Mrityunjay Tiwari Resigns from RJD: 'ऐसी सियासत को चिमटे से भी ना छुएं', मृत्युंजय तिवारी ने राजद से दिया इस्तीफा
बिहार की राजनीति में बड़ा उलटफेर। RJD नेता मृत्युंजय तिवारी ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफा देने के बाद उन्होंने मौजूदा सियासत पर तीखा हमला बोला।
- RJD को बड़ा झटका: मृत्युंजय तिवारी ने छोड़ी पार्टी, बोले- 'ऐसी सियासत को चिमटे से भी ना छुएं'
- 'ऐसी सियासत को चिमटे से भी ना छुएं', RJD से इस्तीफा देते ही मृत्युंजय तिवारी ने खोला मोर्चा
- बिहार की राजनीति से बड़ी खबर: मृत्युंजय तिवारी का राजद से इस्तीफा, पार्टी पर साधा तीखा निशाना
बिहार की सियासत से इस वक्त एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के दिग्गज नेता और पार्टी का मुखर चेहरा रहे मृत्युंजय तिवारी ने अपने पद और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। जुलाई 2026 में पटना में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने आधिकारिक रूप से पार्टी छोड़ने की घोषणा की। RJD प्रमुख लालू प्रसाद यादव और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के बेहद करीबी माने जाने वाले तिवारी ने इस्तीफा देने के ठीक बाद नेतृत्व और वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने बेहद तल्ख लहजे में कहा कि "ऐसी सियासत को चिमटे से भी ना छुएं।" उनके इस अचानक उठाए गए कदम और तीखे बयान ने बिहार के राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है, जिसके बाद राज्य के आगामी चुनावी समीकरणों को लेकर कई तरह के कयास लगाए जाने लगे हैं।
यह पूरा मामला राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के भीतर आंतरिक असंतोष और संगठनात्मक फेरबदल की पृष्ठभूमि से जुड़ा है। लंबे समय तक मीडिया में पार्टी का पक्ष पूरी मजबूती से रखने वाले वरिष्ठ नेता मृत्युंजय तिवारी ने आखिरकार RJD को अलविदा कह दिया है। तिवारी का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब राज्य के सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी सांगठनिक तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। उनके इस्तीफे ने यह स्पष्ट कर दिया है कि विपक्षी गठबंधन या पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा था। तिवारी ने न केवल इस्तीफा दिया, बल्कि उन्होंने मौजूदा समय में हो रही राजनीतिक सौदेबाजी और दल के आंतरिक फैसलों पर गहरी नाराजगी जाहिर करते हुए सीधे तौर पर नेतृत्व के तौर-तरीकों को कटघरे में खड़ा किया है।
मृत्युंजय तिवारी पिछले काफी समय से सांगठनिक फैसलों और पार्टी के भीतर अपनी भूमिका को लेकर असहज महसूस कर रहे थे। सूत्रों के मुताबिक, पिछले कुछ हफ्तों में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ वैचारिक मतभेद काफी गहरा गए थे। इसके बाद, उन्होंने एक औपचारिक पत्र लिखकर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को अपना इस्तीफा सौंप दिया।
इस्तीफे के तुरंत बाद मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए उन्होंने अपनी भड़ास निकाली। उन्होंने वर्तमान राजनीतिक मूल्यों में आई गिरावट पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सिद्धांतविहीन राजनीति का दौर चल रहा है, जहाँ कार्यकर्ताओं के समर्पण से ज्यादा चाटुकारिता को तवज्जो दी जा रही है। उन्होंने अपने चर्चित बयान में कहा, "मैंने पूरी निष्ठा से दल की सेवा की, लेकिन वर्तमान में जो राजनीतिक हालात बन चुके हैं, वैसी सियासत को तो चिमटे से भी छूना पसंद नहीं करेगा।" हालांकि उन्होंने साफ तौर पर किसी एक चेहरे का नाम लेने से परहेज किया, लेकिन उनका इशारा साफ था कि पार्टी के फैसले अब जमीनी कार्यकर्ताओं के हित में नहीं रह गए हैं।
इस हाई-प्रोफाइल इस्तीफे के बाद बिहार की राजनीति में बयानों का दौर शुरू हो गया है:
मृत्युंजय तिवारी का पक्ष: तिवारी ने स्पष्ट किया कि वे किसी पद के लालची नहीं रहे हैं, लेकिन जब आत्मसम्मान पर चोट लगने लगे तो पीछे हटना ही बेहतर होता है। उन्होंने कहा कि वे आने वाले समय में अपने समर्थकों से बातचीत कर भविष्य की रणनीति तय करेंगे।
RJD नेतृत्व की प्रतिक्रिया: राष्ट्रीय जनता दल के आधिकारिक प्रवक्ताओं ने इस पर नपी-तुली प्रतिक्रिया दी है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि लोकतंत्र में हर किसी को अपनी राह चुनने का अधिकार है। तिवारी को पार्टी ने हमेशा सम्मानजनक स्थान दिया, और उनका यह फैसला व्यक्तिगत है।
सत्ता पक्ष (JDU और BJP) की प्रतिक्रिया: जनता दल यूनाइटेड (JDU) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं ने इस इस्तीफे पर चुटकी ली है। विपक्ष के नेताओं का कहना है कि RJD में समर्पित और पुराने नेताओं की कोई कद्र नहीं बची है, केवल परिवारवाद को आगे बढ़ाया जा रहा है, यही वजह है कि एक-एक कर पुराने स्तंभ पार्टी छोड़ रहे हैं।
मृत्युंजय तिवारी के जाने से RJD को मीडिया और जनता के बीच अपना पक्ष रखने वाले एक बेहद अनुभवी और आक्रामक वक्ता का नुकसान हुआ है। जातिगत समीकरणों और सांगठनिक दृष्टिकोण से भी देखें तो तिवारी एक विशिष्ट वर्ग का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं, जिससे RJD की 'ए टू जेड' (A to Z) वाली छवि को बल मिलता था। उनके अचानक चले जाने से पार्टी की छवि पर नकारात्मक असर पड़ सकता है, विशेषकर ऐसे समय में जब जनता के बीच आंतरिक गुटबाजी की खबरें बाहर आ रही हों। इस इस्तीफे ने अन्य असंतुष्ट नेताओं को भी अपनी आवाज बुलंद करने का एक मौका दे दिया है।
मृत्युंजय तिवारी का अगला कदम क्या होगा, इस पर पूरे बिहार की नजरें टिकी हुई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तिवारी जल्द ही किसी अन्य बड़े राजनीतिक विकल्प का दामन थाम सकते हैं या फिर एक स्वतंत्र मंच के जरिए अपनी ताकत का अहसास करा सकते हैं। वहीं दूसरी ओर, राजद नेतृत्व अब उनके विकल्प के तौर पर किसी नए और प्रखर चेहरे को आगे लाने की कवायद में जुट गया है ताकि मीडिया और राजनीतिक मंचों पर पार्टी की रक्षा मजबूती से की जा सके। आने वाले दिनों में बिहार के इस राजनीतिक घटनाक्रम में कई और बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
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