Devoleena Bhattacharjee Post: आरक्षण और मंत्रोच्चार पर देवोलीना भट्टाचार्जी के बयान ने छेड़ी बहस, जानें अभिनेत्री ने सोशल मीडिया पर क्या लिखा

टीवी अभिनेत्री देवोलीना भट्टाचार्जी ने आरक्षण और मंत्रोच्चारण पर एक यूजर को करारा जवाब दिया है। जानें वेदों की पढ़ाई और जॉब्स पर क्या बोलीं 'गोपी बहू'।

Jul 31, 2026 - 11:57
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Devoleena Bhattacharjee Post: आरक्षण और मंत्रोच्चार पर देवोलीना भट्टाचार्जी के बयान ने छेड़ी बहस, जानें अभिनेत्री ने सोशल मीडिया पर क्या लिखा
Devoleena Bhattacharjee Reservation Statement
  • 'मंत्रोच्चारण करके देखो, आरक्षण की जरूरत नहीं पड़ेगी': सोशल मीडिया पर भड़कीं देवोलीना भट्टाचार्जी, यूजर को दिया करारा जवाब
  • आरक्षण और वेदों की पढ़ाई पर देवोलीना भट्टाचार्जी का बड़ा बयान! सोशल मीडिया पर ट्रोलर को दिया मुंहतोड़ जवाब, वायरल हुआ पोस्ट
  • Devoleena Bhattacharjee Viral Post: आरक्षण और मंत्रोच्चारण पर देवोलीना के बयान से सोशल मीडिया पर घमासान, जानें पूरा मामला

मशहूर टीवी धारावाहिक 'साथ निभाना साथिया' में 'गोपी बहू' का लोकप्रिय किरदार निभाकर घर-घर में पहचान बनाने वाली अभिनेत्री देवोलीना भट्टाचार्जी एक बार फिर अपने बेबाक बयान को लेकर सुर्खियों में हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' (पूर्व में ट्विटर) पर 30 जुलाई 2026 को वैदिक शिक्षा, मंत्रोच्चारण और आरक्षण व्यवस्था से जुड़े एक वायरल वीडियो पर देवोलीना का कड़ा रुख देखने को मिला। एक यूजर द्वारा वेदों की पढ़ाई और नौकरियों में आरक्षण को लेकर की गई टिप्पणी का जवाब देते हुए अभिनेत्री ने लिखा कि मंत्रोच्चारण से व्यक्ति ज्ञानी बनता है और यदि सही ज्ञान प्राप्त कर लिया जाए तो आरक्षण की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। उनका यह बयान सामने आते ही सोशल मीडिया पर एक नई बहस छिड़ गई है।
सोशल मीडिया पर अक्सर सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखने वाली देवोलीना भट्टाचार्जी ने एक यूजर की टिप्पणी पर पलटवार किया है। मामला एक वीडियो से शुरू हुआ, जिसमें कुछ बच्चे पारंपरिक वेशभूषा में वेदों की पढ़ाई और शास्त्रीय मंत्रोच्चारण करते नजर आ रहे थे।
इस वीडियो को शेयर करते हुए एक यूजर ने सवाल उठाया था कि ऐसी धार्मिक पढ़ाई का देश के विकास में क्या योगदान है और इससे केवल एक विशेष वर्ग को फायदा होता है। इसी पोस्ट की थ्रेड में एक अन्य यूजर ने शिक्षा और आरक्षण को जोड़ते हुए कटाक्ष किया, जिस पर देवोलीना ने आगे आकर कड़ी प्रतिक्रिया दी।
पूरे मामले की शुरुआत सोशल मीडिया मंच X पर शेयर किए गए एक वीडियो से हुई। वीडियो में ब्राह्मण बटुक वेदों का सस्वर पाठ और मंत्रोच्चारण कर रहे थे।
शुरुआती पोस्ट: एक यूजर ने वीडियो शेयर कर तर्क दिया कि पारंपरिक धार्मिक शिक्षा से आधुनिक राष्ट्र निर्माण और विकास में कोई मदद नहीं मिलती। उसने इसे जाति विशेष से जोड़कर सवाल खड़े किए।
आरक्षण पर टिप्पणी: इस पोस्ट पर एक अन्य यूजर ने टिप्पणी की, "पढ़ाई-लिखाई के समय मंत्रोच्चार करेंगे, फिर नौकरी नहीं मिलेगी तो आरक्षण को दोष देंगे।"
देवोलीना का पलटवार: यूजर की इस बात से असहमत होते हुए देवोलीना भट्टाचार्जी ने तुरंत जवाब लिखा, "मंत्रोच्चारण करके देखो। आरक्षण की जरूरत नहीं पड़ेगी। खुद भी ज्ञानी बनोगे और दूसरे को भी तकलीफ नहीं होगी।"
अभिनेत्री के इस एक वाक्य ने प्लेटफॉर्म पर बहस को तेज कर दिया और देखते ही देखते यह पोस्ट वायरल हो गई।
देवोलीना भट्टाचार्जी के इस जवाब के बाद सोशल मीडिया यूजर्स दो धड़ों में बंट गए:
समर्थकों का रुख: देवोलीना का समर्थन करने वाले यूजर्स का कहना है कि भारतीय संस्कृति, वेदों और मंत्रोच्चारण का एक वैज्ञानिक व मानसिक महत्व है। ज्ञान प्राप्त करने से व्यक्ति आत्मनिर्भर बनता है। समर्थकों ने अभिनेत्री की इस बात की सराहना की कि केवल सरकारी नौकरियों या आरक्षण पर निर्भर रहने के बजाय वास्तविक ज्ञान और क्षमता निर्माण पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
आलोचकों की राय: दूसरी ओर, आलोचकों का मानना है कि पारंपरिक धार्मिक शिक्षा और आधुनिक तकनीकी शिक्षा में अंतर होता है। कुछ यूजर्स ने तर्क दिया कि आरक्षण एक संवैधानिक अधिकार है जिसका उद्देश्य सामाजिक समानता लाना है, इसलिए इसकी तुलना धार्मिक पाठ या मंत्रोच्चारण से करना उचित नहीं है।
देवोलीना की यह टिप्पणी इंटरनेट पर एक बार फिर 'आधुनिक शिक्षा बनाम पारंपरिक वैदिक शिक्षा' और 'संवैधानिक आरक्षण व्यवस्था' के इर्द-गिर्द केंद्रित हो गई है। टीवी इंडस्ट्री की लोकप्रिय हस्तियों द्वारा सामाजिक-राजनीतिक विषयों पर दिए गए बयानों पर अक्सर त्वरित जनप्रतिक्रिया देखने को मिलती है।
इस पोस्ट के बाद देवोलीना भट्टाचार्जी X पर ट्रेंड करने लगीं और उनके पोस्ट पर हजारों री-ट्वीट, लाइक्स और कमेंट्स दर्ज किए गए। मनोरंजक जगत और आम जनता के बीच इस विषय पर अलग-अलग विचार-विमर्श का सिलसिला जारी है।
सोशल मीडिया पर इस प्रकार की बहसें तेजी से वायरल होती हैं और कुछ समय बाद शांत भी हो जाती हैं। हालांकि, देवोलीना भट्टाचार्जी अपने विचार बेबाकी से रखने के लिए जानी जाती हैं और उन्होंने पहले भी कई सामाजिक मुद्दों पर ट्रोल्स को करारा जवाब दिया है। देखना यह होगा कि इस मुद्दे पर उठ रही प्रतिक्रियाओं के बीच क्या अभिनेत्री की ओर से कोई और स्पष्टीकरण आता है या यह बहस ऐसे ही अलग-अलग दृष्टिकोणों के साथ आगे बढ़ती है।

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