Special Article: एक पेड़ माँ के नाम' अभियान: प्रकृति, संस्कृति और भविष्य को बचाने की पहल

जब भी हम किसी पेड़ की छाया में बैठते हैं, शुद्ध हवा में सांस लेते हैं या मीठे फल का स्वाद चखते हैं, तब हमें यह एहसास होता है की पेड़

Jul 28, 2026 - 12:21
 0  4
Special Article: एक पेड़ माँ के नाम' अभियान: प्रकृति, संस्कृति और भविष्य को बचाने की पहल
एक पेड़ माँ के नाम' अभियान: प्रकृति, संस्कृति और भविष्य को बचाने की पहल

लेखक -  धीरज कश्यप ( लेखक और पत्रकार )

जब भी हम किसी पेड़ की छाया में बैठते हैं, शुद्ध हवा में सांस लेते हैं या मीठे फल का स्वाद चखते हैं, तब हमें यह एहसास होता है की पेड़ केवल प्रकृति का हिस्सा नहीं, बल्कि हमारे जीवन का आधार हैं। यही संदेश लेकर भारत में "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान की शुरुआत हुई, जिसने पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने का एक भावनात्मक और प्रेरणादायक प्रयास किया।

 विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून 2024 के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली के बुद्ध जयंती पार्क में पीपल का पौधा लगाकर "एक पेड़ मां के नाम" अभियान का शुभारंभ किया। इस अभियान का उद्देश्य प्रत्येक नागरिक को अपनी माँ के सम्मान में कम-से-कम एक पेड़ लगाने के लिए प्रेरित करना तथा पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन का स्वरूप देना है। प्रधानमंत्री ने केवल भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों में रहने वाले भारतीयों और दुनिया भर के लोगों से भी इस अभियान में जुड़ने का आह्वान किया।

इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता यह है की इसमें पर्यावरण संरक्षण को भावनाओं से जोड़ा गया है। जब कोई व्यक्ति अपनी माँ के नाम पर एक पौधा लगाता है, तो वह केवल एक पेड़ नहीं लगाना, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित भविष्य की नींव भी रखता है।

इस अभियान को देशभर में व्यापक समर्थन मिला। केंद्र और राज्य सरकारों के विभिन्न विभाग, विद्यालय, महाविद्यालय, राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS), स्वयंसेवी संस्थाएँ, धार्मिक संगठन, उद्योग, पंचायतें तथा लाखों आम नागरिक इसमें सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अनेक नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी विभिन्न राज्यों में वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित कीए। यह अभियान धीरे-धीरे जनभागीदारी का एक बड़ा उदाहरण बनता जा रहा है।

पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और उससे जुड़े कई सेवा संगठनों ने भी स्थानीय स्तर पर वृक्षारोपण तथा पर्यावरण जागरूकता के अनेक कार्य किए हैं। संघ के सरसंघचालक  डॉ. मोहन भागवत ने 12 अक्टूबर 2024 (विजयादशमी) के कार्यक्रम के  संबोधन में "पंच परिवर्तन" का आह्वान किया। इसके पाँच प्रमुख विषय हैं सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी एवं आत्मनिर्भर भारत तथा नागरिक कर्तव्य।

पर्यावरण संरक्षण का कार्य संघ के लिए नया नहीं है। संघ से प्रेरित पर्यावरण भारती नामक संगठन वर्ष 1994 से पूरे भारत में पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण, जल संरक्षण, जैव विविधता और पर्यावरण जागरूकता के क्षेत्र में कार्य कर रहा है। इसका उद्देश्य केवल पेड़ लगाना ही नहीं, बल्कि समाज में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी है।

इसी क्रम में  12 जुलाई 2026 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री  योगी आदित्यनाथ ने "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान के तहत विशाल वृक्षारोपण महाअभियान का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा की धरती माँ का स्वास्थ्य सुरक्षित रखना हम सभी की जिम्मेदारी यह अभियान धरती माता के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करने का एक महान प्रयास है। धरती माता हमें अनुकूल वातावरण प्रदान करती हैं और प्रगति के अवसर उपलब्ध कराती हैं।  वही हमारे लिए अन्न उपजाती हैं, फल देती हैं, पीने के लिए जल उपलब्ध कराती हैं और हमारे जीवन की सभी आवश्यकताओं की पूर्ति करती हैं।

उन्होंने यह भी कहा की जहाँ घने वन और अधिक पेड़ होते हैं, वहीं नदियाँ लंबे समय तक प्रवाहित रहती हैं, क्योंकि पेड़ भूजल को रिचार्ज करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस अभियान के अंतर्गत उत्तर प्रदेश में 35 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है।

पेड़ों का महत्व केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं है। वे हमें ऑक्सीजन, फल, फूल, औषधियाँ, छाया और शुद्ध वातावरण प्रदान करते हैं। पेड़ तापमान को नियंत्रित करते हैं, मिट्टी के कटाव को रोकते हैं, वर्षा चक्र को संतुलित रखने में मदद करते हैं तथा अनेक जीव-जंतुओं को आश्रय देते हैं। इसलिए वैज्ञानिक भी मानते हैं की यदि जलवायु परिवर्तन और बढ़ते प्रदूषण का प्रभाव कम करना है तो बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण और मौजूदा वनों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।

भारतीय संस्कृति और हिन्दू धर्म में भी वृक्षों को विशेष स्थान दिया गया है। वेद, पुराण और उपनिषदों में पीपल, बरगद, तुलसी, बेल, नीम और आंवले जैसे वृक्षों की महिमा का विस्तार से वर्णन मिलता है। इनकी पूजा का उद्देश्य केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा का संदेश देना भी है। भारतीय संस्कृति हमें सिखाती है की वृक्षों का सम्मान करना, उनका संरक्षण करना और अधिक से अधिक पेड़ लगाना मानव जीवन का कर्तव्य है।

अक्सर लोगों के मन में यह प्रश्न होता है की घर में कौन-से पेड़ लगाने चाहिए और कहाँ लगाने चाहिए। पर्यावरण और स्वास्थ्य की दृष्टि से नीम, आंवला, अमरूद, आम, अनार, नींबू, सहजन (मोरिंगा), करी पत्ता तथा अशोक जैसे पेड़ घर के आँगन या बगीचे में लगाए जा सकते हैं। तुलसी को घर के आँगन, बालकनी या मुख्य द्वार के पास रखना शुभ और उपयोगी माना जाता है।

वहीं, पीपल, बरगद और पाकड़ जैसे बड़े वृक्षों को घर की दीवारों या नींव के बहुत पास नहीं लगाना चाहिए, क्योंकि समय के साथ उनकी जड़ें भवन को नुकसान पहुँचा सकती हैं। ऐसे वृक्ष पार्कों, मंदिर परिसरों, विद्यालयों, सड़क किनारे, खेतों की मेड़ों तथा अन्य खुले सार्वजनिक स्थानों पर अधिक उपयुक्त रहते हैं। वृक्षारोपण करते समय पर्याप्त जगह, धूप, पानी और स्थानीय जलवायु का ध्यान रखना भी आवश्यक है, ताकी पौधे स्वस्थ रूप से विकसित हो सकें।

भारत सरकार भी हरित क्षेत्र बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण के लिए अनेक राष्ट्रीय अभियान चला रही है। "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान के साथ-साथ राष्ट्रीय वनीकरण कार्यक्रम  , ग्रीन इंडिया मिशन  , नगर वन योजना  , CAMPA  , नमामि गंगे के तहत नदी किनारे वृक्षारोपण तथा मिशन LiFE (Lifestyle for Environment) जैसी योजनाएं पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा दे रही हैं। मानसून के दौरान देश के अनेक राज्यों में बड़े स्तर पर वृक्षारोपण अभियान चलाए जाते हैं, जिनमें लाखों और करोड़ों पौधे लगाए जाते हैं।

वनों की स्थिति की बात करें तो भारत विश्व के सबसे अधिक वन क्षेत्र वाले देशों में 9वें स्थान पर है। वहीं वन क्षेत्र में वार्षिक शुद्ध वृद्धि के मामले में भारत तीसरे स्थान पर आता है। वर्तमान में देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 25 प्रतिशत भाग वन एवं वृक्ष आवरण से आच्छादित है। यह उपलब्धि उत्साहजनक है, लेकीन बढ़ती आबादी, शहरीकरण और जलवायु परिवर्तन को देखते हुए अभी बहुत कार्य किया जाना बाकी है।

आज भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक भूजल स्तर का लगातार गिरना है। अत्यधिक भूजल दोहन, अनियमित वर्षा, बढ़ती जनसंख्या, शहरीकरण और जल संरक्षण की कमी इसके प्रमुख कारण हैं। कई राज्यों में हर वर्ष जलस्तर नीचे जा रहा है, जिससे पेयजल, खेती और पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। 

इस समस्या का समाधान भी प्रकृति के पास ही है। वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) को बढ़ावा देना, तालाबों, झीलों और कुओं का संरक्षण करना, अधिक से अधिक वृक्ष लगाना, भूजल का विवेकपूर्ण उपयोग करना तथा पानी की बर्बादी रोकना समय की आवश्यकता है। किसानों को ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों अपनानी चाहिए। साथ ही नदियों और जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाना तथा जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाना भी उतना ही आवश्यक है।

वैज्ञानिकों का स्पष्ट मत है की भारत में आज पेड़ों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। जलवायु परिवर्तन, बढ़ता तापमान, वायु प्रदूषण, भूजल स्तर में गिरावट और जैव विविधता के नुकसान जैसी चुनौतियों से निपटने में पेड़ सबसे प्रभावी प्राकृतिक उपाय हैं। पेड़ कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर ऑक्सीजन छोड़ते हैं, वातावरण का तापमान कम करते हैं, वर्षा चक्र को सहारा देते हैं, मिट्टी के कटाव को रोकते हैं और भूजल के पुनर्भरण में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

अंततः यह कहा जा सकता है की "एक पेड़ माँ के नाम" केवल एक सरकारी अभियान नहीं, बल्कि प्रकृति, संस्कृति और संवेदनाओं को जोड़ने वाला राष्ट्रीय संकल्प है। यदि प्रत्येक नागरिक अपनी माँ के नाम पर केवल एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल करने का संकल्प ले, तो आने वाले वर्षों में भारत अधिक हरित, स्वच्छ और जल-संपन्न देश बन सकता है। एक छोटा-सा पौधा भविष्य की सबसे बड़ी विरासत बन सकता है। इसलिए आइए, हम सभी एक पेड़ अवश्य लगाएँ, उसकी देखभाल करें और आने वाली पीढ़ियों को हरियाली से भरा भारत उपहार में दें।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

INA News_Admin आई.एन. ए. न्यूज़ (INA NEWS) initiate news agency भारत में सबसे तेजी से बढ़ती हुई हिंदी समाचार एजेंसी है, 2017 से एक बड़ा सफर तय करके आज आप सभी के बीच एक पहचान बना सकी है| हमारा प्रयास यही है कि अपने पाठक तक सच और सही जानकारी पहुंचाएं जिसमें सही और समय का ख़ास महत्व है।