Bajpur : IMPCL के निजीकरण पर विपक्ष का कड़ा रुख, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कर्मचारियों के रोजगार और उत्तराखंड की आयुर्वेदिक विरासत पर जताया बड़ा संकट

निजीकरण की इस अचानक हुई घोषणा ने फैक्ट्री में काम करने वाले सैकड़ों परिवारों के सामने भविष्य का संकट खड़ा कर दिया है। नेता प्रतिपक्ष ने सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाते हुए कहा कि जब कर्मचारी संघ ने पहले ही अपने हितों और भविष्य की सुरक्षा को लेकर बातचीत का स

May 31, 2026 - 20:09
 0  5
Bajpur : IMPCL के निजीकरण पर विपक्ष का कड़ा रुख, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कर्मचारियों के रोजगार और उत्तराखंड की आयुर्वेदिक विरासत पर जताया बड़ा संकट
Bajpur : IMPCL के निजीकरण पर विपक्ष का कड़ा रुख, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कर्मचारियों के रोजगार और उत्तराखंड की आयुर्वेदिक विरासत पर जताया बड़ा संकट

ब्यूरो चीफ : आमिर हुसैन

उत्तराखंड की राजनीतिक सरगर्मियां उस समय तेज हो गईं जब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने अल्मोड़ा के मोहान में स्थित इंडियन मेडिसिन्स फार्मास्युटिकल कॉर्पोरेशन लिमिटेड यानी IMPCL के निजीकरण के फैसले पर सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि यह संस्थान महज एक सरकारी उपक्रम नहीं है, बल्कि उत्तराखंड की आर्थिक, सामाजिक और आयुर्वेदिक पहचान का एक मजबूत आधार रहा है। लंबे समय से यह फैक्ट्री हजारों स्थानीय परिवारों की आजीविका का जरिया रही है और देश भर में उच्च गुणवत्ता वाली आयुर्वेदिक दवाओं की आपूर्ति में इसका बहुत बड़ा योगदान रहा है। ऐसे में इस सार्वजनिक इकाई को निजी हाथों में सौंपने की घोषणा से पूरे क्षेत्र के लोगों और कर्मचारियों में भारी असंतोष फैल गया है।

निजीकरण की इस अचानक हुई घोषणा ने फैक्ट्री में काम करने वाले सैकड़ों परिवारों के सामने भविष्य का संकट खड़ा कर दिया है। नेता प्रतिपक्ष ने सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाते हुए कहा कि जब कर्मचारी संघ ने पहले ही अपने हितों और भविष्य की सुरक्षा को लेकर बातचीत का समय मांगा था, तब उनकी आवाज को अनसुना क्यों किया गया। कर्मचारियों की जायज चिंताओं और आशंकाओं को दरकिनार करना किसी भी जन कल्याणकारी सरकार की नीति का हिस्सा नहीं होना चाहिए। संवादहीनता की इसी स्थिति के कारण आज कर्मचारियों में अपनी नौकरियों को लेकर गहरा डर बैठ गया है।

इस समय IMPCL में कार्यरत सभी प्रकार के कर्मचारी, जिनमें नियमित स्टाफ के साथ-साथ अनुबंध और दैनिक मजदूरी पर काम करने वाले श्रमिक भी शामिल हैं, अपने अधिकारों को लेकर बेहद चिंतित हैं। इसी आक्रोश और अनिश्चितता के माहौल के चलते कर्मचारियों ने पूरी तरह से काम ठप कर कार्य बहिष्कार का रास्ता चुन लिया है। औद्योगिक इकाई में कामकाज बंद होने से न केवल उत्पादन प्रभावित हो रहा है, बल्कि स्थानीय बाजार और पूरी अर्थव्यवस्था पर भी इसका सीधा असर पड़ना शुरू हो गया है।

विपक्ष ने मांग की है कि प्रशासन और सरकार को प्रदेश की जनता के सामने स्थिति पूरी तरह साफ करनी चाहिए। उन्होंने पूछा कि क्या नई व्यवस्था के तहत पुराने कर्मचारियों की नौकरियां पूरी तरह सुरक्षित रहेंगी और उनके अधिकारों की रक्षा की क्या गारंटी है। अक्सर देखा जाता है कि निजीकरण के बाद श्रमिकों की कार्य स्थितियों और वेतन में कटौती कर उनका शोषण किया जाता है, जिससे उनके परिवारों का पालन-पोषण मुश्किल हो जाता है। सरकार को यह बताना चाहिए कि क्या इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय धरोहर को बचाने के लिए उनके पास कोई वैकल्पिक योजना थी।

इस पूरे घटनाक्रम पर बात करते हुए विपक्षी नेताओं ने कहा कि यह सिर्फ किसी एक सरकारी कंपनी को बेचने का सामान्य मामला नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर उत्तराखंड के पहाड़ों से होने वाले पलायन, स्थानीय युवाओं के रोजगार और राज्य की प्राचीन आयुर्वेदिक विरासत से जुड़ा बेहद संवेदनशील मुद्दा है। जब स्थानीय स्तर पर चल रहे रोजगार के साधन ही छीन लिए जाएंगे, तो पर्वतीय क्षेत्रों का विकास पूरी तरह से रुक जाएगा।

यशपाल आर्य ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि उत्तराखंड के व्यापक हितों और यहां के निवासियों के हक-हकूक के साथ किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि श्रमिकों का आत्मसम्मान, उनकी नौकरी की सुरक्षा और उत्तराखंड की अस्मिता उनके लिए सबसे ऊपर है। इस मुद्दे को लेकर वे सड़क से लेकर सदन तक कर्मचारियों की लड़ाई लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने भी इस निजीकरण के विरोध में कर्मचारियों के आंदोलन को अपना समर्थन देना शुरू कर दिया है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि मोहान जैसी दुर्गम जगह पर स्थापित यह संस्थान यहां की जीवनरेखा है। यदि इसे निजी हाथों में सौंपकर स्थानीय लोगों के हितों की अनदेखी की गई, तो आने वाले समय में यह आंदोलन और अधिक उग्र रूप ले सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन की होगी।

You May Also Read : Sambhal : सम्भल में पेड़ पर लटका मिला युवक का शव, पिता ने लगाया हत्या का आरोप; गांव में सनसनी

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow