Naimisharanya News: कृष्ण स्पर्श होटल के पास नाले के गड्ढे में धंसा गिट्टी भरा डंपर, टला बड़ा हादसा
नैमिषारण्य में भादों मेले के दौरान कृष्ण स्पर्श होटल मोड़ पर नाले के गहरे गड्ढे में गिट्टी भरा डंपर धंस गया। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच बड़ा हादसा टलने से राहत।
रिपोर्ट:-सुरेंद्र मोठी INA News, संवाददाता नैमिषारण्य
नैमिषारण्य (सीतापुर)। तीर्थ नगरी नैमिषारण्य में भादों माह के अंतिम रविवार को उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच एक गंभीर सड़क हादसा होने से बाल-बाल बच गया। लखनऊ–सीतापुर लिंक बाईपास मार्ग पर कृष्ण स्पर्श होटल के समीप तीखे मोड़ पर जल निकासी के उद्देश्य से खोदे गए गहरे गड्ढे में गिट्टी से लदा एक भारी डंपर अनियंत्रित होकर धंस गया। वाहन का पिछला हिस्सा कीचड़ व जलभराव से युक्त गड्ढे में गहराई तक समा गया, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। सौभाग्यवश घटना के समय कोई अन्य वाहन अथवा पदयात्री डंपर की जद में नहीं आया, जिससे जान-माल का बड़ा नुकसान होने से टल गया।
घटनास्थल पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह स्थान मुख्य बाईपास का एक संकरा और तीखा मोड़ है। डंपर निर्माण सामग्री लेकर गुजर रहा था, तभी सड़क के किनारे कटे हुए नाले के कच्चे हिस्से की मिट्टी अचानक बैठ गई और वाहन का भारी पहिया सीधे खुले गड्ढे में उतर गया। चालक ने समय रहते वाहन पर नियंत्रण साधने का प्रयास किया, जिससे डंपर पूरी तरह पलटने से बच गया। यदि वाहन पूरी तरह पलट जाता, तो मोड़ से गुजर रहे अन्य राहगीरों व दोपहिया वाहनों के लिए स्थिति अत्यंत घातक सिद्ध हो सकती थी।
भादों मेले के चलते मार्ग पर थी श्रद्धालुओं की भारी चहल-पहल
यह घटना उस समय घटित हुई जब नैमिषारण्य धाम में श्रद्धालुओं का व्यापक आवागमन जारी था। धार्मिक परंपरा के तहत भादों माह के रविवार को सीमावर्ती हरदोई जनपद स्थित पौराणिक हत्याहरण तीर्थ में स्नान के उपरांत लाखों श्रद्धालु नैमिषारण्य पहुंचते हैं। श्रद्धालु यहां चक्रतीर्थ, गऊघाट और राजघाट पर गोमती नदी में आस्था की डुबकी लगाते हैं।
इस परंपरा के चलते सुबह से ही सीतापुर, हरदोई, लखनऊ और आसपास के जनपदों से निजी वाहनों, बसों और टैक्सियों के माध्यम से भक्तों का तांता लगा हुआ था। लखनऊ-सीतापुर लिंक मार्ग नैमिष धाम में प्रवेश और निकास के लिए प्रमुख धमनी की तरह उपयोग किया जाता है। ऐसे व्यस्ततम धार्मिक पर्व के दिन मुख्य मोड़ पर इस प्रकार का असुरक्षित गड्ढा मौजूद रहना सुरक्षा प्रबंधन और यातायात नियंत्रण पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
तीन माह से अधूरा पड़ा नाला निर्माण बना स्थानीय आफत
क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि बरसात और सीवर के गंदे पानी की निकासी के उद्देश्य से यहां नाला निर्माण की योजना शुरू की गई थी। इसके लिए सड़क की पटरी के समानांतर गहरा गड्ढा खोदा गया, किंतु कार्य को समयबद्ध तरीके से पूरा नहीं किया गया। स्थानीय दुकानदारों और निवासियों के अनुसार, विगत लगभग तीन महीनों से यह स्थान इसी प्रकार बदहाल पड़ा हुआ है।
बारिश के दिनों में सड़क का पानी जमा होने के कारण सड़क और गड्ढे के बीच का अंतर समाप्त हो जाता है। कीचड़ और फिसलन के चलते पूर्व में भी कई हल्के वाहन और दोपहिया चालक यहां फिसलकर गिर चुके हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि उन्होंने कई बार संबंधित निर्माण एजेंसी और स्थानीय प्रशासनिक अमले को इस समस्या से अवगत कराया, परंतु कार्य को गति देने अथवा समुचित सुरक्षा प्रबंध करने के बजाय स्थिति को जस का तस छोड़ दिया गया।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी: न बैरिकेडिंग, न चेतावनी बोर्ड
सड़क सुरक्षा से जुड़े स्थापित नियमों के अनुसार, किसी भी सार्वजनिक मार्ग अथवा मोड़ पर यदि कोई गहरी खुदाई या निर्माण कार्य संचालित होता है, तो वहां स्पष्ट संकेतकों का होना अनिवार्य है। कृष्ण स्पर्श होटल के मोड़ पर इस बुनियादी सुरक्षा प्रोटोकॉल का खुला उल्लंघन देखने को मिला।
गड्ढे के चारों ओर न तो कोई मजबूत लोहे या कंक्रीट की बैरिकेडिंग लगाई गई थी और न ही रेडियम रिफ्लेक्टर युक्त चेतावनी बोर्ड लगाए गए थे। रात्रि के समय इस मार्ग पर पर्याप्त स्ट्रीट लाइट का अभाव स्थिति को और अधिक जानलेवा बना देता है। दूर से आने वाले भारी वाहन चालकों को मोड़ काटते समय यह अनुमान लगाना अत्यंत कठिन हो जाता है कि पक्की सड़क की सीमा कहां समाप्त हो रही है और कच्चा दलदल कहां से शुरू हो रहा है।
इस घटना ने एक बार फिर स्थानीय विकास एजेंसियों और लोक निर्माण से जुड़े विभागों की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है। डंपर का पहिया धंसने के बाद मार्ग पर काफी समय तक यातायात की गति भी प्रभावित रही, जिसे क्रेन और स्थानीय लोगों के सहयोग से धीरे-धीरे सामान्य किया जा सका।
तीर्थ पुरोहितों, क्षेत्रीय समाजसेवियों और स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि किसी संभावित जनहानि का इंतजार किए बिना तत्काल प्रभाव से इस नाला निर्माण को पूर्ण कराया जाए। जब तक निर्माण कार्य प्रगति पर है, तब तक उस पूरे क्षेत्र को फाइबर या टिन शेड बैरिकेडिंग से सुरक्षित किया जाए, गति-अवरोधक बनाए जाएं और मोड़ से कम से कम 50 मीटर पूर्व चेतावनी सूचक बोर्ड स्थापित किए जाएं, ताकि नैमिष धाम आने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों का आवागमन सुरक्षित रह सके।
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