UP Food Safety: 'शुद्ध ही शुभ है' थीम पर यूपी में बड़ा अभियान शुरू, फूड कोर्ट से लेकर ढाबों तक होगी सख्त जांच
उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा विभाग ने 'शुद्ध ही शुभ है' थीम पर प्रदेशव्यापी अभियान शुरू किया है। नोएडा, लखनऊ और गोरखपुर समेत पूरे प्रदेश में फूड सर्विस सेक्टर की जांच होगी।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में नागरिकों को स्वच्छ, सुरक्षित और मिलावट रहित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के उद्देश्य से खाद्य सुरक्षा विभाग ने ‘शुद्ध ही शुभ है’ थीम के तहत एक व्यापक प्रदेशव्यापी अभियान की शुरुआत की है। इस विशेष पहल की सबसे बड़ी विशेषता इसका दृष्टिकोण है विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई केवल त्योहारी सीजन तक सीमित रहने वाला औचक अभियान नहीं है, बल्कि इसे पूरे वर्ष चलने वाली एक निरंतर कार्यप्रणाली के रूप में लागू किया जा रहा है। इसका प्राथमिक ध्येय खाद्य सुरक्षा मानकों के नियमित अनुपालन को दैनिक व्यावसायिक आदत का हिस्सा बनाना है।
राज्य में खानपान की बढ़ती मांग और फूड डिलीवरी संस्कृति के विस्तार को देखते हुए विभाग ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। अब केवल खाद्य विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) फैक्ट्रियों तक जांच सीमित रखने के बजाय 'फूड सर्विस सेक्टर' यानी तैयार भोजन परोसने वाले प्रतिष्ठानों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।
लखनऊ, नोएडा और गोरखपुर में फूड कोर्ट्स की सघन पड़ताल
अभियान के प्रारंभिक चरण में महानगरों और बड़े व्यावसायिक केंद्रों को केंद्र में रखा गया है। नोएडा, लखनऊ और गोरखपुर जैसे प्रमुख शहरों के बड़े शॉपिंग मॉल्स, फूड कोर्ट्स और फास्ट-फूड केंद्रों में विभागीय दलों ने औचक निरीक्षण शुरू किए हैं।
जांच के दायरे में केवल बड़े होटल ही नहीं, बल्कि खानपान से जुड़ा हर स्तर शामिल किया गया है। इसके अंतर्गत:
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लक्जरी होटल और स्टार श्रेणी के रेस्टोरेंट
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व्यावसायिक बेकरी और पारंपरिक मिठाई की दुकानें
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राजमार्गों और कस्बों के ढाबे व इंडस्ट्रियल कैंटीन
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शादी-समारोहों के आउटडोर कैटरर्स
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मॉल स्थित फूड कोर्ट्स और स्थानीय स्ट्रीट फूड वेंडर्स (ठेले-खोमचे वाले)
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, तैयार खाद्य पदार्थों में घटिया कुकिंग ऑयल के बार-बार उपयोग, अमानक मसालों और भोजन को आकर्षक बनाने के लिए प्रतिबंधित सिंथेटिक रंगों (आर्टिफिशियल एडिटिव्स) के अत्यधिक इस्तेमाल पर कड़ा पहरा रहेगा।
सेक्टरवार टीमें गठित, अखबार में खाना परोसने पर रोक की सलाह
व्यापक स्तर पर जांच और जागरूकता सुनिश्चित करने के लिए विभाग अलग-अलग श्रेणियों में विशेष टीमों का गठन कर रहा है। बड़े प्रतिष्ठानों से लेकर छोटे खोमचे वालों तक को खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के बुनियादी नियमों से जोड़ने की तैयारी है।
टीमों द्वारा खाद्य कारोबारियों (एफबीओ) को वैज्ञानिक तरीके से किचन प्रबंधन के निर्देश दिए जा रहे हैं। इसमें कच्चे और पके हुए भोजन को अलग-अलग तापमान पर संरक्षित करने, शाकाहारी और मांसाहारी सामग्रियों के लिए अलग भंडारण व्यवस्था रखने, भोजन पकाने में केवल शुद्ध व प्रमाणित पेयजल का उपयोग करने और कार्यस्थल की नियमित डीप-क्लीनिंग शामिल है।
इसके साथ ही, गर्म खाद्य पदार्थों को पुराने अखबार, मैग्जीन या छपे हुए कागजों पर रखकर परोसने या पैक करने की आदत पर रोक लगाने की सख्त सलाह दी जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, अखबार की स्याही में मौजूद सीसा (लेड) और हानिकारक रसायन गर्म खाद्य पदार्थों में घुलकर पेट की गंभीर बीमारियों का कारण बनते हैं। छोटे कारोबारियों को फूड-ग्रेड पैकेजिंग सामग्री अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
दंडात्मक कार्रवाई से पहले सुधार का मौका
इस अभियान की नीति केवल चालान काटने या दुकानें बंद कराने की नहीं है, बल्कि व्यवस्था में संरचनात्मक सुधार लाने की है। इसके तहत निरीक्षण से पहले संबंधित सेक्टर के कारोबारियों को निर्धारित मानकों की एक स्पष्ट चेकलिस्ट उपलब्ध कराई जाएगी। कारोबारियों को आवश्यक बुनियादी बदलाव करने के लिए पर्याप्त समय और परामर्श दिया जाएगा।
बड़े होटलों और संगठित रिटेल चेन्स के पास आंतरिक कानूनी और लैब टेस्टिंग संसाधन उपलब्ध होते हैं, लेकिन छोटे व्यापारियों के पास यह सुविधा नहीं होती। इसलिए छोटे ढाबा संचालकों और स्ट्रीट वेंडरों को सरल और व्यावहारिक हिंदी भाषा में नियमों की जानकारी दी जा रही है, ताकि वे बिना किसी तकनीकी उलझन के स्वच्छता मानकों को अपना सकें।
तीन स्तरों पर होगी सतत निगरानी, शिकायत प्रकोष्ठ का गठन
अभियान की पारदर्शिता और प्रभावशीलता बनाए रखने के लिए त्रिस्तरीय निगरानी व्यवस्था लागू की गई है। जमीनी स्तर की कार्रवाई की समीक्षा क्रमशः जिला स्तर पर अभिहित अधिकारी, मंडल स्तर पर संयुक्त/उपायुक्त और राज्य स्तर पर मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा नियमित रूप से की जाएगी।
उपभोक्ताओं और व्यापारियों के बीच विश्वास कायम करने के लिए एक समर्पित शिकायत प्रकोष्ठ भी स्थापित किया जा रहा है। यदि किसी नागरिक को खाद्य सामग्री की गुणवत्ता, मिलावट या स्वच्छता को लेकर कोई शिकायत है, तो वह इस प्रकोष्ठ में अपनी बात दर्ज करा सकेगा। विभाग का स्पष्ट संदेश है कि सुरक्षित और पौष्टिक खानपान सुनिश्चित करना केवल प्रशासन का काम नहीं, बल्कि कारोबारियों की नैतिक जिम्मेदारी और उपभोक्ताओं की सामूहिक जागरूकता से ही पूरी तरह संभव होगा।
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