Varanasi : वाराणसी में एआई शिक्षण को रोचक और अनुभवपूर्ण बना रहा : प्रो रमेश शर्मा
दूसरे सत्र में उन्होंने लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम यानी एलएमएस की भूमिका पर बात की। उन्होंने कहा कि एलएमएस सिर्फ सामग्री देने का जरिया नहीं रहा बल्कि अब शिक्षक और छात्रों के
दस देशों के 24 शिक्षक कर रहे अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण में हिस्सा
वाराणसी में वर्चुअल रियलिटी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी नई तकनीकें पढ़ाई और सीखने की प्रक्रिया को ज्यादा मजेदार और व्यावहारिक बना रही हैं। मोबाइल आधारित और कम बैंडविड्थ वाले डिजाइन ग्रामीण इलाकों और कम इंटरनेट वाली जगहों पर शिक्षा को सबके लिए आसान बना रहे हैं। यह बात बीबीएयू नई दिल्ली के प्रोफेसर रमेश शर्मा ने अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र वाराणसी में चल रहे सात दिवसीय अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में कही। उन्होंने ओपन एजुकेशनल रिसोर्सेज और लाइसेंसिंग के जरिए ज्ञान को हर किसी तक पहुंचाने की जरूरत बताई।
दूसरे सत्र में उन्होंने लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम यानी एलएमएस की भूमिका पर बात की। उन्होंने कहा कि एलएमएस सिर्फ सामग्री देने का जरिया नहीं रहा बल्कि अब शिक्षक और छात्रों के बीच सक्रिय बातचीत का मंच बन गया है। इसके जरिए पाठ्य सामग्री, असाइनमेंट, क्विज और चर्चा सब एक जगह उपलब्ध हो जाते हैं जिससे पढ़ाई ज्यादा व्यवस्थित हो जाती है। तीसरे सत्र में उन्होंने शोध संगठन और डेटा प्रबंधन के उपकरणों की उपयोगिता बताई। उन्होंने कहा कि ये उपकरण शोध को ज्यादा व्यवस्थित और भरोसेमंद बनाते हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म और सॉफ्टवेयर से गुणात्मक और मात्रात्मक विश्लेषण अब पहले से आसान और बेहतर हो गया है।
चौथे सत्र में आईयूसीटीई के सहायक आचार्य डॉ सुनील कुमार त्रिपाठी ने रेफरेंसिंग सिस्टम और साइटेशन मैनेजमेंट टूल्स के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने ओपन साइंस और रिसर्च के प्रसार की जरूरत बताई। इससे ज्ञान का फैलाव होता है और वैश्विक स्तर पर सहयोग तथा नए विचारों को बढ़ावा मिलता है।
इस कार्यक्रम में श्रीलंका, कंबोडिया, घाना, किर्गिस्तान, मॉरीशस, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान, ताजाकिस्तान और इथियोपिया के 24 शिक्षक हिस्सा ले रहे हैं। कार्यक्रम के निदेशक आईयूसीटीई के संकाय प्रमुख प्रो आशीष श्रीवास्तव हैं। समन्वयन डॉ राजा पाठक ने किया और सह-समन्वयक डॉ सुनील कुमार त्रिपाठी हैं।
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