Kejriwal On Bihar Student Protest: "क्या छात्र आतंकवादी हैं?" AK-47 विवाद पर अरविंद केजरीवाल का BJP पर जोरदार हमला
बिहार के सीवान में छात्र प्रदर्शन के दौरान AK-47 के कथित इस्तेमाल को लेकर अरविंद केजरीवाल ने बीजेपी पर तीखा हमला बोला है। जानिए क्या है पूरा मामला।
- Bihar AK-47 Row: बिहार में छात्रों पर AK-47 मामले में केजरीवाल का बड़ा बयान, मोदी और सम्राट चौधरी सरकार से पूछे तीखे सवाल
- "क्या छात्र आतंकवादी हैं?" बिहार में प्रदर्शन पर AK-47 का मुद्दा गर्माया, अरविंद केजरीवाल के बयान से सियासी बवाल!
- Arvind Kejriwal On Bihar AK47: बिहार में छात्रों पर AK-47 मामले में केजरीवाल का बीजेपी पर हमला- क्या छात्र आतंकवादी हैं?
बिहार के सीवान जिले में हाल ही में परीक्षा अनियमितताओं व पेपर लीक के खिलाफ जारी छात्र विरोध-प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा में तैनात एक पुलिसकर्मी द्वारा AK-47 हथियार लहराने और फायरिंग करने के दावों के बीच देश की राजनीति गरमा गई है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस घटनाक्रम को लेकर भारतीय जनता पार्टी और बिहार सरकार पर तीखा हमला बोला है। केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या देश के छात्र आतंकवादी हैं जो उन पर AK-47 का इस्तेमाल किया जा रहा है? उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का नाम लेते हुए कहा कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण की धरती से हमेशा से क्रांति की आवाज उठी है और छात्रों से टकराने की भूल सरकार को नहीं करनी चाहिए।
मामला बिहार के सीवान जिले का है, जहां छात्र अपनी विभिन्न मांगों और परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान की एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुई, जिसमें विशेष जांच दल (SIT) में तैनात एक पुलिस कांस्टेबल के पास AK-47 हथियार देखा गया और उस पर फायरिंग करने के गंभीर आरोप लगे।
इस घटना के बाद पुलिस मुख्यालय ने तुरंत संज्ञान लेते हुए संबंधित कांस्टेबल को सस्पेंड कर दिया और मामले की विभागीय जांच बैठा दी। हालांकि, इस वीडियो के सामने आते ही विपक्षी दलों ने केंद्र और बिहार की एनडीए सरकार को घेरना शुरू कर दिया। विपक्ष का आरोप है कि लोकतंत्र में अपनी आवाज उठा रहे छात्रों पर सुरक्षा बलों द्वारा इतना घातक और आधुनिक हथियार तैनात करना सरकार की तानाशाही मानसिकता को दर्शाता है।
बिहार में छात्र पिछले कुछ समय से प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता, समय पर भर्ती और पेपर लीक के मामलों के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। सीवान में आयोजित प्रदर्शन के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल की तैनाती की गई थी। इसी दौरान सुरक्षा में तैनात सिपाही अभिषेक पटेल द्वारा ऑटोमैटिक हथियार लहराने और फायरिंग की खबरें सामने आईं।
वीडियो वायरल होने के बाद बिहार पुलिस प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सिपाही को निलंबित कर दिया। लेकिन इसके बाद दिल्ली से लेकर बिहार तक की राजनीति उबल पड़ी। राहुल गांधी और तेजस्वी यादव के हमलों के बाद अब अरविंद केजरीवाल ने भी इस मुद्दे पर मोर्चा संभालते हुए सीधे केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधा है। केजरीवाल ने इतिहास का हवाला देते हुए याद दिलाया कि बिहार की धरती ने हमेशा छात्र आंदोलनों के जरिए सत्ता के तख्त पलटे हैं।
अरविंद केजरीवाल ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि बीजेपी सरकार को आखिर क्या हो गया है? हमारे देश के भावी भविष्य और युवाओं पर AK-47 जैसी राइफलें तानी जा रही हैं। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए लिखा कि इतिहास गवाह है जब भी छात्रों पर दमनकारी नीतियां थोपी गईं, जनता ने करारा जवाब दिया है।
वहीं, भारतीय जनता पार्टी और पुलिस प्रशासन की ओर से आरोपों पर सफाई दी गई है। बीजेपी प्रवक्ताओं का कहना है कि विपक्ष छात्रों के कंधों पर बंदूक रखकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेक रहा है और आधे-अधूरे तथ्यों के आधार पर भ्रम फैला रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि संबंधित जवान को निलंबित कर जांच के आदेश दे दिए गए हैं और वहां किसी भी छात्र को जानलेवा चोट नहीं पहुंची है। सत्ता पक्ष के नेताओं का यह भी तर्क है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों से किसी को ऐतराज नहीं है, लेकिन उग्र तत्वों द्वारा कानून व्यवस्था हाथ में लेने पर स्थिति संभालना पुलिस की मजबूरी होती है।
इस विवाद का असर अब संसद से लेकर सड़कों तक देखने को मिल रहा है। विपक्ष इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाकर सरकार को घेरने में जुटा है। छात्रों के आंदोलन को राजनीतिक समर्थन मिलने से अब यह मामला केवल परीक्षाओं तक सीमित न रहकर सुरक्षा बलों की कार्यप्रणाली और नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों की बहस में बदल गया है।
इसके अलावा, इस घटना के बाद बिहार पुलिस और अन्य राज्यों के पुलिस प्रशासन पर भी यह दबाव बन गया है कि वे सार्वजनिक प्रदर्शनों से निपटने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का कड़ाई से पालन करें ताकि आम नागरिकों और छात्रों के बीच सुरक्षा का माहौल बना रहे।
आने वाले दिनों में सीवान घटना की विभागीय जांच रिपोर्ट सामने आएगी, जिसके आधार पर संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ अंतिम अनुशासनात्मक कार्रवाई तय होगी। वहीं, आम आदमी पार्टी और इंडिया गठबंधन के अन्य घटक दल इस मुद्दे पर संसद के भीतर और बाहर अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखने की रणनीति बना रहे हैं।
चुनावी समर के बीच छात्रों के गुस्से और विपक्ष के हमलावर रुख को देखते हुए यह मुद्दा बिहार की राजनीति में और ज्यादा तूल पकड़ सकता है। अब देखना यह होगा कि सरकार इस मामले में छात्रों के भरोसे को बहाल करने के लिए क्या कदम उठाती है।
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