India Gold Demand Q2 2026: देश में सोने की मांग 6% घटी, वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की ताजा रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल-जून 2026 तिमाही में भारत में सोने की कुल मांग 6 प्रतिशत घटकर 131.4 टन रह गई है। देखें पूरी रिपोर्ट।

Jul 31, 2026 - 12:05
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India Gold Demand Q2 2026: देश में सोने की मांग 6% घटी, वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
  • Gold Demand Report 2026: रिकॉर्ड कीमतों और कस्टम ड्यूटी के असर से घटी सोने की मांग, लेकिन कुल खर्च 50% बढ़ा
  • सोने की खरीदारी की रफ्तार पड़ी धीमी! 3 महीने में 6 फीसदी घटी मांग, पर लोगों ने खरीदे रिकॉर्ड 1.98 लाख करोड़ के जेवर
  • WGC Gold Demand Report: भारत में अप्रैल-जून तिमाही के दौरान सोने की मांग में 6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज

भारत में सोने की खरीदारी की रफ्तार में चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल से जून 2026 की तिमाही के दौरान देश में सोने की कुल मांग में सालाना आधार पर 6 प्रतिशत की कमी आई है। इस अवधि में कुल मांग घटकर 131.4 टन रह गई, जो पिछले साल की समान अवधि में 139.7 टन थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील, सोने की रिकॉर्ड ऊंची कीमतों, कस्टम ड्यूटी में बढ़ोतरी और ऑफ-सीजन के संयुक्त प्रभाव से आम खरीदारों ने नई खरीदारी से दूरी बनाई। हालांकि मांग का वॉल्यूम घटने के बावजूद रिकॉर्ड कीमतों के कारण कुल बाजार मूल्य में भारी उछाल दर्ज किया गया है। आने वाले त्योहारी सीजन में इस रुझान में बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है।
वैश्विक संस्था वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने 30 जुलाई 2026 को भारत में सोने की मांग से जुड़े चालू वर्ष की दूसरी तिमाही के आंकड़े जारी किए हैं। इन आंकड़ों के अनुसार, भारतीय बाजार में सोने की खपत में स्पष्ट सुस्ती देखी गई है। अप्रैल से जून 2026 के बीच देश भर में सोने की कुल मांग 131.4 टन रही, जबकि पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में देशवासियों ने 139.7 टन सोना खरीदा था।
गिरावट का यह रुझान मुख्य रूप से आभूषण (ज्वेलरी) खंड में देखने को मिला है। स्थानीय बाजारों में सोने के दाम अब तक के सर्वोच्च स्तर पर पहुंचने और आयात शुल्क में की गई वृद्धि के चलते उपभोक्ताओं ने बड़े पैमाने पर खरीदारी को टालना ही बेहतर समझा।
वर्ष 2026 की अप्रैल-जून तिमाही के दौरान सर्राफा बाजार में कई तरह के उतार-चढ़ाव देखने को मिले। प्रधानमंत्री की अपील का मनोवैज्ञानिक प्रभाव और बाजार के बदलते समीकरणों ने ग्राहकों के रुख को प्रभावित किया। इस दौरान सोने के भाव रिकॉर्ड ऊंचाइयों को छू रहे थे, जिसके कारण आम मध्यवर्ग और छोटे खरीदारों की जेब पर अतिरिक्त भार पड़ा।
सरकार द्वारा सीमा शुल्क (कस्टम ड्यूटी) में की गई बढ़ोतरी ने स्थानीय बाजार में सोने को और अधिक महंगा बना दिया। चूंकि यह समय पारंपरिक रूप से शादियों और बड़े त्योहारों का नहीं होता, इसलिए ऑफ-सीजन की वजह से भी शोरूम्स में ग्राहकों की आवाजाही कम रही।
मांग में 6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज होने के बावजूद एक दिलचस्प आंकड़ा सामने आया है। मात्रा के हिसाब से भले ही खपत कम हुई हो, लेकिन उच्च कीमतों के कारण कुल खर्च में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस तीन महीने की अवधि में भारतीय उपभोक्ताओं ने कुल 1.98 लाख करोड़ रुपये का सोना खरीदा। पिछले साल की समान अवधि की तुलना में यह आंकड़ा लगभग 50 फीसदी अधिक है, जो यह दर्शाता है कि सोने का मूल्य आधार किस तेजी से बढ़ा है।
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के विश्लेषकों का कहना है कि उच्च मूल्य स्तर और नीतिगत बदलावों के कारण ग्राहकों का सतर्क रुख अपनाना स्वाभाविक है। जब भी कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचती हैं, खुदरा ग्राहक तात्कालिक खरीदारी रोक देते हैं और बाजार में स्थिरता का इंतजार करते हैं।
सर्राफा कारोबारियों और ज्वेलर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। व्यापारियों का मानना है कि कस्टम ड्यूटी में इजाफे और महंगे भाव ने आभूषणों की बिक्री को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। हालांकि, उनका यह भी कहना है कि भारतीय समाज में सोने के प्रति पारंपरिक और निवेश के रूप में आकर्षण हमेशा बना रहता है, इसलिए कुल मौद्रिक मूल्य में वृद्धि देखने को मिली है।
सोने की मांग में आई इस सुस्ती का प्रभाव देश के समग्र व्यापार संतुलन और खुदरा सर्राफा बाजार दोनों पर दिखाई दे रहा है। आयात में आई कमी से देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ने वाला दबाव कुछ हद तक कम हुआ है, जिसे आर्थिक दृष्टिकोण से सकारात्मक माना जा रहा है।
दूसरी तरफ, ज्वेलरी उद्योग और छोटे कारीगरों के कामकाज पर ऑफ-सीजन के साथ मांग घटने का असर पड़ा है। महंगे सोने के कारण अब लोग पुराने गहनों के बदले नए गहने बनवाने या फिर सिक्के और बार जैसे निवेश विकल्पों की तरफ ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं, जिससे पारंपरिक ज्वेलरी रिटेल का स्वरूप बदल रहा है।
आने वाले महीनों में धनतेरस, दिवाली और उसके बाद शुरू होने वाले विवाह-शादियों के सीजन से सर्राफा बाजार को बड़ी उम्मीदें हैं। बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि आने वाले समय में वैश्विक बाजार में कीमतें स्थिर होती हैं या कस्टम ड्यूटी के मोर्चे पर कोई राहत मिलती है, तो उपभोक्ता दोबारा बाजार का रुख कर सकते हैं।
इसके अलावा, मॉनसून की प्रगति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती भी आगे की तिमाहियों में सोने की मांग तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। फेस्टिव सीजन की शुरुआत के साथ ही ज्वेलरी ब्रांड्स द्वारा दी जाने वाली छूट और स्कीम्स बाजार में दोबारा रौनक ला सकती हैं।

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