झारखंड: JPSC-JSSC परीक्षा धांधली के खिलाफ छात्र आंदोलन तेज, विधायक जयराम महतो विधानसभा के बाहर अनशन पर बैठे

JPSC और JSSC परीक्षा धांधली के खिलाफ रांची में छात्रों का आंदोलन 16वें दिन जारी है। डुमरी विधायक जयराम महतो विधानसभा के बाहर अनशन पर बैठ गए हैं।

Aug 9, 2026 - 12:51
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झारखंड: JPSC-JSSC परीक्षा धांधली के खिलाफ छात्र आंदोलन तेज, विधायक जयराम महतो विधानसभा के बाहर अनशन पर बैठे
JPSC JSSC Exam Protest
  • झारखंड परीक्षा धांधली विवाद: MLA जयराम महतो का विधानसभा परिसर के बाहर एकदिवसीय अनशन, छात्रों के आंदोलन को मिला समर्थन
  • JPSC-JSSC धांधली मामला: रांची में 16 दिनों से डटे छात्र, विधायक जयराम महतो का अनशन, बेनतीजा रही सरकार से वार्ता
  • झारखंड में भर्ती परीक्षाओं की धांधली पर बवाल: विधायक जयराम महतो अनशन पर बैठे, जानिए सरकार और छात्रों के बीच वार्ता विफल होने के बाद क्या है नया मोड़

झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली और अनियमितताओं के खिलाफ युवाओं का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अभ्यर्थियों का अनिश्चितकालीन आंदोलन पिछले 16 दिनों से लगातार जारी है। इसी क्रम में छात्रों की मांगों को समर्थन देने के लिए झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के अध्यक्ष और डुमरी विधानसभा सीट से विधायक जयराम महतो ने बड़ा कदम उठाया है। जयराम महतो रविवार को झारखंड विधानसभा परिसर के बाहर निर्जल एकदिवसीय अनशन पर बैठ गए हैं। सरकार द्वारा गठित पांच सदस्यीय मंत्रिस्तरीय समिति के साथ छात्र नेताओं की वार्ता बेनतीजा रहने के बाद राज्य में राजनीतिक और सामाजिक हलचल काफी बढ़ गई है।

झारखंड की प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित तौर पर हुई अनियमितताओं, पेपर लीक और फर्जीवाड़े के विरोध में हजारों परीक्षार्थी और युवा रांची की सड़कों पर उतरे हुए हैं। अभ्यर्थियों का आरोप है कि राज्य में आयोजित होने वाली परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर धांधली हो रही है, जिससे मेधावी छात्रों का भविष्य अंधकारमय हो रहा है। आंदोलनकारी छात्रों की प्रमुख मांग है कि सभी विवादित परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। इसी आंदोलन को धार देने और सरकार पर दबाव बनाने के लिए जन प्रतिनिधि के रूप में विधायक जयराम महतो ने भी खुद अनशन की राह चुनी है।

रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में शुरू हुआ यह आंदोलन अब पूरे राज्य का ध्यान आकर्षित कर रहा है। जेएलकेएम पार्टी के एक वरिष्ठ नेता देवेंद्र नाथ महतो पिछले कई दिनों से आमरण अनशन पर हैं, जिससे उनकी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार ने गतिरोध समाप्त करने के लिए पांच सदस्यीय मंत्रिस्तरीय समिति का गठन किया था। शनिवार को इस सरकारी समिति और आंदोलनकारी छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच काफी देर तक वार्ता आयोजित की गई।

हालांकि, यह बातचीत पूरी तरह बेनतीजा समाप्त हो गई क्योंकि छात्र प्रतिनिधि मंडल सरकार के किसी भी अस्पष्ट या औपचारिक आश्वासन से संतुष्ट नहीं हुआ। वार्ता विफल होने के बाद छात्रों ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक उनकी सभी मांगें आधिकारिक तौर पर स्वीकार नहीं की जातीं, आंदोलन खत्म नहीं होगा।

इसी बीच रविवार को डुमरी विधायक जयराम महतो ने विधानसभा परिसर के बाहर बैठकर अनशन शुरू कर दिया। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए ऐलान किया कि वह अपने इस एकदिवसीय अनशन के दौरान जल भी ग्रहण नहीं करेंगे। विधायक ने आरोप लगाया कि झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं के दौरान ओएमआर (OMR) शीट खाली छोड़कर बाद में भरने, घर बैठकर उत्तर पुस्तिकाएं लिखने और मोटी रकम लेकर सीटें बेचने जैसे संगीन मामले लगातार सामने आ रहे हैं, जो राज्य के लाखों युवाओं के साथ सीधा खिलवाड़ है।

अनशन पर बैठे विधायक जयराम महतो ने राज्य के विभिन्न सामाजिक और व्यावसायिक वर्गों से अभ्यर्थियों के समर्थन में आगे आने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह केवल परीक्षार्थियों की लड़ाई नहीं है, बल्कि पूरे झारखंड के स्वाभिमान और पारदर्शिता की जंग है। उन्होंने मजदूरों, वकीलों, व्यापारियों और किसानों के संगठनों से अपने-अपने स्तर पर कुछ समय के लिए सांकेतिक अनशन या समर्थन कार्यक्रम आयोजित करने का आह्वान किया।

दूसरी ओर, सरकारी समिति से जुड़े सूत्रों का कहना है कि प्रशासन छात्रों के सभी न्यायसंगत मुद्दों पर विचार करने के लिए तैयार है और परीक्षा प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि, आंदोलनकारियों का तर्क है कि सरकार केवल आश्वासन देने के बजाय ठोस और लिखित निर्णय लागू करे।

रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से शुरू हुआ यह छात्र आंदोलन अब व्यापक राजनीतिक रूप ले चुका है। विधानसभा परिसर के बाहर विधायक के अनशन पर बैठने से राज्य की हेमंत सोरेन सरकार पर राजनीतिक दबाव काफी बढ़ गया है। राज्यभर के युवाओं और प्रतियोगी परीक्षार्थियों का समर्थन इस आंदोलन को मिल रहा है, जिससे कई जिलों में विरोध-प्रदर्शन की आशंका जताई जा रही है। छात्र संगठनों का रुख कड़ा होने के कारण राज्य की प्रशासनिक और कानून व्यवस्था से जुड़ी एजेंसियां भी सतर्क मोड पर आ गई हैं।

छात्र नेताओं ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर सरकार कोई लिखित और ठोस फैसला नहीं लेती, तब तक जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में धरना जारी रहेगा। यदि आगामी दिनों में भी सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच कोई ठोस सहमति नहीं बनती है, तो यह आंदोलन राज्यव्यापी बंद या उग्र प्रदर्शन का रूप ले सकता है। सभी की निगाहें अब सरकार के अगले रुख और कैबिनेट या प्रशासनिक स्तर पर लिए जाने वाले फैसलों पर टिकी हुई हैं।

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