ द रिपब्लिक आफ इंडोनेशिया मेडल ऑफ़ आनर” प्रदान किया। यह सम्मान इंडोनेशिया की एकता, निरंतरता और समृद्धि के लिए असाधारण सेवा करने वाले को प्रदान किया जाता है।
प्रधानमंत्री मोदी की इंडोनेशिया यात्रा में रक्षा, समुद्री सुरक्षा और व्यापार तथा तकनीक समेत कई क्षेत्रो में सहयोग बढ़ाने को लेकर निर्णय लिए गए हैं। सबसे अहम समझौता ”ब्रहमोस” और ”अस्त्र” मिसाइलों के समबन्ध में हुआ। यह दोनों मिसाइलें ऑपरेशन सिंदूर में अपनी ताकत दिखा चुकी हैं और अब इंडोनेशिया की सुरक्षा में भी तैनात होने जा रही हैं।इससे इस पूरे क्षेत्र का सुरक्षा तंत्र पूरी तरह से बदल जाएगा। इंडोनेशिया अपने सुखोई विमानों के लिए भारत की अस्त्र मिसाइलें चाहता है।
प्रधानमंत्री मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान रक्षा, अंतरिक्ष, कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा और डिजिटल तकनीक सहित कुल मिलाकर 20 समझौते हुए हैं और सभी महत्वपूर्ण हैं। भारत और इंडोनेशिया के मध्य एक बड़ा व महत्वपूर्ण समझौता दोनो देशॉन के चुनाव आयोगों के मध्य हुआ है जिसके अंतर्गत भारत इंडोनेशिया की आवश्यकताओं के अनुसार विशेष इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ईवीएम ) विकसित करने में तकनीकी सहयेाग देगा। इसके अलावा चुनाव प्रबंधन और तकनीकी के उपयोग में भी दोनों देश मिलकर काम करेंगे। दोनों देशों के बीच हुआ यह समझौता दोनो देशों के मध्य लोकतांत्रिक सहयोग को और मजबूत करेगा। हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा मजबूत करने के लिए भारत के इन्फर्मेशन फ्यूजन सेंटर इंडियन ओशन रीजन में इंडोनेशिया का एक अधिकारी नियुक्त किया जाएगा। भारत की स्टील अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया और इंडोनेशिया की स्टील अथॉरिटी के सहयोग से इंडोनेशिया में स्टेनलेस स्टील स्लैब निर्माण की दिशा में पहल की जाएगी। इंडोनेशिया में आईआईएम बेंगलुरु का कैंपस खोला जाएगा।
भारत और इंडोनेशिया ने अंतरिक्ष, उद्योग और स्वास्थ्य में भविष्य के हिसाब से तकनीकी साझेदारी को ध्यान में रखकर कई अहम समझौते किए हैं। दुर्लभ पृथ्वी चुंबक को लेकर भी एक समझौता हुआ है। दूरसंचार और इनोवेशन सहयोग के क्षेत्र समझौता हुआ है। कृषि, आपदा प्रबंधन, गेंहू के बीजों की आपूर्ति को लेकर भी व्यापक समझौते हुए हैं। दोनों देशों के मध्य सांस्कृतिक और शैक्षणिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए टैगोर - देवंतर सांस्कृतिक और शैक्षिक कूटनीति वर्ष मनाने की घोषणा की गई है।
भारत और इंडोनेशिया के मध्य सांस्कृतिक व आध्याात्मिक संबंध अत्यंत प्रगाढ़ रहे हैं। इनको और अधिक मजबूती प्रदान करने के लिए इंडोनेशिया के योग्यकर्ता में स्थित ऐतिहासिक प्रमबानन मंदिर परिसर के संरक्षण व जीर्णोद्धार में भारत सहायता करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रमबानन मंदिर भी गए जहां ॐ नमः शिवाय का उद्घोष हुआ।
प्रधानमंत्री मोदी ने इंडोनेशिया की संसद को भी संबोधित किया जहां उन्होंने भारत -इंडोनेशिया की साझा लोकतांत्रिक विरासत, विकास आधारित साझेदारी और आपसी विश्वास पर बल दिया तथा चीन की विस्तारवाद नीति को खारिज करते हुए कहा कि भारत की नीति विस्तारवाद की नहीं विकासवाद की है।उन्होंने एक बार फिर ”सबका साथ -सबका विकास” का मूल मंत्र दुनिया के समक्ष रखा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कॉपीराइट शब्द का उल्लेख करते हुए कहा कि जैसे सम्मान पर किसी का कॉपीराइट नहीं हो सकता उसी प्रकार राष्ट्रपति प्राबोवो केसाथ मेरी मित्रता भी किसी कॉपीराइट की सीमाओं में बंधी नहीं है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भले ही हमारी राजधानियों के बीच हजारों किमी की दूरी हो लेकिन समुद के रास्ते हमारे बीच की दूरी मात्र 150 किमी ही है। दुनिया के कई देशों के बीच समुद्र सीमाओं और दूरियों का प्रतीक रहा है लेकिन भारत और इंडोनेशिया के बीच समुद्र कभी दूरी का नहीं अपितु सेतु का प्रतीक रहा है। भारत -इंडानेशिया का इतिहास भी भी एक दूसरे से गहराई से जुड़ा हुआ है। हमारे रिश्तों की जड़ें रामायण और महाभारत की विरासत में हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि सदियों पहले नालंदा के ज्ञान से भी हमारा जुड़ाव रहा है। हमारा संबंध वायांग की नृत्य और संगीत परम्परा से भी जुड़ा है। हम बोरोबुदुर और प्रम्बानन जैसे भव्य स्मारकों से जुड़े हैं। इंडोनेशिया की संसद को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ज्ञान के साथ उत्सव व खानपान के माध्यम से भी भारत -इंडोनेशिया संबंधों को और अधिक मजबूत करने पर बल दिया व एक लंबी लकीर खीच दी। उन्होंने जकार्ता में प्रवासी भारतीयों को भी संबोधित किया और बदलते हुए भारत की विकास यात्रा का रोडमैप उपस्थित जनसमुदाय के समक्ष रखा। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो ने भी भारत और इंडोनेशिया के मध्य सांस्कृतिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने अपना डीएनए टेस्ट करवाया है और पता चला है कि उनका डीएनए भारतीय है।जब वे भारतीय संगीत सुनते हैं तो उनका बदन थिरकने लगता है।राष्ट्रपति प्राबोवो ने भी प्रधानमंत्री मोदी की भूरि-भूरि प्रशंसा की।
भारत और इंडोनेशिया के मध्य एक अहम समझौता सबांग पोर्ट को लेकर भी हुआ है। सबांग पोर्ट स्ट्रेट ऑफ मलक्का के मुहाने पर स्थित है। यहां से भारत के अंडमान निकोबार द्वीप समूह में स्थित और इंदिरा प्वाइंट 100 मील अर्थात 160 किमी की दूरी पर है। इस कदम के साथ भारत और इंडोनेशिया हिंद महासागर में अपनी स्थिति को मजबूत करेंगे। संबांग पोर्ट के विकसित हो जाने के बाद भारत का दखल इस क्षेत्र मे बढ़ जाएगा। वर्तमान समय में जब दुनिया में व्यापक पैमाने पर उथल -पुथल का दौर चल रहा है उस समय यदि भारत हिंद प्रशान्त महासागर के महत्वपूर्ण देश इंडोनेशिया के साथ मधुर संबंधों के आधार एक नया आपूर्ति मार्ग बनाने में सफल रहता है तो उसकी रणनीतिक स्थिति अत्यंत मजबूत हो जाएगी।
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