पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघ मित्रों का तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू, अधिकारियों ने सराहा
पीलीभीत टाइगर रिजर्व में लखीमपुर खीरी एवं जनपद बिजनौर के 'बाघ मित्रों' के लिए एक विशेष तीन दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण एवं
रिपोर्ट- कुँवर निर्भय सिंह
पीलीभीत टाइगर रिजर्व में लखीमपुर खीरी एवं जनपद बिजनौर के 'बाघ मित्रों' के लिए एक विशेष तीन दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है. 7 जुलाई से 9 जुलाई तक चलने वाले इस विशेष कार्यक्रम का आयोजन पीलीभीत टाइगर रिजर्व और विश्व प्रकृति निधि-भारतके संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है. बुधवार को पीलीभीत टाइगर रिजर्व के 'वन शहीद कुंदन लाल सभागार' में आयोजित इस कार्यशाला में दुधवा टाइगर रिजर्व, उत्तर खीरी वन प्रभाग, दक्षिण खीरी वन प्रभाग, दुधवा बफर, दुधवा-किशनपुर कॉरिडोर, सामाजिक वानिकी प्रभाग बिजनौर तथा पीलीभीत टाइगर रिजर्व के बाघ मित्रों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया है।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए रोहिलखंड परिक्षेत्र के मुख्य वन संरक्षक एवं पीलीभीत टाइगर रिजर्व के क्षेत्र निदेशक पीपी. सिंह ने कहा कि बाघ मित्रों ने न केवल जंगलों के पर्यावरण व स्थानीय समुदाय की सुरक्षा की है, बल्कि अपनी निस्वार्थ सेवा से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बनाई है. उन्होंने पूर्व में हुए दो टाइगर रेस्क्यू ऑपरेशन्स की चर्चा करते हुए कहा कि यदि उस समय बाघ मित्र मौजूद होते, तो स्थिति बहुत अलग (सकारात्मक) होती। उन्होंने कहा कि बाघ मित्रों के सराहनीय कार्यों से मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने की दिशा में एक सार्थक पहल हुई है इसके साथ ही उन्होंने इस महत्वपूर्ण कार्यशाला के आयोजन के लिए विश्व प्रकृति निधि का आभार जताया और उम्मीद जताई कि यहाँ से सीखकर बाघ मित्र अपने क्षेत्रों में और अधिक सक्रियता से कार्य कर सकेंगे
इससे पूर्व, पीलीभीत टाइगर रिजर्व के प्रभागीय वनाधिकारी मनीष सिंह ने बाघ मित्रों के जमीनी प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इनके कार्यों से जंगल और वन्यजीव दोनों को सुरक्षा मिली है और मानव-वन्यजीव संघर्ष को न्यूनतम करने में बड़ी सहायता मिली है। वन एवं वन्यजीव प्रभाग के प्रभागीय निदेशक भारत कुमार डी.के. ने भी बाघ मित्रों की पीठ थपथपाते हुए कहा कि जब-जब संकट की स्थितियां सामने आई हैं, बाघ मित्रों ने बखूबी अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया है।
इस अवसर पर वन्य जीव जैव विविधता संरक्षण समिति के महासचिव डॉक्टर अमिताभ अग्निहोत्री ने अपने संबोधन में कहा कि स्वयंसेवक के रूप में बाघ मित्रों ने हमेशा अपनी सार्थक भूमिका निभाई है वे न केवल वन्यजीवों के संरक्षण में बल्कि इंसानों की सुरक्षा के लिए भी हर समय तत्पर रहे हैं उन्होंने सभी बाघ मित्रों से भविष्य में और अधिक प्रभावी भूमिका निभाने का आग्रह किया. कार्यक्रम के दौरान विश्व प्रकृति निधि के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी नरेश कुमार ने बाघ मित्रों के कार्यो पर एक विशेष प्रेजेंटेशन दिया और उन पर तैयार की गई एक लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया। इस दौरान प्रशिक्षण ले रहे बाघ मित्रों ने अपने जमीनी अनुभवों और कार्यों से संबंधित एक जीवंत अभिनय (नाटक) भी प्रस्तुत किया।
प्रशिक्षण के मुख्य बिंदु और उद्देश्य
इस तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पीलीभीत के बाघ मित्रों की तर्ज पर अन्य संवेदनशील क्षेत्रों के बाघ मित्रों को भी पूरी तरह प्रशिक्षित, सक्रिय और तैयार करना है।इस शैक्षणिक भ्रमण के दौरान बाघ मित्रों को निम्नलिखित व्यावहारिक व तकनीकी जानकारियां दी जा रही हैं।
वन्यजीवों की पहचान व ट्रैकिंग पग मार्क (पंजों के निशान) विधि के माध्यम से वन्यजीवों की मौजूदगी, दिशा और उनकी गतिविधियों को सटीक रूप से पहचानना।
साइन सर्वे का अभ्यास जंगल के भीतर वन्यजीवों द्वारा छोड़े गए अन्य प्राकृतिक संकेतों (साइन सर्वे) को खोजना और उनका व्यावहारिक अध्ययन करना।
स्थानीय संस्कृति व आजीविका से जुड़ाव
प्रशिक्षण के दूसरे दिन बाघ मित्रों को पीटीआर से सटे गाँवों का भ्रमण कराया जाएगा, जहाँ वे स्थानीय समुदायों की संस्कृति और उनके द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पादों से रूबरू होंगे।
भीड़ नियंत्रण
किसी ग्रामीण क्षेत्र में बाघ या अन्य हिंसक वन्यजीव के आ जाने की स्थिति में जुटने वाली ग्रामीणों की भारी भीड़ को संयमित और सुरक्षित ढंग से नियंत्रित करना।
सटीक सूचना तंत्र आपातकालीन परिस्थितियों या वन्यजीवों की लोकेशन से जुड़ी सटीक सूचनाओं को बिना किसी पैनिक के, सही तरीके से तुरंत वन विभाग के उच्च अधिकारियों तक प्रेषित करना।
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