आगरा में सिकंदरा रजवाह और संरक्षित वन क्षेत्र से छेड़छाड़ पर एनजीटी सख्त: यूपी सरकार समेत 12 पक्षकारों को नोटिस जारी
आगरा में सिकंदरा रजवाह और संरक्षित वन क्षेत्र को नुकसान पहुंचाने का मामला एनजीटी पहुंचा। राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने उत्तर प्रदेश सरकार समेत 12 प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया।
उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक शहर आगरा में सिकंदरा रजवाह और उससे लगे संरक्षित वन क्षेत्र को नुकसान पहुंचाने और अवैध कब्जों के मामले ने गंभीर रूप ले लिया है। इस पूरे प्रकरण की सुनवाई करते हुए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने कड़ा रुख अपनाया है। हरित अदालत ने पर्यावरण सुरक्षा के मानकों और वन अधिनियम का उल्लंघन करने पर उत्तर प्रदेश सरकार और वन विभाग समेत संबंधित 12 प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर उनसे विस्तृत जवाब तलब किया है।
एनजीटी में दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि सिकंदरा क्षेत्र में रजवाह के प्रवाह और उससे सटे संरक्षित वन भूभाग को भारी क्षति पहुंचाई जा रही है। प्राकृतिक जलस्रोत और हरियाली वाले इस क्षेत्र में विकास व निर्माण गतिविधियों के नाम पर पेड़ों की कटाई करने के साथ-साथ प्राकृतिक स्वरूप को बिगाड़ने का प्रयास किया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह क्षेत्र पर्यावरण संतुलन और भूजल स्तर को बनाए रखने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके बावजूद प्रशासनिक लापरवाही के कारण यहां लगातार अतिक्रमण और अवैध गतिविधियां फल-फूल रही हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए हरित अधिकरण की पीठ ने उत्तर प्रदेश शासन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, स्थानीय जिला प्रशासन, सिंचाई विभाग और वन विभाग सहित कुल 12 प्रमुख उत्तरदाताओं को अपनी स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने सभी पक्षों से यह बताने को कहा है कि संरक्षित वन क्षेत्र की सुरक्षा के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए और यदि वहां नियमों का उल्लंघन हुआ है तो दोषियों पर क्या कार्रवाई की गई।
स्थानीय पर्यावरणविदों और नागरिकों ने एनजीटी के इस कदम का स्वागत किया है। लोगों का कहना है कि आगरा में लगातार घटता ग्रीन कवर और प्राकृतिक जलस्रोतों का खत्म होना चिंता का विषय है। एनजीटी की इस सख्ती के बाद अब देखना होगा कि संबंधित प्रशासनिक विभाग अदालत के समक्ष अपनी रिपोर्ट किस प्रकार प्रस्तुत करते हैं और संरक्षित वन क्षेत्र को बचाने के लिए क्या कड़े कदम उठाते हैं।
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