सावन कांवड़ यात्रा: नैमिषारण्य बाईपास पर छाया अंधेरा, सड़क किनारे सोने को मजबूर श्रद्धालु, बड़ा सवाल- जिम्मेदारी किसकी?

सावन के दूसरे सोमवार से पूर्व नैमिषारण्य में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा। सरकारी आदेशों के बावजूद बाईपास पर रोशनी न होने से कांवड़िए अंधेरे में चलने और सोने को मजबूर हैं।

Aug 9, 2026 - 23:59
Aug 9, 2026 - 23:59
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सावन कांवड़ यात्रा: नैमिषारण्य बाईपास पर छाया अंधेरा, सड़क किनारे सोने को मजबूर श्रद्धालु, बड़ा सवाल- जिम्मेदारी किसकी?
Naimisharanya Kanwar Yatra Bypass Darkness
  • सावन के दूसरे सोमवार से पहले नैमिषारण्य में उमड़े कांवड़िया, अंधेरे में डूबा लिंक बाईपास, सरकारी दावों की खुली पोल
  • नैमिषारण्य तीर्थ मार्ग पर छाया अंधेरा: शासन के सख्त निर्देशों के बावजूद लाइट-पानी का इंतजाम नहीं, प्रशासन बेपरवाह
  • नैमिषारण्य में उमड़ा आस्था का सैलाब, लखनऊ-सीतापुर बाईपास पर अंधेरा; शासन के आदेश दरकिनार

श्रावण मास के दूसरे सोमवार से ठीक एक दिन पहले उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल नैमिषारण्य में श्रद्धालुओं और कांवड़ियों का विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ा है। सीतापुर जिले में स्थित इस पौराणिक धाम में रविवार रात से ही हजारों की संख्या में शिवभक्त भगवान शिव के जलाभिषेक और कांवड़ में पवित्र जल भरने के लिए पहुंचने लगे हैं। हालांकि, प्रदेश सरकार द्वारा सावन शुरू होने से पहले ही कांवड़ मार्गों को पूरी तरह दुरुस्त करने, रोशनी, पानी और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के कड़े निर्देश दिए गए थे, लेकिन नैमिषारण्य के धरातल पर इन आदेशों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है। लखनऊ-सीतापुर लिंक बाईपास मार्ग पर स्ट्रीट लाइट और प्रकाश व्यवस्था न होने के कारण पूरा रास्ता अंधेरे में डूब गया है, जिससे हजारों श्रद्धालु तेज रफ्तार वाहनों के बीच सड़क किनारे आराम करने को मजबूर हैं। इस घोर प्रशासनिक लापरवाही के बाद अब क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

पवित्र श्रावण मास के दूसरे सोमवार के अवसर पर सीतापुर के नैमिषारण्य तीर्थ में आस्था का अभूतपूर्व सैलाब देखने को मिल रहा है। रविवार शाम से ही प्रदेश के विभिन्न जिलों से हजारों की संख्या में कांवड़िए और श्रद्धालु गोमती नदी के राजघाट पर स्नान-दान और जल भरने के लिए एकत्र होने लगे। श्रद्धालुओं की योजना भोर में पवित्र जल भरकर प्रसिद्ध पौराणिक शिव मंदिरों में जलाभिषेक करने की है।

लेकिन इस भव्य धार्मिक आयोजन के बीच व्यवस्थाओं का एक बेहद स्याह पहलू भी सामने आया है। तीर्थ क्षेत्र को जोड़ने वाला प्रमुख लखनऊ-सीतापुर लिंक बाईपास मार्ग रात के समय पूरी तरह से अंधेरे के आगोश में समाया रहा। प्रकाश की कोई समुचित व्यवस्था न होने के कारण कांवड़ियों और अन्य श्रद्धालुओं को अंधेरे में ही सफर तय करना पड़ा। भारी थकान के चलते कई कांवड़िए इसी अंधेरे मार्ग पर सड़क के किनारे पटरियों पर विश्राम करते दिखाई दिए, जो उनकी जान के लिए बड़ा जोखिम साबित हो सकता है।

सावन माह की शुरुआत से पूर्व राज्य सरकार और मुख्यमंत्री स्तर से स्पष्ट आदेश जारी किए गए थे कि सभी कांवड़ यात्रा मार्गों की मरम्मत की जाए, वहां पर्याप्त लाइटें लगाई जाएं, पेयजल के इंतजाम हों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा में कोई कसर न छोड़ी जाए। इन सरकारी निर्देशों के बावजूद नैमिषारण्य के लखनऊ-सीतापुर लिंक बाईपास पर कोई ठोस इंतज़ाम नहीं किए गए।

रविवार की देर रात इस मार्ग का नजारा बेहद चिंताजनक था। एक तरफ तीर्थ क्षेत्र की ओर जाने और आने वाले श्रद्धालुओं का लगातार तांता लगा हुआ था, तो दूसरी तरफ सड़क पर दूर-दूर तक लाइट का कोई नामोनिशान नहीं था। भारी भीड़ के बीच तेज रफ्तार से गुजरते चार पहिया और भारी वाहन श्रद्धालुओं के लिए सीधा खतरा बने रहे।श्रद्धालु गोमती नदी के राजघाट पहुंचकर भोर से पहले स्नान करते हैं और फिर कांवड़ में जल भरकर बाबा भूतेश्वर नाथ, बाबा काशीनाथ, बाबा तुरंत नाथ और सिद्धेश्वर नाथ महादेव के दर्शन-पूजन करते हुए अपनी यात्रा आगे बढ़ाते हैं। कई कांवड़िए कल्ली होकर तीर्थ क्षेत्र में प्रवेश करते हैं और यहां से जल भरकर कोतवाल बाबा भूतेश्वर नाथ, बाबा कैलाश नाथ, बाबा देवदेवेश्वर नाथ, बाबा श्यामनाथ और प्रसिद्ध बाबा गोलागोकर्णनाथ धाम के लिए रवाना होते हैं। इतने महत्वपूर्ण धार्मिक मार्ग पर अंधेरा पसरा होना प्रशासन की तैयारी के दावों की हवा निकाल रहा है।

स्थानीय निवासियों और दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने प्रशासन के इस रवैये पर गहरा असंतोष व्यक्त किया है। कांवड़ लेकर जा रहे शिवभक्तों का कहना है कि सरकार की ओर से बड़े-बड़े दावे किए गए थे कि कांवड़ियों को राह में कोई असुविधा नहीं होने दी जाएगी, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। पूरे रास्ते में लाइट की व्यवस्था न होने से दुर्घटना का डर लगातार बना रहता है।

स्थानीय नागरिकों ने सीधे तौर पर प्रशासनिक तंत्र की गैर-जिम्मेदारी पर उंगली उठाई है। उनका कहना है कि जब प्रशासन को पूर्व से ही जानकारी थी कि सावन के सोमवार पर लाखों की संख्या में भीड़ जुटेगी, तो मुख्य बाईपास मार्ग पर प्रकाश की व्यवस्था क्यों नहीं कराई गई? क्या स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन किसी बड़े सड़क हादसे का इंतजार कर रहा है? दावों में तो सुरक्षा की बड़ी-बड़ी बातें कही जाती हैं, पर धरातल पर कांवड़िए जान जोखिम में डालकर चलने को विवश हैं।

प्रशासनिक स्तर पर हुई इस अनदेखी का सीधा असर श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा पर पड़ रहा है। रात के अंधेरे में तेज रफ्तार वाहनों के बीच सड़क किनारे सो रहे या पैदल चल रहे श्रद्धालुओं के साथ कोई भी अप्रिय घटना घट सकती है। अंधेरा होने की वजह से श्रद्धालुओं को अपने गंतव्य तक पहुंचने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, विशेषकर बुजुर्गों और महिलाओं के लिए यह यात्रा काफी कष्टदायक साबित हो रही है। इसके साथ ही, शासन के स्पष्ट आदेशों के बाद भी जमीनी स्तर पर अधिकारियों द्वारा की गई यह लापरवाही आम जनता के बीच प्रशासनिक कार्यप्रणाली और उसकी गंभीरता पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

सोमवार की भोर होते ही 'बोल बम' और 'हर-हर महादेव' के उद्घोष के साथ हजारों की संख्या में श्रद्धालु मंदिरों में जलाभिषेक करेंगे। ऐसे में सोमवार के पूरे दिन और आने वाले दिनों में श्रद्धालुओं की आवाजाही जारी रहेगी। अब देखने वाली बात यह होगी कि मीडिया में मामला उजागर होने के बाद क्या स्थानीय प्रशासन नींद से जागता है और लखनऊ-सीतापुर लिंक बाईपास सहित अन्य प्रमुख कांवड़ मार्गों पर तत्काल अस्थायी लाइटों और सुरक्षा घेरे का प्रबंध करता है या नहीं। यदि समय रहते समुचित कदम नहीं उठाए गए, तो इस लापरवाही की जिम्मेदारी आखिर किसकी तय होगी, यह एक बड़ा प्रश्न बना हुआ है।

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