आगरा नगर निगम में बड़े वित्तीय फेरबदल की सुगबुगाहट, ई-टेंडर प्रक्रिया को लेकर खड़े हुए गंभीर सवाल
उत्तर प्रदेश के आगरा नगर निगम में विकास कार्यों के नाम पर बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है। ई-टेंडर प्रक्रिया में धांधली की जांच से प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा है।
उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक शहर आगरा के नगर निगम में कामकाज की पारदर्शिता और वित्तीय लेन-देन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शहर के विकास कार्यों और विभिन्न परियोजनाओं के लिए निकाली गई ऑनलाइन निविदाओं यानी ई-टेंडर प्रक्रिया में बड़े स्तर पर अनियमितता होने की आशंका जताई जा रही है। इस मामले के तूल पकड़ने के बाद प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है और निगम के कई अधिकारियों की भूमिका जांच के दायरे में आ गई है।
स्थानीय स्तर पर मिल रही जानकारियों के अनुसार, निगम के भीतर बड़े पैमाने पर जारी होने वाले विकास कार्यों के अनुबंधों और डिजिटल बोलियों की प्रक्रिया में नियमों को दरकिनार किए जाने की बात सामने आ रही है। आरोप है कि चहेती फर्मों को लाभ पहुंचाने के लिए मानकों के विपरीत जाकर कार्य आवंटित किए गए, जिससे सरकारी धन के दुरुपयोल की आशंका गहरी हो गई है। यदि इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराई जाती है, तो कई बड़े नाम और जिम्मेदार अधिकारी प्रशासनिक कार्रवाई की चपेट में आ सकते हैं।
सार्वजनिक निर्माण कार्यों और साफ-सफाई समेत अन्य जरूरी सेवाओं के लिए होने वाले करारों में बढ़ती अनियमितताओं को लेकर स्थानीय पार्षदों और आम जनता में भी भारी असंतोष देखने को मिल रहा है। लोगों का कहना है कि शहर के विकास के लिए आने वाला करोड़ों रुपए का बजट यदि इस तरह की प्रक्रियागत खामियों और पक्षपात की भेंट चढ़ जाएगा, तो बुनियादी सुविधाओं का विकास प्रभावित होगा।
शासन स्तर पर भी स्थानीय निकायों के कामकाज पर कड़ी नजर रखी जा रही है। जानकारों का मानना है कि यदि इस मामले में स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच एजेंसी से पड़ताल कराई जाती है, तो टेंडर आवंटन से जुड़े कई और चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं। फिलहाल, निगम प्रशासन भीतरखाने स्थिति को संभालने में जुटा है, लेकिन बढ़ती शिकायतों के चलते अधिकारियों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं।
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