Deoband News: दारुल उलूम फारुकिया में सुधारात्मक कार्यक्रम, समय की पाबंदी और सुन्नत पर चलने का संदेश
Deoband News: देवबंद के दारुल उलूम फारुकिया में आयोजित कार्यक्रम में मौलाना सिकंदर ने छात्रों को सुन्नत के पालन, समय की पाबंदी और अनुशासन का पाठ पढ़ाया।
सहारनपुर जिले के देवबंद स्थित ईदगाह मार्ग पर संचालित दारुल उलूम फारुकिया में एक सुधारात्मक और शिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा, अनुशासन और नैतिक मूल्यों के प्रति जागरूक करना था। इस दौरान धर्मगुरुओं ने छात्रों को लगन और मेहनत से तालीम हासिल करने के साथ-साथ अपने आचरण को बेहतर बनाने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम में विचार रखते हुए मौलाना सिकंदर ने कहा कि धार्मिक शिक्षा प्राप्त करने का असल मकसद अपने चरित्र और व्यवहार को सुधारना है। विद्या का सही लाभ तभी मिलता है जब उसका जीवन में पालन किया जाए और आचरण में सादगी लाई जाए। उन्होंने विद्यार्थियों को समय का महत्व बताते हुए कहा कि वक्त ही किसी छात्र की सबसे बड़ी जमापूंजी है। जो विद्यार्थी अपना कीमती समय व्यर्थ के कामों में गंवा देते हैं, वे शिक्षा के वास्तविक लाभ से वंचित रह जाते हैं। सफलता की बुनियाद कड़ी मेहनत, अनुशासन और निरंतर अध्ययन पर ही टिकी होती है।
संस्था के प्रमुख मौलाना नूरुलहुदा कासमी ने देवबंद के वरिष्ठ धर्मगुरुओं के जीवन के संस्मरण साझा किए। उन्होंने बताया कि पूर्व के महापुरुषों ने सुन्नत के पालन, समय के सही उपयोग और लगातार अध्ययन के बूते समाज और धर्म की निस्वार्थ सेवा की। उन्होंने विद्यार्थियों से बुजुर्गों के जीवन से सीख लेकर आगे बढ़ने का आह्वान किया। कार्यक्रम के समापन पर मौलाना सिकंदर ने देश में शांति, सौहार्द, संस्था की उन्नति और विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रार्थना कराई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में छात्र और शिक्षक उपस्थित रहे।
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