नैमिषारण्य में दूसरे सोमवार से पूर्व उमड़े श्रद्धालु, लखनऊ-सीतापुर लिंक बाईपास पर अंधेरे के बीच यात्रा को मजबूर
सावन के दूसरे सोमवार से पूर्व नैमिषारण्य में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा। लखनऊ-सीतापुर लिंक बाईपास पर प्रकाश व्यवस्था न होने से अंधेरे में चलने को मजबूर शिवभक्त।
रिपोर्ट:- सुरेंद्र मोठी INA News, संवाददाता नैमिषारण्य
श्रावण मास के दूसरे सोमवार से पूर्व सीतापुर जिले के प्रसिद्ध तीर्थ क्षेत्र नैमिषारण्य में भगवान शिव का जलाभिषेक करने और कांवड़ भरने के लिए श्रद्धालुओं का विशाल समूह उमड़ पड़ा है। गोमती नदी के राजघाट पर भोर से पहले स्नान करने के लिए बड़ी संख्या में शिवभक्त एक दिन पूर्व ही क्षेत्र में पहुंचने लगे हैं। धार्मिक आस्था के इस विशाल समागम के बीच लखनऊ-सीतापुर लिंक बाईपास मार्ग पर पर्याप्त रोशनी न होने के कारण व्यवस्थाओं पर सवाल उठने लगे हैं।
रविवार रात्रि के समय इस बाईपास मार्ग से होकर भारी संख्या में श्रद्धालुओं और कांवड़ियों की आवाजाही दर्ज की गई। पूरे मार्ग पर लाइट की समुचित व्यवस्था न होने के कारण यात्रियों को घने अंधेरे में सफर तय करना पड़ा। कई स्थानों पर थके हुए श्रद्धालु सड़क के किनारे ही विश्राम करते दिखाई दिए। तेज गति से गुजरते वाहनों के बीच अंधेरे में पैदल चल रहे और आराम कर रहे श्रद्धालुओं के कारण सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
परंपरा के अनुसार श्रद्धालु गोमती नदी के राजघाट पहुंचकर स्नान करते हैं और पवित्र जल भरकर स्थानीय पौराणिक मंदिरों में अर्पण करते हैं। यहां आने वाले शिवभक्त बाबा भूतेश्वर नाथ, बाबा काशीनाथ, बाबा तुरंत नाथ और सिद्धेश्वर नाथ महादेव के दर्शन-पूजन के बाद अपनी यात्रा आगे बढ़ाते हैं। बाईपास मार्ग से होकर कल्ली के रास्ते तीर्थ क्षेत्र में प्रवेश करने वाले कांवड़िये जल भरकर विभिन्न शिवालयों और गोलागोकर्णनाथ धाम की ओर प्रस्थान करते हैं।
सोमवार तड़के से ही शिव मंदिरों में भक्तों का तांता लगने और हर-हर महादेव के जयकारों से क्षेत्र के गुंजायमान होने की उम्मीद है। इतनी बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की पूर्व जानकारी होने के बावजूद प्रमुख पहुंच मार्ग पर प्रकाश व्यवस्था का समुचित प्रबंध न होने से स्थानीय निवासियों और यात्रियों ने नाराजगी व्यक्त की है। श्रद्धालुओं ने मांग की है कि किसी संभावित हादसे को रोकने के लिए बाईपास मार्ग पर तुरंत अस्थायी रोशनी का प्रबंध किया जाए और पुलिस गश्त बढ़ाई जाए।
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