Lucknow News: जन भवन परिसर में 'गंगासागर नमो नमः' परियोजना का लोकार्पण, राज्यपाल और सीएम योगी ने की आरती

लखनऊ स्थित जन भवन में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और सीएम योगी आदित्यनाथ ने 'गंगासागर नमो नमः' परियोजना का लोकार्पण किया। यहां एक परिसर में गंगोत्री से गंगासागर तक का दर्शन होगा।

By INA News Desk
Sep 17, 2026 - 23:51
37 Views
Lucknow News: जन भवन परिसर में 'गंगासागर नमो नमः' परियोजना का लोकार्पण, राज्यपाल और सीएम योगी ने की आरती
Advertisement
Advertisement

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित जन भवन परिसर में सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और आधुनिक स्थापत्य कला के संगम का नया अध्याय जुड़ गया है।

उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संयुक्त रूप से जन भवन परिसर में नवनिर्मित ‘गंगासागर नमो नमः’ परियोजना का विधिवत लोकार्पण किया।

यह महत्वाकांक्षी परियोजना पतित पावनी मां गंगा के उद्गम स्थल से लेकर सागर संगम तक की ऐतिहासिक और पावन यात्रा को एक ही परिसर में जीवंत रूप में प्रस्तुत करती है।

लोकार्पण समारोह के पश्चात राज्यपाल, मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने परियोजना परिसर का सघन भ्रमण किया।

इस दौरान शीर्ष नेतृत्व ने निर्माण कार्य की तकनीकी बारीकियों, कलात्मक शिल्पकला और इसके सांस्कृतिक महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की।

इसके बाद राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री ने परिसर में स्थापित विशेष ‘शिव डमरू फाउंटेन’ के समीप बने भव्य आरती स्थल पर पूर्ण विधि-विधान के साथ गंगासागर में पवित्र गंगाजल अर्पित किया और मां गंगा की महाआरती उतारी।

बालिकाओं ने बांधी राखी, भजनों से गूंजा परिसर

इस गरिमामयी अवसर पर सामाजिक समरसता और आत्मीयता का भाव भी देखने को मिला।

कार्यक्रम के औपचारिक शुभारंभ से पहले राजकीय बाल गृह (बालिका) सिंधी खेड़ा की संवासिनी बालिकाओं ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक को रक्षासूत्र (राखी) बांधकर उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया। इस स्नेहपूर्ण क्षण ने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया।

इसके उपरांत आदर्श माध्यमिक विद्यालय (जन भवन विद्यालय) के छात्र-छात्राओं तथा राजकीय बाल गृह (बालिका) सिंधी खेड़ा की कन्याओं ने भगवान शिव और मां गंगा की स्तुति पर आधारित भक्ति गीतों की सुमधुर प्रस्तुतियां दीं। बच्चों के शास्त्रीय गायन और सामूहिक भजनों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

मुख्यमंत्री और राज्यपाल ने बच्चों की कला और प्रस्तुति की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया।

गंगोत्री से गंगासागर तक की संपूर्ण पावन यात्रा

‘गंगासागर नमो नमः’ परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका अनूठा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से तैयार किया गया आध्यात्मिक ले-आउट है।

यह परियोजना किसी भी श्रद्धालु अथवा आगंतुक को एक ही स्थान पर हिमालय की चोटियों से लेकर बंगाल की खाड़ी तक की समग्र यात्रा का अनुभव कराती है।

परियोजना की शुरुआत देवाधिदेव महादेव के पावन वास कैलाश पर्वत और मानसरोवर के प्रतीकात्मक दृश्य से होती है। इसके पश्चात मां गंगा और यमुना के उद्गम गंगोत्री एवं यमुनोत्री धाम, उत्तराखंड के प्रसिद्ध तीर्थ केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम के प्रतिरूपों को स्थापित किया गया है।

यात्रा पथ आगे बढ़ते हुए उत्तर प्रदेश के हृदय स्थल प्रयागराज के त्रिवेणी संगम और मोक्ष नगरी काशी (वाराणसी) के विश्वविख्यात पक्के घाटों से होकर गुजरता है और अंत में पश्चिम बंगाल स्थित गंगासागर संगम पर जाकर पूर्ण होता है।

प्रयागराज का संगम और काशी के घाट बने मुख्य आकर्षण

उत्तर प्रदेश के आध्यात्मिक वैभव को प्रदर्शित करने के लिए परियोजना के भीतर प्रयागराज के त्रिवेणी संगम और काशी के मणिकर्णिका व दशाश्वमेध घाटों के स्थापत्य को विशेष प्राथमिकता और प्रमुखता के साथ उकेरा गया है। प्रयागराज और काशी राज्य की सनातन और सांस्कृतिक अस्मिता के दो प्रमुख आधार स्तंभ हैं।

परियोजना में प्रवाहित होने वाले जलमार्ग, घाटों की सीढ़ियों, प्राचीन छतरियों और मंदिरों के मॉडल को अत्यंत बारीकी से तराशा गया है। परिसर का भ्रमण करने पर आगंतुकों को ऐसा प्रतीत होता है मानो वे साक्षात काशी के अर्धचंद्राकार घाटों पर गंगा की लहरों को निहार रहे हों अथवा प्रयागराज में गंगा-यमुना-सरस्वती के संगम की पावन धारा के साक्षी बन रहे हों।

आधुनिक तकनीक, प्रकाश और ध्वनि का अद्भुत संयोजन

‘गंगासागर नमो नमः’ परियोजना केवल एक मूर्तिकला का ढांचा नहीं है, बल्कि इसमें आधुनिकतम मल्टीमीडिया और सिविल इंजीनियरिंग का प्रयोग किया गया है।

परियोजना स्थल पर जल संचलन, कलात्मक फव्वारे, डायनेमिक लाइटिंग (प्रकाश व्यवस्था) और सराउंड साउंड सिस्टम का ऐसा समन्वय किया गया है, जो शाम के समय अत्यंत नयनाभिराम दृश्य उत्पन्न करता है।

शिव डमरू फाउंटेन से निरंतर गिरती जलधारा और पृष्ठभूमि में गूंजती गंगा आरती की स्वर लहरियां आगंतुकों को मानसिक शांति और आध्यात्मिक दिव्यता की अनुभूति कराती हैं। पर्यावरण संतुलन को ध्यान में रखते हुए यहां वाटर रीसाइक्लिंग (जल पुनर्चक्रण) प्रणाली लगाई गई है, जिससे जल की बर्बादी न हो और प्रवाह निरंतर बना रहे।

उच्चाधिकारियों और गणमान्य नागरिकों की रही उपस्थिति

राजधानी में आयोजित इस विशिष्ट सांस्कृतिक लोकार्पण समारोह में उत्तर प्रदेश शासन, प्रशासनिक सेवा और पुलिस महकमे के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इसके अलावा कला, साहित्य और समाज सेवा के क्षेत्र से जुड़े प्रबुद्ध नागरिकों ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।

आगंतुकों ने एक स्वर में इस बात पर बल दिया कि इस प्रकार की परियोजनाएं नई पीढ़ी को भारत की समृद्ध जल संस्कृति, नदियों के संरक्षण के संकल्प और सनातन विरासत के वैज्ञानिक महत्व से जोड़ने में अत्यंत प्रभावी भूमिका निभाएंगी।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

Advertisement
Advertisement