Devendra Mahato Fast Unto Death: देवेंद्र महतो का अनशन 11वें दिन जारी, छात्रों ने दी 'मास मूवमेंट' की चेतावनी
Jharkhand Student Protest: JPSC और JSSC परीक्षाओं में गड़बड़ी के खिलाफ JLKM नेता देवेंद्र महतो का अनशन 11वें दिन भी जारी। रांची में छात्रों ने दी मास मूवमेंट की चेतावनी।
- Jharkhand JPSC JSSC Issue: 11वें दिन भी अनशन पर डटे JLKM नेता देवेंद्र महतो, रांची में बड़े आंदोलन का ऐलान
- झारखंड में उग्र हुआ छात्र आंदोलन: देवेंद्र महतो के अनशन का 11वां दिन, JPSC-JSSC अभ्यर्थियों ने दी राज्यव्यापी 'मास मूवमेंट' की चेतावनी
- Jharkhand Student Protest: अनशन के 11वें दिन बिगड़ी देवेंद्र महतो की तबियत, रांची में छात्रों ने किया बड़े प्रदर्शन का ऐलान
झारखंड में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं व धांधली के विरोध में झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के प्रमुख नेता देवेंद्र महतो का अनशन आज, 12 अगस्त 2026 को 11वें दिन भी जारी है। राजधानी रांची में पिछले दस दिनों से लगातार अनशन पर बैठे देवेंद्र महतो की शारीरिक स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। इस बीच, आंदोलन को समर्थन दे रहे सैकड़ों छात्रों और प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थियों ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अभ्यर्थियों ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ही उनकी मांगों पर संज्ञान नहीं लिया, तो इस शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन को पूरे झारखंड में एक उग्र 'मास मूवमेंट' (जन आंदोलन) का रूप दे दिया जाएगा।
झारखंड की राज्यस्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए छात्र नेता और जेएलकेएम प्रतिनिधि देवेंद्र महतो पिछले 11 दिनों से आमरण अनशन पर डटे हुए हैं। उनकी मुख्य मांगों में JPSC और JSSC द्वारा आयोजित विभिन्न परीक्षाओं में सामने आई गड़बड़ियों की निष्पक्ष व उच्चस्तरीय जांच कराना, लंबित परिणामों को पारदर्शी तरीके से घोषित करना और परीक्षा प्रक्रियाओं में कड़े सुधार लागू करना शामिल है। अनशन स्थल पर लगातार स्वास्थ्य गिरते रहने के बावजूद देवेंद्र महतो अपनी मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं, वहीं दूसरी तरफ छात्रों का गुस्सा भी चरम पर पहुंच रहा है।
यह पूरा विवाद तब और गहरा गया जब अभ्यर्थियों ने राज्य की प्रमुख भर्ती परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक के आरोप लगाए। इसके विरोध में देवेंद्र महतो ने राज्य सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए रांची में अनशन की शुरुआत की थी। अनशन के 11वें दिन भी सरकार की ओर से कोई ठोस ठोस पहल न होने पर अभ्यर्थियों का धैर्य जवाब देने लगा है। अनशन स्थल पर एकत्र हुए राज्य भर के हजारों अभ्यर्थियों ने जमकर नारेबाजी की और प्रशासनिक उदासीनता पर गहरा असंतोष व्यक्त किया।
डॉक्टरों की टीम द्वारा अनशन पर बैठे देवेंद्र महतो के स्वास्थ्य का नियमित परीक्षण किया जा रहा है। चिकित्सकों के अनुसार लगातार 10 दिनों से अधिक समय तक अन्न-जल का त्याग करने के कारण उनका ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल तेजी से नीचे गिरा है, जिससे उनकी स्थिति चिंताजनक होती जा रही है। इसके बावजूद वे अस्पताल जाने से इनकार कर रहे हैं और मांगें पूरी होने तक अनशन जारी रखने की बात कह रहे हैं। छात्रों के प्रतिनिधिमंडलों ने अब राज्यव्यापी रणनीति बनानी शुरू कर दी है, जिसके तहत आने वाले दिनों में सड़क से लेकर सरकारी कार्यालयों के घेराव की योजना बनाई जा रही है।
अनशन पर बैठे जेएलकेएम नेता देवेंद्र महतो ने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ उनकी व्यक्तिगत नहीं, बल्कि झारखंड के लाखों शिक्षित युवाओं के भविष्य की लड़ाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है और धांधली के आरोपी अधिकारियों व माफियाओं को बचाने का प्रयास कर रही है। जब तक प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच की घोषणा नहीं होती और भर्ती प्रक्रियाओं को दुरुस्त नहीं किया जाता, तब तक यह अनशन खत्म नहीं होगा।
दूसरी ओर, आंदोलनकारी छात्र संगठनों के समन्वयकों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने चौबीस से तालीस घंटे के भीतर कोई सार्थक सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो राज्य भर के सभी जिलों में चक्का जाम और विशाल जन आंदोलन की शुरुआत की जाएगी। छात्रों का कहना है कि सरकार संवाद स्थापित करने की जगह इस आंदोलन को अनदेखा कर रही है। इस मामले पर स्थानीय प्रशासन ने बताया कि वे स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए हैं और अनशनकारी की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए शांति बनाए रखने की अपील कर रहे हैं।
देवेंद्र महतो के अनशन का असर अब पूरे झारखंड के शैक्षणिक और राजनीतिक परिदृश्य पर साफ देखा जा सकता है। राजधानी रांची के अलावा धनबाद, बोकारो, जमशेदपुर, हजारीबाग और दुमका जैसे प्रमुख शहरों में भी अभ्यर्थियों का गुस्सा सड़कों पर उतरने लगा है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं के बीच असंतोष गहराता जा रहा है। इस मामले ने तूल पकड़ लिया है, जिससे राज्य सरकार पर प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर दबाव अत्यधिक बढ़ गया है।
छात्रों द्वारा दी गई 'मास मूवमेंट' की चेतावनी के बाद रांची पुलिस और प्रशासन अलर्ट पर हैं। अनशन स्थल और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बल की तैनाती बढ़ा दी गई है। आने वाले दिनों में यदि राज्य सरकार और आंदोलनकारियों के बीच कोई वार्ता सफल नहीं होती है, तो यह आंदोलन राज्यव्यापी बंद और व्यापक विरोध प्रदर्शन का रूप ले सकता है। फिलहाल सभी की निगाहें राज्य सरकार के अगले कदम और देवेंद्र महतो के स्वास्थ्य पर टिकी हुई हैं।
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