Special Article: बेनकाब हुए अराजकतावादी आंदोलनजीवी, जंतर- मंतर का मंच बना हिंदू और विकास विरोधी मंच 

सोशल मीडिया पर उपजी कॉकरोच जनता पार्टी का नीट पेपर लीक की आड़ में शुरू किया गया आंदोलन अब पूरी तरह से बेनकाब

Jul 22, 2026 - 19:57
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Special Article:  बेनकाब हुए अराजकतावादी आंदोलनजीवी, जंतर- मंतर का मंच बना हिंदू और विकास विरोधी मंच 
बेनकाब हुए अराजकतावादी आंदोलनजीवी, जंतर- मंतर का मंच बना हिंदू और विकास विरोधी मंच 

लेखक: मृत्युंजय दीक्षित 

सोशल मीडिया पर उपजी कॉकरोच जनता पार्टी का नीट पेपर लीक की आड़ में शुरू किया गया आंदोलन अब पूरी तरह से बेनकाब हो चुका है। जंतर- मंतर पर जो आंदोलन जीवी बैठे हैं उनका मुख्य ध्येय छात्र हित नहीं  बल्कि हिंदू विरोध और हिदुओं को जातियों  में विभाजित करके “हम लेकर रहेंगे आजादी“ गाने वालों की सहयता करना है। सोनम वांगचुक को पुलिस द्वारा स्वास्थ्य व सुरक्षा की दृष्टि से अपनी कस्टडी में अस्पताल पहुँचाने के बाद अभिजीत दिपके और उसके पीछे वालों सारी योजना बेनकाब हो गई। जैसे ही सोनम को पुलिस लेकर गई दिपके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व उनकी सरकार के इस्तीफे की मांग को लेकर अनशन पर बैठ गया और संसद भवन की ओर मार्च निकालने की जिद पर अड़ गया। वो बात और है कि वो दो दिन भी भूखा नहीं रह सका। प्रदर्शनकारी बिना अनुमति लिए संसद भवन की ओर बढ़े, पुलिस पर पत्थर फेंके, तोड़ फोड़ करी, गाड़ियाँ पलटीं और सब तरफ अराजकता फैलाई। इसमें 178 पुलिसकर्मी घायल हुए।  इसी क्रम में तथाकथित छात्रों के एक गुट पर लाठीचार्ज से हो गया और बस आंदोलनजीवी समर्थक विरोधी दलों के सांसद जंतर- मंतर पहुंचने लगे। सदन के अन्दर उनके प्रतिनिधियों ने हंगामा करके कार्य बाधित किया। 
सोनम वांगचुक के भूख हड़ताल पर बैठने से लेकर अब तक  जंतर -मंतर पर जो कुछ भी हुआ है वह खतरनाक है। इनके इरादे देश विरोधी हैं। छात्रों के नाम पर इकठ्ठा लोग वास्तव में छात्र भी नहीं। जेएनयू, जामिया मिलिया, दिल्ली विश्वविद्यालय तथा कुछ अन्य जगहों के वामपंथी संगठनों के समूह ही अपनी अपनी ढपली लेकर यहाँ बैठे हैं। सीएए  के खिलाफ, कृषि कानूनों के खिलाफ, धारा -370 की वापसी जैसे सभी मुद्दों पर यही चाँद चेहरे ढपली पीटने इकठ्ठा होते हैं। इनको कुछ यू -टयूबर्स का भी सहयोग मिलता है। इनका एकमात्र उद्देश्य समाज में अफवाहें फैलाकर वातवावरण खराब करना ही है।
यह तथाकथित आंदोलन नीट पेपर लीक के मुद्दे पर प्रारंभ हुआ था और बन गया सीजेपी का मंच जहाँ से सनातन का अपमान किया जाने लगा। जिस मंच से छात्रों के हक की बात की जानी चाहिए थी वहां प्रभु राम के लिए आपत्तिजनक शब्द बोले गए। भारत माता के प्रति अभद्र टिप्पणी की गई। प्रकाश राज ने मंच पर आकर कहा कि मैं जयश्रीराम नहीं कहूंगा जय संविधान बोलूंगा तब मंच पर तालियां बजायी गयीं लेकिन संविधान का पालन करते हुए मार्च की अनुमति नहीं ली गई। शुरुआत के साथ ही आंदोलन भटकने लगा था और भारत विरोधी ताकतो के हाथ में जा रहा था। एक तरफ सोनम वांगचुक भूख हड़ताल पर बैठे थे और दूसरी ओर स्वयं अभिजीत व उनके सहयेागी जावेद द्वारा परोजित चाय- पकोडे़ जलेबी का आनंद ले रहे थे। ऐसे लोग क्या ही  छात्र हित की बात कर करेंगे? 
सीजेपी के मंच पर कुणाल कामरा ने प्रभु श्रीराम का नाम लेकर सीधा सनातन पर हमला बोला और मंच पर जो लोग बैठे थे उन्होंने तालियां बजा कर उस पर सहमति व्यक्त की। हर बात में भगवान राम का नाम जोड़कर सनातन का अपमान करना इन कॉकरोचों की आदत हो गई है। वही जब इसी मंच पर नंदिता नारायण जैसी वामपंथी  महिला, बस  नाम रहेगा अल्लाह का जैसे इस्लामिक तराना गाती हैं तो डपली बजाकर उसका स्वागत किया  जाता है। आखिर जंतर -मंतर के मंच और पाकिस्तानी शायर फैज अहमद फैज की इस नज्म के बीच क्या सम्बन्ध है? जंतर- मंतर पर इस नारे का बैकग्राउंड समझकर पता चल जाएगा कि यह तथाकथित आंदोलन भारत के विरोध में है। पाक शायर ने यह नज्म 1979 में जिया-उल -हक के खिलाफ लिखी थी किंतु दुर्भाग्यवश भारत के वामपंथी गैंग ने इस गीत को अपना लिया है। इस गीत की एक पंक्ति है- “जब अर्ज -ए -खुदा के काबे से सब बुत उठवाए जाएंगे यानी जब कस्बे से सारी मूर्तियां हटा दी जाएंगी बस नाम रहेगा अल्लाह का“। यही इस गिरोह का असली चेहरा है। 
सीजेपी के मंच पर विरोधी दलों के नेताओं ने अपनी अपनी राजनीति चमकाने का प्रयास किया। मंच पर ताहिर हुसैन, उमर खालिद व शरजील के समर्थक भी दिखाई दिए लेकिन आम छात्र दूर दूर तक नहीं दिखे। असली छात्र नीट की पुनर्परीक्षा में लगे थे। आंदोलन दम तोड़ रहा था किंतु विपक्षी दलों  के लगातर समर्थन के कारण हलचल थी।चंद्रशेखर रावण जैसे सांसदों ने दावा किया कि अगर वह चाह लें तो हजारो की संख्या में दलित वहां पर एकत्र हो जाएंगे। योगेंद्र यादव जैसे आन्दोलनजीवी हिंदुओं को विभाजित करने के लिए पंचशील का मुद्दा थमाकर ”जय भीम“ का नारा लगवा रहे हैं। शबाना आजमी जैसी घोर हिंदू विरोधी वामपंथी महिला भी इस मंच पर पहुंची है। 
वास्तव में पेपर लीक की समस्या बहुत पुरानी है। 2015 में आल इंडिया पीएमटी का पेपर लीक हुआ था, 2021 में सीएससी का पेपर लीक हुआ था, 2021 में जी मेन्स का पेपर लीक हुआ, 2023 में सीटीईअी का पेपर लीक हुआ। 2024 में बिहार -झारखंड मे भी नीट -यूजी का पेपर लीक हुआ। वहीं 2019 से 2024 तक यूपी में 8, राजस्थान में 7, महाराष्ट्र में 7 बिहार में छ और मध्य प्रदेश में 4 परीक्षाओं के पेपर लीक हुए। निश्चित तौर पर सरकार को पेपर लीक की इस समस्या का समाधान ढूंढना चाहिए लेकिन इसकी आड़ में देश को बंधक बनाकर देश विरोधी गतिविधियाँ नहीं चलाई जा सकतीं।

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