Naimisharanya News: नैमिषारण्य में गहरी नाली में फंसी बेसहारा गाय, गुरुकुल के छात्रों ने 4 घंटे बाद सकुशल निकाला बाहर

सीतापुर के नैमिषारण्य में बाईपास पर नाली में फंसी बेसहारा गाय को वेद-वेदांग गुरुकुल के छात्रों ने रेस्क्यू कर सकुशल बाहर निकाला। 4 घंटे तक मौके पर नहीं पहुंची थी मदद।

By INA News Desk
Sep 18, 2026 - 23:48
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Naimisharanya News: नैमिषारण्य में गहरी नाली में फंसी बेसहारा गाय, गुरुकुल के छात्रों ने 4 घंटे बाद सकुशल निकाला बाहर
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रिपोर्ट:-सुरेंद्र मोठी INA News, संवाददाता नैमिषारण्य

नैमिषारण्य (सीतापुर)। धार्मिक और पौराणिक महत्व की तपोस्थली नैमिषारण्य में सीतापुर-लखनऊ लिंक बाईपास मार्ग पर गुरुवार की शाम एक बेसहारा गाय गहरी नाली में गिरकर बेसुध हो गई। शाम लगभग 5:30 बजे हुई इस घटना के बाद गोवंश कई घंटों तक नाली के गंदे पानी और कीचड़ में फंसा रहा। रात करीब 9:30 बजे राहगीरों और स्थानीय प्रबुद्धजनों के हस्तक्षेप के बाद वेद-वेदांग संस्कृत गुरुकुल और पहला आश्रम के विद्यार्थी मौके पर पहुंचे और कड़ी मशक्कत के बाद गाय को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गुरुवार शाम लगभग 5:30 बजे राहगीरों ने बाईपास मार्ग के किनारे बनी गहरी नाली में एक गोवंश को फंसा देखा। नाली गहरी और संकरी होने के कारण पशु अपने दम पर बाहर निकलने में असमर्थ था। काफी देर तक तड़पने के बाद वह बेसुध होकर वहीं कीचड़ में पड़ा रहा। इस दौरान आसपास से गुजरने वाले लोगों ने स्थानीय स्तर पर संबंधित सेवा तंत्र को सूचना देने की बात कही, लेकिन लगभग चार घंटे बीत जाने के बावजूद रात 9 बजे तक मौके पर कोई राहत दल या रेस्क्यू टीम नहीं पहुंच सकी।

राहगीरों की पहल और सोशल मीडिया से बना संपर्क सेतु

रात करीब 9:30 बजे बाईपास मार्ग से मोटरसाइकिल से गुजर रहे राम भैया और विशाल पांडेय की नजर नाली में पड़े असहाय गोवंश पर पड़ी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए दोनों युवकों ने मौके पर वाहन रोका और मामले की जानकारी स्थानीय स्तर पर साझा करनी शुरू की।

उन्होंने नैमिषारण्य के स्थानीय वॉट्सऐप समूहों के जरिए घटना की सूचना और तस्वीरें प्रसारित कीं। इसके बाद कथावक्ता सुरेश दास अवस्थी, सतीश यादव तथा स्थानीय समाजसेवी व वरिष्ठ पत्रकार प्रकाशचंद्र पांडेय (प्राचू पाण्डेय) ने सक्रियता दिखाते हुए रेस्क्यू के लिए युवाओं से संपर्क साधा। सूचना पाकर पास ही स्थित वेद-वेदांग संस्कृत गुरुकुल एवं पहला आश्रम में अध्ययनरत विद्यार्थी बिना किसी देरी के राहत कार्य के लिए घटनास्थल की ओर रवाना हो गए।

गुरुकुल के छात्रों ने नाली में उतरकर किया रेस्क्यू

घटनास्थल पर पहुंचे गुरुकुल के विद्यार्थियों ने टॉर्च और मोबाइल की रोशनी के सहारे रेस्क्यू अभियान शुरू किया। नाली गहरी और दलदली होने के कारण गोवंश को बाहर खींचना एक कठिन काम था। छात्रों ने पहले पशु के मुंह और नाक को कीचड़ से साफ किया ताकि वह सांस ले सके।

इसके बाद छात्रों ने रस्सियों और कपड़ों के सहारे गोवंश के शरीर को संतुलित किया और एक साथ जोर लगाकर उसे नाली के बाहर सुरक्षित स्थान पर निकाला। बाहर निकाले जाने के बाद गाय को प्राथमिक सहारा दिया गया और पानी पिलाया गया। लगभग आधे घंटे के निरंतर प्रयास के बाद गोवंश उठने की स्थिति में आ सका। रात के समय विद्यार्थियों द्वारा दिखाई गई इस तत्परता और संवेदनशीलता की मौके पर एकत्र नागरिकों ने सराहना की।

रेस्क्यू तंत्र और जमीनी निगरानी पर स्थानीय लोगों ने उठाए सवाल

इस घटना ने तीर्थ क्षेत्र में बेसहारा गोवंश के संरक्षण और आपातकालीन रेस्क्यू व्यवस्था के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नैमिषारण्य जैसे प्रतिष्ठित तीर्थ स्थल में रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आवागमन होता है। मुख्य मार्गों और बाईपास के किनारे खुली या टूटी नालियां न केवल पशुओं के लिए बल्कि राहगीरों के लिए भी दुर्घटना का कारण बन रही हैं।

क्षेत्रीय लोगों ने चिंता जताई कि शाम 5:30 बजे से लेकर रात 9 बजे तक एक असहाय पशु खुले मार्ग पर तड़पता रहा, लेकिन कोई आधिकारिक रेस्क्यू व्यवस्था मौके पर सक्रिय नहीं दिखी। यदि गुरुकुल के विद्यार्थी समय रहते आगे न आते तो पशु की दम घुटने या ठंड के कारण जान भी जा सकती थी।

नागरिकों ने स्थानीय प्रशासन और नगर पालिका परिषद से मांग की है कि बाईपास और संपर्क मार्गों पर खुली नालियों को ढंकने का कार्य प्राथमिकता पर कराया जाए। इसके साथ ही एक ऐसी आपातकालीन हेल्पलाइन या सचल दस्ता (मोबाइल स्क्वाड) सक्रिय किया जाए जो दुर्घटनाग्रस्त या बीमार बेसहारा पशुओं की सूचना मिलते ही बिना विलंब के मौके पर पहुंचकर प्राथमिक उपचार और राहत उपलब्ध करा सके।

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