Rahul Gandhi Statement on RSS: शिक्षा व्यवस्था से RSS को बाहर निकाला जाए, संसद में राहुल गांधी का बड़ा हमला
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने संसद में आरएसएस पर हमला बोलते हुए शिक्षा व्यवस्था से संघ को बाहर करने और आरएसएस समर्थित कुलपतियों को हटाने की मांग की है।
- Rahul Gandhi Attack on RSS VC Appointees: 'संघ समर्थित कुलपतियों को हटाया जाए', संसद में नए बिल पर बोले राहुल गांधी
- आरएसएस पर बरसे राहुल गांधी: 'शिक्षा तंत्र से संघ की दखलअंदाजी खत्म हो, नियुक्त कुलपतियों को तुरंत हटाएं'
- Rahul Gandhi Controversy: शिक्षा प्रणाली से आरएसएस को बाहर करने की मांग, नए विधेयक को राहुल गांधी ने बताया महज बैंडेज
लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने 30 जुलाई 2026 को केंद्र सरकार और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर जोरदार राजनीतिक हमला बोला है। संसद के पटल पर बोलते हुए राहुल गांधी ने मांग की कि देश की संपूर्ण शिक्षा व्यवस्था से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को पूरी तरह बाहर किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि विभिन्न विश्वविद्यालयों में आरएसएस की सिफारिशों और निष्ठा के आधार पर कुलपतियों (वीसी) की नियुक्तियां की गई हैं, जिन्हें तुरंत पद से हटाया जाना चाहिए। सरकार द्वारा लाए गए नए विधेयक पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि यह कानून उस गंभीर बीमारी का इलाज नहीं है जिसकी देश के शैक्षणिक ढांचे को आवश्यकता है, बल्कि यह केवल आरएसएस को बचाने का एक जरिया है। राहुल गांधी के इस तीखे बयान के बाद राजनीतिक हलकों में हंगामा मच गया है और सत्तापक्ष तथा विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।
संसद के मानसून सत्र के दौरान शैक्षणिक सुधारों और परीक्षा प्रणाली से जुड़े एक महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा चल रही थी। इसी चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने केंद्र सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि देश के शिक्षा क्षेत्र में स्वायत्तता समाप्त हो चुकी है और वैचारिक रूप से एक विशेष संस्था का वर्चस्व स्थापित किया जा रहा है।
राहुल गांधी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि देश की शिक्षा प्रणाली को निष्पक्ष और विश्वस्तरीय बनाना है, तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को शिक्षा तंत्र से पूरी तरह दूर करना होगा। उनके इस बयान ने सदन के भीतर और बाहर राजनीतिक पारे को बढ़ा दिया है।
सदन की कार्यवाही के दौरान विधेयक पर अपनी बात रखते हुए राहुल गांधी ने सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि यह विधेयक उस बड़े घाव पर महज एक छोटा सा बैंडेज लगाने जैसा है, जिसके लिए असल में एक बड़ी सर्जरी की आवश्यकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश के प्रतिष्ठित केंद्रीय विश्वविद्यालयों, संस्थानों और उच्च शिक्षण केंद्रों में योग्यता को दरकिनार कर केवल एक खास विचारधारा से जुड़े लोगों को कुलपति बनाया गया है।
राहुल गांधी ने तर्क दिया कि जब तक इन कुलपतियों को हटाया नहीं जाता और शैक्षणिक संस्थानों को प्रशासनिक और वैचारिक दबाव से मुक्त नहीं कराया जाता, तब तक कोई भी नया कानून या बिल शिक्षा प्रणाली में सुधार नहीं ला सकता। उन्होंने यह भी कहा कि इस विधेयक को लाने का असली मकसद शिक्षा क्षेत्र में व्याप्त खामियों को सुधारना नहीं, बल्कि आरएसएस की भूमिका को बचाना और उसे सुरक्षित रास्ता देना है।
राहुल गांधी के इस बयान के तुरंत बाद सत्तापक्ष की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों ने राहुल गांधी के आरोपों का कड़ा खंडन किया। सत्तापक्ष का कहना है कि कांग्रेस पार्टी हमेशा से संवैधानिक और सांस्कृतिक संगठनों को बदनाम करने की राजनीति करती रही है। भाजपा नेताओं ने कहा कि कुलपतियों की नियुक्तियां पूरी तरह से निर्धारित शैक्षणिक योग्यता, अनुभव और पारदर्शी प्रक्रियाओं के तहत होती हैं।
दूसरी तरफ, विपक्षी दलों के कई नेताओं ने राहुल गांधी के बयान का समर्थन किया। विपक्षी गठजोड़ के नेताओं का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में देश के शीर्ष विश्वविद्यालयों में वैचारिक हस्तक्षेप बढ़ा है, जिससे स्वायत्तता प्रभावित हुई है। हालांकि, आरएसएस से जुड़े विचारकों का कहना है कि संघ राष्ट्र निर्माण और चरित्र निर्माण के लिए काम करता है और उस पर लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह से निराधार और राजनीति से प्रेरित हैं।
राहुल गांधी के इस बयान से देश के राजनीतिक परिदृश्य में 'शिक्षा बनाम विचारधारा' की बहस एक बार फिर केंद्र में आ गई है। आगामी चुनावों और राज्य विधानसभा चुनावों के मद्देनजर यह मुद्दा और गरमाने के आसार हैं। इस बयान का प्रभाव युवाओं, छात्रों और शैक्षणिक जगत् से जुड़े लोगों पर भी पड़ना तय है।
विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति प्रक्रिया और स्वायत्तता को लेकर पहले से चल रही बहस अब और व्यापक रूप से सार्वजनिक मंचों पर आ गई है। शिक्षा के व्यवसायीकरण, वैचारिक प्रभाव और प्रशासनिक निष्पक्षता को लेकर छात्र संगठनों और शिक्षक संघों के बीच भी नई चर्चा शुरू हो गई है।
संसद के चालू सत्र में इस मुद्दे को लेकर हंगामा जारी रहने के पूरे आसार हैं। विपक्षी दल इस विधेयक के प्रावधानों और कुलपतियों की नियुक्ति प्रक्रिया पर सरकार से और अधिक स्पष्टीकरण और संशोधनों की मांग कर सकते हैं। वहीं सरकार इस विधेयक को पारित कराने के लिए अपने बहुमत और तर्कों के साथ आगे बढ़ेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इस मुद्दे को जनसभाओं और सोशल मीडिया अभियानों के जरिए जनता के बीच ले जाने की कोशिश करेंगे। यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार विपक्ष के इन तीखे हमलों का जवाब किस तरह की प्रशासनिक और विधायी कार्रवाइयों के जरिए देती है।
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