Sitapur : नैमिषारण्य बाईपास पर प्रकाश व्यवस्था न होने से रात में श्रद्धालुओं को परेशानी

इस कॉरिडोर में करीब 900 मीटर लंबा और 16 मीटर चौड़ा लखनऊ-सीतापुर लिंक बाईपास रोड का निर्माण पूरा हो चुका है। रोड के दोनों तरफ नाली, रिफ्लेक्टिव मार्किंग औ

Feb 22, 2026 - 22:56
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Sitapur : नैमिषारण्य बाईपास पर प्रकाश व्यवस्था न होने से रात में श्रद्धालुओं को परेशानी
Sitapur : नैमिषारण्य बाईपास पर प्रकाश व्यवस्था न होने से रात में श्रद्धालुओं को परेशानी

 रिपोर्ट : सुरेंद्र मोठी INA NEWS नैमिषारण्य

नैमिषारण्य में उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वपूर्ण योजना नैमिषारण्य कॉरिडोर का काम तेजी से चल रहा है। इसमें गोमती नदी राजघाट, चक्र तीर्थ कुंड का सुंदरीकरण, हरदोई-सीतापुर रोड पर पार्किंग और लखनऊ-कल्ली मार्ग पर ट्रैक्टर-ट्राली पार्किंग जैसे कार्य शामिल हैं। कई धार्मिक स्थलों पर भी काम जारी है। श्रद्धालुओं का आना बढ़ गया है।

इस कॉरिडोर में करीब 900 मीटर लंबा और 16 मीटर चौड़ा लखनऊ-सीतापुर लिंक बाईपास रोड का निर्माण पूरा हो चुका है। रोड के दोनों तरफ नाली, रिफ्लेक्टिव मार्किंग और सांकेतिक बोर्ड लग गए हैं। लेकिन दो महीने बीत जाने के बाद भी बाईपास पर स्ट्रीट लाइट नहीं लगी हैं, जिससे रात में पूरा क्षेत्र अंधेरे में डूबा रहता है। रोज सैकड़ों वाहन और राहगीर यहां से गुजरते हैं।इस महीने से नैमिषारण्य-मिश्रिख 84 कोसीय परिक्रमा मेला शुरू हो चुका है। उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से लाखों श्रद्धालु और देश-विदेश से लोग आ रहे हैं। जल्द ही लाखों परिक्रमावासी यहां पहुंचेंगे। वे पंडाल, झोपड़ी और कैनोपी लगाकर रात गुजारेंगे और नैमिषारण्य-मिश्रिख में भीतरी पंचकोसी परिक्रमा होली तक पूरी करेंगे। ऐसे में रात के अंधेरे में बाईपास से आवागमन कैसे होगा, यह बड़ा सवाल है।हर महीने अमावस्या को यहां मेला लगता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु आते हैं और रात में सैकड़ों वाहन रुकते हैं। प्रकाश की कमी से दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है। वाहन चालकों को दूर की चीजें दिखाई नहीं देतीं, मोड़ और बाधाएं समय पर नजर नहीं आतीं। इससे हादसे हो सकते हैं। अंधेरे में चोरी या अन्य अपराध की आशंका भी रहती है। कम रोशनी से आंखों पर जोर पड़ता है, सिरदर्द और थकान हो सकती है।

स्थानीय लोगों ने बताया कि बाईपास का काम दो-तीन महीने पहले पूरा हुआ लेकिन अभी तक लाइटिंग का इंतजाम नहीं हुआ। पर्याप्त स्ट्रीट लाइट लगाना जरूरी है। रिफ्लेक्टिव मार्किंग और बोर्ड तो लगे हैं लेकिन बिना रोशनी के उनका पूरा फायदा नहीं मिलता। इससे आने-जाने वाले श्रद्धालुओं और राहगीरों में दुर्घटना या अपराध का खतरा बना रहता है।

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