मोदीकाल में वैश्विक कूटनीतिक विजय से लेकर आत्मनिर्भरता के नए कीर्तिमान तक, आधुनिक इतिहास में भारत की उपलब्धियों का संपूर्ण सफरनामा
भारतीय राजनीतिक और लोकतांत्रिक इतिहास में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कार्यकाल देश की दिशा और दशा को बदलने वाले युग के रूप
- वैश्विक मंचों पर बुलंद हुई भारत की आवाज, आर्थिक और रणनीतिक सुधारों से दुनिया भर में स्थापित हुआ देश का अभूतपूर्व रसूख
- ऐतिहासिक फैसलों और साहसिक कदमों का स्वर्णिम काल, आंतरिक सुरक्षा से लेकर अंतरिक्ष विज्ञान तक भारत ने रचे नए कीर्तिमान
भारतीय राजनीतिक और लोकतांत्रिक इतिहास में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कार्यकाल देश की दिशा और दशा को बदलने वाले युग के रूप में दर्ज हो चुका है। एक दशक से अधिक लंबे इस सफर के दौरान भारत ने न केवल अपनी आंतरिक व्यवस्थाओं में आमूलचूल परिवर्तन किए हैं, बल्कि वैश्विक पटल पर भी अपनी एक अमिट और बेहद मजबूत पहचान स्थापित की है। इस पूरे कालखंड को बड़े, कड़े और ऐतिहासिक फैसलों के युग के रूप में देखा जाता है, जिन्होंने दशकों से लंबित पड़ी समस्याओं का स्थायी समाधान तलाशने का काम किया। आंतरिक मोर्चे पर राष्ट्रीय सुरक्षा को चाक-चौबंद करने से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की बात को पूरी दुनिया से मनवाने तक, इस नेतृत्व ने देश की कूटनीतिक और रणनीतिक क्षमता को एक नए आयाम पर पहुँचाया है। इन ऐतिहासिक फैसलों और दुनिया भर में भारत की गूंजती उपलब्धियों की पूरी कहानी वास्तव में एक उभरते हुए वैश्विक महाशक्ति की गाथा है।
- जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 का खात्मा
अगस्त 2019 में लिया गया यह फैसला स्वतंत्र भारत के इतिहास के सबसे साहसिक और बड़े कदमों में से एक माना जाता है। दशकों से जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 और 35ए को निरस्त करके सरकार ने 'एक देश, एक विधान, एक प्रधान' के संकल्प को धरातल पर उतारा। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद न केवल घाटी में आतंकवाद की कमर टूटी, बल्कि वहां के नागरिकों को देश की मुख्यधारा से जोड़कर अभूतपूर्व विकास और शांति के एक नए युग की शुरुआत की गई।
इस कार्यकाल की दूसरी सबसे बड़ी ताकत वैश्विक कूटनीति के मोर्चे पर देखने को मिली है, जहां भारत अब एक मूक दर्शक या केवल अनुयायी न रहकर, वैश्विक एजेंडा तय करने वाले देश के रूप में उभरा है। नई दिल्ली में आयोजित हुआ जी-20 शिखर सम्मेलन इसका सबसे जीवंत उदाहरण माना जाता है, जहां भारत की पहल पर 'अफ्रीकी संघ' को इस प्रभावशाली समूह का स्थायी सदस्य बनाया गया। इसके साथ ही, नई दिल्ली घोषणापत्र पर सभी शक्तिशाली देशों के बीच आम सहमति बनाना भारत की बहुत बड़ी कूटनीतिक विजय थी। यूक्रेन संकट हो या वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का व्यवधान, भारत ने हमेशा 'वसुधैव कुटुंबकम' के सिद्धांत पर चलते हुए शांति और कूटनीतिक संवाद का मार्ग प्रशस्त किया है, जिसे आज अमेरिका, रूस और यूरोपीय संघ समेत पूरी दुनिया बेहद सम्मान के साथ स्वीकार कर रही है।
- वैश्विक कूटनीति और भारत का बढ़ता रसूख
जी-20 की ऐतिहासिक अध्यक्षता: नई दिल्ली शिखर सम्मेलन में 'ग्लोबल साउथ' (विकासशील देशों) की आवाज बनकर उभरा भारत।
प्रशांत महासागरीय देशों में सम्मान: पापुआ न्यू गिनी जैसी वैश्विक यात्राओं के दौरान भारतीय नेतृत्व को मिला सर्वोच्च प्रोटोकॉल।
मध्य-पूर्व यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEC): भारत को खाड़ी देशों और यूरोप से जोड़ने वाले नए व्यापारिक मार्ग की ऐतिहासिक आधारशिला।
आर्थिक और तकनीकी आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में भारत ने इस दौरान जो छलांग लगाई है, उसने दुनिया के विकसित देशों को भी अचंभित कर दिया है। 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' जैसे अभियानों के माध्यम से देश आज मोबाइल निर्माण, रक्षा उपकरणों और सेमीकंडक्टर जैसे जटिल क्षेत्रों में एक वैश्विक हब बनने की ओर अग्रसर है। तकनीकी मोर्चे पर भारत का डिजिटल इंडिया अभियान और विशेष रूप से यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) आज दुनिया भर के लिए एक केस स्टडी बन चुका है। फ्रांस, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात और श्रीलंका जैसे कई देशों ने भारत के इस डिजिटल भुगतान तंत्र को अपने यहां स्वीकार किया है, जो यह साबित करता है कि भारत अब तकनीक का केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर उसका निर्माता और मार्गदर्शक बन चुका है।
- अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण
सदियों पुराने सांस्कृतिक और कानूनी विवाद का पूरी तरह से शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से समाधान निकालना इस कालखंड की एक महान उपलब्धि है। जनवरी 2024 में अयोध्या में नवनिर्मित भव्य राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा ने न केवल देश के सांस्कृतिक पुनरुत्थान को गति दी, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारतीय विरासत के गौरव को पुनर्स्थापित किया। यह फैसला देश की न्यायिक प्रणाली की ताकत और समाज की परिपक्वता का एक अनुपम उदाहरण बनकर सामने आया।
रक्षा और अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भी भारत ने दुनिया के सामने अपनी शक्ति का लोहा मनवाया है। रक्षा क्षेत्र में रक्षा निर्यात के मामले में भारत आज रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच चुका है और ब्रह्मोस मिसाइल से लेकर तेजस लड़ाकू विमानों की मांग दुनिया भर में बढ़ रही है। वहीं दूसरी ओर, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने 'चंद्रयान-3' को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफलतापूर्वक लैंड कराकर इतिहास रच दिया। भारत ऐसा करने वाला दुनिया का पहला देश बना, जिसने बेहद कम लागत में इस जटिल वैज्ञानिक मिशन को पूरा करके वैश्विक अंतरिक्ष दौड़ में अपनी तकनीकी संप्रभुता को पूरी तरह से सिद्ध कर दिया। इसके तुरंत बाद सूर्य का अध्ययन करने के लिए भेजे गए 'आदित्य-एल1' मिशन ने भारत की इस वैज्ञानिक विकास यात्रा में एक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया।
- अंतरिक्ष विज्ञान और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता
चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक सफलता: चंद्रमा के दुर्गम दक्षिणी ध्रुव पर तिरंगा फहराने वाला दुनिया का पहला देश बना भारत।
रक्षा निर्यात में भारी उछाल: फिलीपींस जैसे देशों को ब्रह्मोस मिसाइल का निर्यात कर भारत बना बड़ा डिफेंस एक्सपोर्टर।
वैक्सीन मैत्री अभियान: कोरोना महामारी के दौरान दुनिया के 100 से अधिक देशों को मुफ्त और सस्ती वैक्सीन पहुँचाकर 'वैश्विक मसीहा' की भूमिका निभाई।
वैश्विक आपदाओं और संकट के समय भारत की 'फर्स्ट रिस्पॉन्डर' यानी सबसे पहले मदद पहुँचाने वाले देश की भूमिका ने दुनिया भर में देश की साख को एक नया आसमान दिया है। कोरोना महामारी के दौरान जब दुनिया के अमीर देश अपनी स्वार्थपूर्ण नीतियों में व्यस्त थे, तब भारत ने 'वैक्सीन मैत्री' अभियान के तहत दुनिया के 100 से अधिक गरीब और विकासशील देशों को करोड़ों की संख्या में जीवन रक्षक स्वदेशी वैक्सीन की आपूर्ति की। इसके अलावा, युद्धग्रस्त क्षेत्रों जैसे यूक्रेन, सूडान और यमन से न केवल अपने नागरिकों को बल्कि सैकड़ों विदेशी नागरिकों को भी सुरक्षित बाहर निकालने के भारत के 'ऑपरेशन गंगा' और 'ऑपरेशन कावेरी' जैसे साहसिक अभियानों ने भारतीय सेना और कूटनीति की अद्वितीय क्षमता को पूरी दुनिया के सामने प्रदर्शित किया है।
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