Food Safety Raid: लखनऊ, नोएडा और गोरखपुर में फास्ट फूड केंद्रों पर बड़ा छापा, 233 प्रतिष्ठानों की जांच में 163 को नोटिस
लखनऊ, नोएडा और गोरखपुर में खाद्य सुरक्षा विभाग ने 233 प्रतिष्ठानों पर छापे मारे। फंगस, गंदगी और एक्सपायर्ड खाद्य मिलने पर 163 को नोटिस और 13 पर निलंबन कार्रवाई।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों में उपभोक्ताओं को परोसे जा रहे भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता को लेकर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) विभाग ने व्यापक स्तर पर दंडात्मक व सुधारात्मक कार्रवाई की है। राज्य सरकार के कड़े निर्देशों के तहत विभाग की 152 विशेष टीमों ने एक साथ लखनऊ, गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) और गोरखपुर के 233 रेस्टोरेंट, फूड कोर्ट और फास्ट फूड आउटलेट्स पर औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान कई नामी प्रतिष्ठानों की रसोइयों में चूहों का जमावड़ा, दीवारों व खाद्य पदार्थों पर फंगस, गंदा पानी और एक्सपायर्ड नॉनवेज मिलने जैसी गंभीर अनियमितताएं उजागर हुईं।
निरीक्षण के दौरान नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कुल 163 प्रतिष्ठानों को 'सुधार नोटिस' (इम्प्रूवमेंट नोटिस) थमाए गए हैं। वहीं जनस्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ करने वाले कई नामी आउटलेट्स का संचालन तत्काल प्रभाव से बंद करा दिया गया है और नोएडा में 13 प्रतिष्ठानों के खाद्य लाइसेंस निलंबित करने की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
लखनऊ: नामचीन ब्रांड्स के किचन में मिला फंगस और चूहों का प्रकोप
राजधानी लखनऊ में विभाग की 52 टीमों ने 78 प्रमुख फूड कोर्ट, रेस्टोरेंट और फास्ट फूड केंद्रों का सघन निरीक्षण किया। इस दौरान 42 प्रतिष्ठानों में मानकों की अनदेखी मिलने पर सुधार नोटिस दिए गए, जबकि तीन बड़े आउटलेट्स में स्थिति बेहद चिंताजनक मिलने पर उनका संचालन बंद करा दिया गया।
विभागीय जांच रिपोर्ट के अनुसार:
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बीकानेरवाला (फन मॉल): यहां की रसोई में खाद्य पदार्थों पर फंगस लगी पाई गई। परिसर में चूहों की मौजूदगी, चारों तरफ बदबू, दूषित ग्रेवी और पानी का जमाव (वाटर लॉगिंग) जैसी गंभीर कमियां मिलीं। जनस्वास्थ्य को देखते हुए इस प्रतिष्ठान को तत्काल बंद कराया गया और इसका लाइसेंस निलंबित कर दिया गया।
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सबवे (शालीमार गेटवे, आलमबाग): यहां जलनिकासी की उचित व्यवस्था नहीं थी और साफ-सफाई के मानक बेहद खराब मिले। परिसर में चूहों का प्रकोप (रोडेंट इन्फेस्टेशन) और खाद्य पदार्थों में संदूषण (कंटामिनेशन) का सीधा खतरा पाए जाने के बाद दुकान का खाद्य कारोबार पूरी तरह बंद करा दिया गया।
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गोली वड़ा पाव (आर्क बलेनो): इस आउटलेट पर भी चूहों की मौजूदगी पाई गई। दीवारों और खाद्य सामग्रियों में फंगस दिखने के साथ अस्वच्छ माहौल मिलने पर इसे भी बंद कराने की औपचारिक संस्तुति की गई।
इसके अतिरिक्त कई अन्य केंद्रों पर पके और कच्चे भोजन को एक ही जगह असुरक्षित तरीके से रखे जाने और एक्सपायरी डेट के बिना सामग्री इस्तेमाल किए जाने के मामले भी पकड़े गए।
नोएडा: 13 बड़े फूड आउटलेट्स के लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई
गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) में खाद्य सुरक्षा विभाग की 57 टीमों ने 71 प्रतिष्ठानों की पड़ताल की। यहां 42 प्रतिष्ठानों को सुधार नोटिस जारी किए गए। जांच के दौरान कई प्रतिष्ठानों के डीप फ्रीजर और किचन का दृश्य चौंकाने वाला रहा, जहां तय तापमान के बिना एक्सपायर्ड मांसाहारी उत्पाद (नॉनवेज) और सड़ी-गली सब्जियां पाई गईं।
गंभीर लापरवाही के चलते जिले के 13 प्रमुख फूड आउटलेट्स के लाइसेंस निलंबन की प्रक्रिया शुरू की गई है। इनमें शामिल प्रमुख प्रतिष्ठान हैं: मोती महल डिलक्स, निहाऊ, पंजाबी ढाबा-61, कैसल बारबेक्यू, रोड हाउस, पैडी हॉस्पिटैलिटी/रोलिंग फ्रेश, द येलो चिली, मिनिस्ट्री ऑफ दारू, टेस्ट ऑफ दिल्ली एवं जायका, ईट क्लब, एब्सोल्यूट बारबेक्यूज, कार्निवल फूड डिलाइट और येलो चिली रेस्टोरेंट।
इन प्रतिष्ठानों में मुख्य रूप से यह कमियां दर्ज की गईं:
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खाद्य पदार्थों को सुरक्षित तापमान (कोल्ड चेन) पर न रखना।
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कच्चे और पके हुए भोजन को बिना किसी ढक्कन या विभाजन के एक साथ रखना।
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बर्तनों और कटलरी की समुचित धुलाई व स्टरलाइजेशन का अभाव।
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रसोई में पेस्ट कंट्रोल (कीट एवं चूहा नियंत्रण) की व्यवस्था न होना।
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अवधि पार (एक्सपायर्ड) मसालों और खाद्य सामग्रियों का भंडारण।
गोरखपुर में 84 प्रतिष्ठानों की जांच, 79 को चेतावनी
पूर्वांचल के प्रमुख केंद्र गोरखपुर में भी खाद्य सुरक्षा तंत्र ने व्यापक अभियान चलाया। यहां 43 टीमों ने 84 खानपान प्रतिष्ठानों का सघन मुआयना किया। जांच में अधिकांश स्थानों पर बुनियादी स्वच्छता, कर्मचारियों के एप्रन व ग्लव्स न पहनने और कचरा निस्तारण की खराब स्थिति सामने आई, जिसके बाद 79 प्रतिष्ठानों को सुधार नोटिस थमाए गए।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि नोटिस पाने वाले सभी कारोबारियों को एक निश्चित समय-सीमा दी गई है। यदि निर्धारित समय के भीतर स्वच्छता और तकनीकी मानकों में सुधार नहीं किया गया, तो उनके लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द कर दिए जाएंगे और खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम (FSSAI एक्ट) के तहत दंडात्मक कानूनी मुकदमे दर्ज किए जाएंगे।
स्वास्थ्य मानकों पर कोई समझौता नहीं: विभाग
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने प्रदेश के सभी रेस्टोरेंट, होटल, ढाबा और कैफे संचालकों को कड़े शब्दों में हिदायत दी है कि वे ग्राहकों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें।
विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि:
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प्रतिष्ठान के पास वैध खाद्य लाइसेंस होना अनिवार्य है और उसे ग्राहकों के सामने प्रदर्शित किया जाना चाहिए।
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किचन में काम करने वाले कर्मचारियों की व्यक्तिगत स्वच्छता और नियमित मेडिकल जांच सुनिश्चित हो।
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खाद्य सामग्रियों की खरीद केवल प्रमाणित विक्रेताओं से की जाए और उनका बैच नंबर व एक्सपायरी रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाए।
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रसोई और स्टोर रूम में नियमित कीट नियंत्रण कराया जाए ताकि चूहों और कॉकरोच का प्रवेश पूरी तरह रोका जा सके।
विभागीय अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि यह अभियान यहीं नहीं थमेगा। आने वाले दिनों में अन्य शहरों और मॉल के फूड कोर्ट्स में भी औचक निरीक्षण की कार्रवाई जारी रहेगी, ताकि आम जनता को सुरक्षित और शुद्ध आहार मिल सके।
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