अजित पवार के निधन के बाद अल्पसंख्यक विभाग में धड़ल्ले से जारी हुए प्रमाणपत्र, चार दिनों में 75 संस्थाओं को मंजूरी, सीएम फडणवीस ने जांच बैठाई।
महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के 28 जनवरी 2026 को बारामती में विमान दुर्घटना में निधन के बाद राज्य में तीन दिनों का
महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के 28 जनवरी 2026 को बारामती में विमान दुर्घटना में निधन के बाद राज्य में तीन दिनों का राजकीय शोक घोषित किया गया था। इस दौरान अल्पसंख्यक विकास विभाग में शैक्षणिक संस्थानों को अल्पसंख्यक दर्जा प्रमाणपत्र धड़ल्ले से जारी किए गए। 28 जनवरी को ही दुपहर में सात प्रमाणपत्र जारी किए गए और उसके बाद चार दिनों में कुल 75 संस्थाओं को यह दर्जा दिया गया। यह विभाग अजित पवार के पास था। प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया 12 अक्टूबर 2025 को पूर्व मंत्री माणिकराव कोकाटे द्वारा स्थगित की गई थी लेकिन अजित पवार के निधन के बाद इसे फिर से शुरू किया गया। कुछ प्रमाणपत्र देर रात तक जारी किए गए। राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष प्यारे खान ने इसे गंभीर मामला बताते हुए जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि निधन के दिन और शोक के दौरान नियमों को ताक पर रखकर प्रमाणपत्र जारी किए गए।
- सीएम देवेंद्र फडणवीस ने प्रमाणपत्रों पर लगाई रोक, जांच के आदेश जारी
विवाद बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 75 प्रमाणपत्रों पर स्थगिती लगा दी है। उन्होंने इस मामले की जांच के आदेश दिए हैं और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया पर सवाल उठे क्योंकि राज्य शोक में था और विभाग के मंत्री का निधन हो चुका था। विपक्ष ने भी जांच की मांग की। अल्पसंख्यक आयोग ने इसे बड़ा घोटाला बताया और सीआईडी जांच की मांग की। कुछ प्रमाणपत्र 28 जनवरी दोपहर 3:09 बजे जारी किए गए जबकि अजित पवार का निधन सुबह 8:46 बजे हुआ था। 1 फरवरी को रविवार होने से कोई प्रमाणपत्र जारी नहीं हुआ लेकिन 2 फरवरी को फिर जारी किए गए। कुछ मंजूरियां शाम 6:45 और 6:58 बजे तक दर्ज की गईं। मुख्यमंत्री ने प्रमाणपत्रों को रद्द करने या स्थगित करने के आदेश दिए हैं।
- अल्पसंख्यक दर्जा प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया पर सवाल, फर्जी दस्तखत का भी आरोप
अल्पसंख्यक दर्जा प्रमाणपत्र शैक्षणिक संस्थानों को दिए जाते हैं। इस प्रक्रिया में मंत्रालय स्तर पर मंजूरी दी जाती है। अजित पवार के निधन के बाद कुछ फाइलों पर फर्जी डिजिटल दस्तखत का आरोप लगा है। 20 संस्थाओं की 75 शाखाओं को प्रमाणपत्र दिए गए। राज्य अल्पसंख्यक आयोग ने कहा कि यह प्रशासनिक मर्यादाओं का उल्लंघन है। प्यारे खान ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर एसआईटी जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि निधन के बाद शोक के दौरान ऐसी प्रक्रिया चलाना गंभीर है। मुख्यमंत्री ने जांच कमिटी गठित करने के निर्देश दिए हैं। विवाद के बाद प्रमाणपत्रों की वैधता पर सवाल उठे हैं।
अजित पवार का निधन 28 जनवरी 2026 को विमान दुर्घटना में हुआ था। राज्य में तीन दिनों का शोक था। इसी दौरान अल्पसंख्यक विभाग में 75 प्रमाणपत्र जारी किए गए। मुख्यमंत्री फडणवीस ने स्थगिती लगाई और जांच के आदेश दिए। अल्पसंख्यक आयोग ने घोटाला बताया। प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया पर फर्जी दस्तखत का आरोप लगा।
- राजकीय शोक के दौरान जारी प्रमाणपत्रों का विवाद, जांच में खुलासे की उम्मीद
यह मामला महाराष्ट्र में राजनीतिक बहस का विषय बना। अल्पसंख्यक दर्जा प्रमाणपत्रों की प्रक्रिया पर सवाल उठे क्योंकि शोक के दौरान नियमों का पालन नहीं हुआ। मुख्यमंत्री ने जांच के आदेश दिए हैं। जांच में दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई होगी। प्रमाणपत्र जारी करने वाले विभाग में अजित पवार मंत्री थे। निधन के बाद भी फाइलें तेजी से क्लियर की गईं। यह प्रकरण अल्पसंख्यक संस्थानों के लिए महत्वपूर्ण है।
Also Read- धनबाद के हीरापुर एचई हाई स्कूल में स्टोर रूम में लगी भीषण आग, रविवार शाम कोई जनहानि नहीं।
What's Your Reaction?











