Pilibhit : पीलीभीत टाइगर रिजर्व में क्षमता विकास अभियान, वन कर्मियों को मिल रहा आधुनिक प्रशिक्षण

वन कार्मियों के तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में पीलीभीत टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर पीपी सिंह ने कहा है कि

By INA News Desk
Jul 25, 2026 - 15:43
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Pilibhit : पीलीभीत टाइगर रिजर्व में क्षमता विकास अभियान, वन कर्मियों को मिल रहा आधुनिक प्रशिक्षण

​कुँवर निर्भय सिंह आईएनए पीलीभीत 
उत्तर प्रदेश

पीलीभीत: वन कार्मियों के तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में पीलीभीत टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर पीपी सिंह ने कहा है कि टीम भावना से एक परिवार के रूप में कार्य करके ही हम बेहतर परिणाम दे सकते हैं। पीलीभीत टाइगर रिजर्व की राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बनी पहचान का वास्तविक श्रेय यहाँ के ग्राउंड लेवल स्टाफ को जाता है। उन्होंने कहा कि ज्ञान की कोई सीमा नहीं होती, इसे किसी से भी, किसी भी उम्र में प्राप्त किया जा सकता है। 

पीलीभीत टाइगर रिजर्व मुख्यालय स्थित 'वन शहीद कुंदनलाल सभागार' में दैनिक वेतनभोगी से न्यूनतम वेतनभोगी बने कर्मचारियों के तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम विश्व प्रकृति निधि  के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में अपने अनुभव साझा करते हुए फील्ड डायरेक्टर पी पी सिंह ने बताया कि उन्होंने स्वयं फॉरेस्ट गार्ड और वॉचरों से वन्यजीवों के विषय में बहुत कुछ सीखा है। उन्होंने कर्मचारियों को सचेत करते हुए कहा कि पदोन्नति के साथ ही उनकी जिम्मेदारियां और कर्तव्य भी बढ़ गए हैं। उन्होंने सलाह दी कि कार्यक्षेत्र में संवादहीनता की स्थिति न बनने दें और अपने उच्चाधिकारियों से लगातार संवाद बनाए रखें, जिससे किसी भी विषम परिस्थिति का त्वरित और सटीक समाधान निकाला जा सके।

प्रशिक्षण सत्र को संबोधित करते हुए तराई आर्क लैंडस्केप परियोजना के समन्वयक डॉ. मुदित गुप्ता ने कहा कि पीलीभीत टाइगर रिजर्व की अंतर्राष्ट्रीय पहचान को और बेहतर बनाने की मुख्य जिम्मेदारी अब फील्ड स्टाफ पर है। अब 24 घंटे की ड्यूटी के दौरान निजी जीवन और वन सुरक्षा में संतुलन साधने के उद्देश्य से ही यह प्रशिक्षण आयोजित किया गया है। उन्होंने कर्मचारियों से इस आयोजन को केवल किताबी पाठशाला न मानकर एक व्यावहारिक कार्यशाला के रूप में लेने का आह्वान किया।  पीलीभीत टाइगर रिजर्व के प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) मनीष सिंह ने सभी अतिथियों व प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य वन कर्मियों को आधुनिक तकनीक के साथ समन्वय बनाकर वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए सक्षम बनाना है। वहीं, वन एवं वन्यजीव प्रभाग के प्रभागीय निदेशक भरत कुमार डीके ने एम-स्ट्रिप्स, पेट्रोलिंग और रेस्क्यू ऑपरेशनों में कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि फील्ड स्टाफ वन विभाग और स्थानीय ग्रामीणों के बीच एक मजबूत संवाद सेतु के रूप में कार्य करता है।

कार्यक्रम के दौरान वन्यजीव जैव विविधता समिति के महासचिव डॉ. अमिताभ अग्निहोत्री ने कहा कि इस प्रशिक्षण के माध्यम से कर्मचारियों को उनकी नई और विस्तारित भूमिका के लिए तैयार किया जा रहा है, जिसमें वनों की सुरक्षा के साथ-साथ मानव-वन्यजीव संघर्ष को न्यूनतम करने के लिए जनसंवाद स्थापित करना बेहद अहम रहेगा। कार्यक्रम का सफल संचालन करते हुए विश्व प्रकृति निधि के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी नरेश कुमार ने जानकारी दी कि इस तीन दिवसीय शिविर में टाइगर रिजर्व के कुल 270 वन कर्मियों को प्रशिक्षित किया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों—पूर्व वन अधिकारी विक्रम तोमर, रामशंकर मंडोला तथा डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के दबीर हसन द्वारा वन्यजीव ट्रैकिंग, मॉनिटरिंग, मानव-वन्यजीव संघर्ष प्रबंधन, कानून प्रवर्तन और फील्ड सुरक्षा जैसे विषयों पर गहन व्यावहारिक ज्ञान दिया जाएगा। कार्यक्रम के अंत में आभार व्यक्त करते हुए दबीर हसन ने फील्ड ज्ञान और तकनीक के समन्वय को बेहतर प्रबंधन की कुंजी बताया तथा फील्ड डायरेक्टर सहित सभी अधिकारियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर उपप्रभागीय वनाधिकारी रमेश चौहान, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के राहुल कुमार एवं राजेंद्र भी सहयोग में प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

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