Barabanki: जीआईसी ग्राउंड पर हुआ आरएसएस का शाखा संगम: 24 बस्तियों के सैकड़ों स्वयंसेवक हुए एकत्र, राष्ट्र निर्माण पर जोर।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा स्थानीय जीआईसी ग्राउंड पर रविवार को शाखा संगम कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमे
बाराबंकी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा स्थानीय जीआईसी ग्राउंड पर रविवार को शाखा संगम कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमे नगर में जगह - जगह लगने वाली सभी 24 बस्तियों की शाखाओं को एक साथ लगाने का अभिनव प्रयोग हुआ।सभी शाखाओं के मुख्य शिक्षक एवं शाखा कार्यवाह अपने ध्वज एवं सैकड़ों स्वयंसेवकों को लेकर कार्यक्रम स्थल पर एकत्रित हुए।
स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए आरएसएस के प्रांत संपर्क प्रमुख गंगा सिंह ने कहा कि आरएसएस की शाखा व्यक्ति के बौद्धिक विकास व चरित्र निर्माण की अभिनव प्रयोगशाला है, जहां स्वयंसेवकों के व्यक्तित्व निर्माण से राष्ट्र निर्माण की परिकल्पना साकार होती है। इसके साथ ही स्वयंसेवक अनुशासन सीखते हैं। बाल, तरुण, प्रौढ़ सभी वर्ग के लोग इसमें शामिल होकर आपस में सामंजस्य स्थापित करते हैं। उन्होंने कहा कि शाखा में स्वयंसेवक सामाजिक समरसता, देश की सभ्यता व संस्कृति से परिचित भी होते हैं। कहा कि शाखा में भाग लेने से व्यक्ति मानसिक व शारीरिक रूप से सबल बनता है। शाखा पर प्रतिदिन फहराए जाने वाले भगवा ध्वज को उन्होंने सनातन धर्म व संस्कृति का प्रतीक बताया।बताया कि शाखा में ध्वज फहराने के पश्चात सूर्य नमस्कार, योग, व्यायाम, खेल, देशभक्ति के गीत होते हैं जिससे लोगों में राष्ट्रप्रेम का भाव जागृत होता है।
जोर देकर कहा कि विश्वकल्याण के लिए भारत को विश्वगुरु बनाने में आरएसएस के स्वयंसेवकों की भूमिका अहम है। कहा कि संघ संस्थापक डॉ हेडगेवार की 1925 में शुरू की गई शाखा का यह शताब्दी वर्ष है। उन्होंने कहा कि 'वसुधैव कुटुंबकम्' भारत की प्राचीन सनातन संस्कृति का मूल मंत्र है, जबकि सर्वे भवन्तु सुखिनः भारत का दर्शन है। कहा भेदभाव मुक्त समरस समाज की स्थापना संघ का लक्ष्य है। उन्होंने पंच परिवर्तन के मायने समझाते हुए इसे समाज परिवर्तन के लिए अहम बताया।इस दौरान वंदे मातरम, भारत माता की जय, हर-हर बम-बम के नारों की गूंज दूर तक फैलती रही। स्वयंसेवकों ने बौद्धिक से पूर्व विभिन्न प्रकार के खेलकूद, योग, व्यायाम इत्यादि का प्रदर्शन किया।
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