Amit Shah Resignation Demand: 'फंडिंग का दावा सच तो अमित शाह दें इस्तीफा', अभिजीत दिपके का राहुल गांधी के समर्थन में बड़ा बयान

अभिजीत दिपके ने राहुल गांधी की गृह मंत्री अमित शाह से इस्तीफे की मांग का समर्थन किया है। उन्होंने विदेशी फंडिंग के दावों को गृह मंत्रालय की नाकामी बताया।

By INA News Desk
Jul 31, 2026 - 12:16
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Amit Shah Resignation Demand: 'फंडिंग का दावा सच तो अमित शाह दें इस्तीफा', अभिजीत दिपके का राहुल गांधी के समर्थन में बड़ा बयान
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  • Abhijit Dipke Statement: राहुल गांधी की मांग का समर्थन, गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे पर छिड़ी नई राजनीतिक बहस
  • गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग! अभिजीत दिपके ने साधा निशाना, कहा- विदेशी फंडिंग का आरोप अमित शाह की विफलता
  • Political News: विदेशी फंडिंग और बाहरी नियंत्रण के दावों पर घिरे गृह मंत्री, अभिजीत दिपके ने मांगा अमित शाह का इस्तीफा

भारतीय राजनीति में गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर जुबानी जंग एक बार फिर तेज हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग का समर्थन करते हुए राजनीतिक विश्लेषक और कार्यकर्ता अभिजीत दिपके ने सरकार पर तीखा प्रहार किया है। नई दिल्ली में दिए गए अपने बयान में उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष और विभिन्न आंदोलनों पर बाहर से फंडिंग मिलने तथा विदेशी ताकतों द्वारा पार्टी चलाए जाने के आरोप सच हैं, तो यह सीधे तौर पर गृह मंत्रालय और गृह मंत्री के रूप में अमित शाह की बड़ी विफलता को दर्शाता है। इस तर्क के आधार पर उन्होंने कहा कि अमित शाह को तुरंत अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में गरमाहट बढ़ गई है और पक्ष-विपक्ष की ओर से प्रतिक्रियाएं आना शुरू हो गई हैं।
राष्ट्रीय राजनीति में विपक्षी नेताओं और जनांदोलनों पर विदेशी फंडिंग तथा बाहरी दबाव में काम करने के आरोप अक्सर लगाए जाते रहे हैं। हाल के घटनाक्रमों के बीच कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इन आरोपों के आधार पर गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग उठाई थी।
इसी मांग का पुरजोर समर्थन करते हुए अभिजीत दिपके ने सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखी। उन्होंने सरकार और सत्तापक्ष के उन दावों पर सवाल खड़ा किया जिनमें बार-बार यह कहा जाता है कि देश में चलने वाले विभिन्न विरोध प्रदर्शनों और विपक्षी गतिविधियों को विदेशों से वित्तीय सहायता प्राप्त होती है। दिपके का कहना है कि अगर देश के भीतर ऐसा हो रहा है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी देश की आंतरिक सुरक्षा संभालने वाले गृह मंत्रालय की बनती है।
पूरे घटनाक्रम की शुरुआत राजनीतिक मंचों पर लगाए जा रहे उन आरोपों से हुई, जिनमें विपक्षी दलों और उनके आंदोलनों को विदेशी ताकतों द्वारा संचालित और वित्तपोषित बताने की बात कही जाती रही है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस मुद्दे को उठाते हुए तर्क दिया था कि यदि सत्तापक्ष के इन आरोपों में जरा सी भी सच्चाई है, तो यह देश की आंतरिक सुरक्षा और खुफिया तंत्र की नाकामी है।
राहुल गांधी के इस रुख को आगे बढ़ाते हुए अभिजीत दिपके ने कहा कि लोग अक्सर यह आरोप लगाते हैं कि हमारे आंदोलनों को बाहर से पैसा मिलता है और हमारी नीतियां देश के बाहर से तय की जाती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि इन दावों को सच मान भी लिया जाए, तो यह किसी विपक्षी दल का दोष नहीं, बल्कि भारत के गृह मंत्री के रूप में अमित शाह की सीधी और स्पष्ट विफलता है।
दिपके ने कहा कि अगर देश की सीमाओं के भीतर विदेशी फंडिंग आसानी से पहुंच रही है और राष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित कर रही है, तो गृह मंत्री को इसकी नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी लेते हुए तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के अनर्गल बयानबाजी के जरिए सरकार केवल अपनी असफलताओं को छिपाने और मुख्य मुद्दों से ध्यान भटकाने का काम कर रही है।
अभिजीत दिपके और राहुल गांधी के बयानों के बाद भारतीय जनता पार्टी और सत्तापक्ष की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। भाजपा प्रवक्ताओं का कहना है कि विपक्षी दल अपनी राजनीतिक जमीन खो चुके हैं और अब गैर-जिम्मेदाराना बयान देकर जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। सत्तापक्ष के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्रालय देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है और पारदर्शी तरीके से काम कर रहा है।
दूसरी तरफ, कांग्रेस और अन्य विपक्षी सहयोगियों ने दिपके के इस तर्क को बेहद व्यावहारिक और तार्किक बताया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि सरकार एक तरफ तो विदेशी साजिशों का हवाला देती है और दूसरी तरफ अपनी एजेंसियों की नाकामी को स्वीकार करने से बचती है। यदि देश में कोई भी गैर-कानूनी फंडिंग हो रही है, तो कार्रवाई करने के बजाय केवल राजनीतिक बयान देना गृह मंत्रालय की कमजोरी को उजागर करता है।
इस राजनीतिक बयानबाजी का सीधा असर आगामी राजनीतिक बहसों और चुनावी रणनीति पर पड़ता दिख रहा है। विदेशी फंडिंग के आरोपों को सुरक्षा और प्रशासनिक नाकामी से जोड़कर विपक्ष ने सत्तापक्ष के पारंपरिक आक्रामक रुख को रक्षात्मक बनाने का प्रयास किया है।
इस घटनाक्रम से यह साफ हो गया है कि आने वाले दिनों में संसद से लेकर सड़क तक विदेशी फंडिंग, गृह मंत्रालय की कार्यप्रणाली और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिलेगी। आम जनता के बीच भी यह सवाल चर्चा का विषय बन रहा है कि क्या राजनीतिक आरोपों के पीछे कोई प्रशासनिक तथ्य हैं या यह केवल चुनावी बयानबाजी का हिस्सा है।
इस मुद्दे पर आने वाले दिनों में राजनीतिक पारा और चढ़ने की संभावना है। विपक्ष इस तर्क को ढाल बनाकर सरकार से गृह मंत्रालय की रिपोर्ट और विदेशी फंडिंग रोकने के लिए उठाए गए कदमों पर जवाब मांग सकता है।
वहीं, दूसरी ओर गृह मंत्रालय और सत्तापक्ष द्वारा इन राजनीतिक आरोपों का जवाब देने के लिए आधिकारिक आंकड़े या बयान जारी किए जा सकते हैं। देखना यह होगा कि आगामी राजनीतिक रैलियों और विधायी चर्चाओं में यह मुद्दा किस दिशा में आगे बढ़ता है।

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