UP Social Welfare: प्रदेश के वृद्धाश्रमों में 4,901 बुजुर्गों को पेंशन और 2,551 को मिला आयुष्मान भारत का कवच

उत्तर प्रदेश के 75 वृद्धाश्रमों में रह रहे बुजुर्गों को पेंशन और आयुष्मान भारत योजना से जोड़ा गया है। 4,901 संवासियों को पेंशन और 2,551 को आयुष्मान कार्ड मिले हैं।

By INA News Desk
Sep 17, 2026 - 23:38
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UP Social Welfare: प्रदेश के वृद्धाश्रमों में 4,901 बुजुर्गों को पेंशन और 2,551 को मिला आयुष्मान भारत का कवच

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित वृद्धाश्रमों में रह रहे वृद्धजनों को केवल सुरक्षित आश्रय देने तक सीमित न रखकर उन्हें उनके संवैधानिक अधिकारों, वित्तीय आत्मनिर्भरता और व्यापक स्वास्थ्य सुरक्षा से जोड़ने के लिए सघन अभियान चलाया जा रहा है। ‘आश्रय से आगे, अधिकार तक’ की नीति पर काम करते हुए राज्य सरकार ने प्रदेशभर के वृद्धाश्रमों में निवासरत 4,901 पात्र संवासियों को वृद्धावस्था पेंशन योजना से आच्छादित किया है। इसके साथ ही, वृद्धावस्था में गंभीर बीमारियों के इलाज के वित्तीय संकट से उबारने के लिए 2,551 पात्र बुजुर्गों के आयुष्मान कार्ड बनाकर उन्हें नि:शुल्क चिकित्सा सुरक्षा का मजबूत सुरक्षा चक्र प्रदान किया गया है।

विभाग का स्पष्ट मानना है कि किसी भी संवेदनशील समाज और सरकार की पहचान इस बात से होती है कि वह अपने वरिष्ठ नागरिकों और जीवन के अंतिम पड़ाव पर असहाय महसूस कर रहे लोगों के साथ किस आत्मीयता से खड़ी होती है। इसी क्रम में आश्रमों में रहने वाले संवासियों के दैनिक जीवन को गरिमामय बनाने के लिए आधार प्रमाणीकरण से लेकर बैंक खाते खुलवाने और पेंशन स्वीकृति की समस्त प्रशासनिक औपचारिकताओं को आश्रम परिसर में ही कैंप लगाकर पूरा कराया जा रहा है।

सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन सुनिश्चित करना प्राथमिकता: असीम अरुण

वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण और योजनाओं की समीक्षा करते हुए समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने विभागीय प्राथमिकताओं को रेखांकित किया। उन्होंने अपने आधिकारिक वक्तव्य में कहा कि वृद्धजनों को सम्मानजनक, सुरक्षित और स्वावलंबी जीवन सुनिश्चित करना प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। आश्रमों में रह रहे वृद्धजन केवल आश्रय के हकदार नहीं हैं, बल्कि उन्हें हर उस सामाजिक सुरक्षा योजना का सीधा लाभ मिलना चाहिए, जिसके वे पात्र हैं।

राज्यमंत्री ने कहा कि विभाग का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र बुजुर्ग केवल प्रशासनिक जटिलताओं या पहचान दस्तावेजों के अभाव में अपने अधिकारों से वंचित न रहे। इसी उद्देश्य से वृद्धावस्था पेंशन, निराश्रित महिला पेंशन और आयुष्मान भारत जैसी महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी योजनाओं को वृद्धाश्रमों के भीतर अनिवार्य रूप से लागू किया गया है। जब एक बुजुर्ग के हाथ में नियमित पेंशन की राशि पहुंचती है और उसके पास इलाज के लिए आयुष्मान कार्ड होता है, तो उसके भीतर आत्मविश्वास और सुरक्षा का भाव जागृत होता है।

75 जिलों में संचालित आश्रमों की स्थिति और आंकड़े

विभागीय कार्यप्रणाली और योजनाओं के क्रियान्वयन का विस्तृत ब्योरा देते हुए समाज कल्याण विभाग के उपनिदेशक एवं योजनाधिकारी आर. पी. सिंह ने प्रशासनिक स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश के सभी 75 जनपदों में समाज कल्याण विभाग की निगरानी में कुल 75 वृद्धाश्रम संचालित किए जा रहे हैं। इन आश्रमों में कुल 6,607 वरिष्ठ नागरिक निवासरत हैं।

योजनाधिकारी ने बताया कि इन 6,607 संवासियों में से आवश्यक पात्रता मानकों को पूरा करने वाले 4,901 वृद्धजनों को वृद्धावस्था पेंशन योजना से जोड़ा जा चुका है। पेंशन की राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिए भेजी जा रही है। वहीं, आश्रमों में रह रहीं पात्र एकल और निराश्रित महिलाओं को महिला कल्याण विभाग के समन्वय से निराश्रित महिला पेंशन योजना (विधवा पेंशन) का लाभ भी दिलाया जा रहा है, ताकि किसी भी श्रेणी की पात्र महिला आर्थिक संबल से वंचित न रहे।

2,551 बुजुर्गों को मिला ₹5 लाख तक के इलाज का संबल

उम्र के बढ़ने के साथ वरिष्ठ नागरिकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की आती है। विशेष रूप से मोतियाबिंद, जोड़ों का दर्द, हृदय रोग, गुर्दे की समस्या और उच्च रक्तचाप जैसी पुरानी बीमारियों के इलाज का खर्च उठाना निराश्रित बुजुर्गों के लिए संभव नहीं होता। इस जमीनी हकीकत को ध्यान में रखते हुए विभाग ने स्वास्थ्य विभाग से समन्वय स्थापित कर आश्रमों में विशेष पंजीकरण अभियान चलाया।

अब तक पात्रता श्रेणी में आने वाले 2,551 बुजुर्गों के आयुष्मान कार्ड तैयार किए जा चुके हैं। आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) के अंतर्गत पंजीकृत होने के बाद अब इन बुजुर्गों को प्रतिवर्ष ₹5 लाख तक का कैशलेस इलाज सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में पूरी तरह नि:शुल्क मिल रहा है। आश्रम प्रशासन को यह भी निर्देशित किया गया है कि यदि किसी संवासी को आकस्मिक चिकित्सा की आवश्यकता होती है, तो उसे तत्काल एंबुलेंस सहायता और पैनलबद्ध अस्पताल तक पहुंचाने की जिम्मेदारी आश्रम प्रबंधन की होगी।

दो वित्तीय वर्षों में 1,073 नए संवासी मुख्यधारा से जुड़े

विभागीय आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो वित्तीय वर्षों 2025-26 एवं 2026-27 के दौरान योजनाओं के संतृप्ति (सैचुरेशन) स्तर को हासिल करने के लिए विशेष गति दी गई। इस अवधि में कुल 1,073 नए वृद्धजनों को चिन्हित कर विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की सूची में शामिल किया गया।

प्रशासनिक स्तर पर सामने आया था कि कई वृद्धजनों के पास पहचान पत्र या आधार कार्ड उपलब्ध नहीं थे, जिसके कारण उनके पेंशन आवेदन स्वीकृत नहीं हो पा रहे थे। इसके समाधान के लिए विभाग ने विशेष दिशा-निर्देश जारी करते हुए यूआईडीएआई (UIDAI) की मोबाइल वैन और स्थानीय प्रशासनिक टीमों को सीधे वृद्धाश्रमों में भेजा। मौके पर ही बुजुर्गों के बायोमेट्रिक अपडेट और नए आधार कार्ड बनवाने की व्यवस्था की गई, जिसके बाद उनके बैंक खाते खुलवाकर पेंशन और आयुष्मान योजनाओं की औपचारिकताएं पूरी कराई गईं।

नियमित स्वास्थ्य जांच और बेहतर रहन-सहन पर बल

आर्थिक और चिकित्सीय सहायता के अलावा समाज कल्याण विभाग वृद्धाश्रमों के बुनियादी ढांचे और दैनिक जीवन स्तर में सुधार पर भी निरंतर निगरानी रख रहा है। सभी 75 आश्रमों में नियमित साप्ताहिक स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित करने के निर्देश मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (CMO) को दिए गए हैं। डॉक्टरों की टीम आश्रमों में जाकर संवासियों की बीपी, शुगर, नेत्र और सामान्य स्वास्थ्य जांच करती है तथा आवश्यक दवाएं निःशुल्क उपलब्ध कराती है।

इसके साथ ही आश्रम परिसरों में पौष्टिक भोजन, स्वच्छ पेयजल, मनोरंजन के लिए टीवी व पुस्तकालय, और योग व ध्यान के सत्रों का भी आयोजन किया जा रहा है। शासन की मंशा यह है कि आश्रमों का वातावरण उपेक्षा का केंद्र न बनकर एक पारिवारिक और आत्मीय आश्रय स्थल के रूप में विकसित हो, जहां बुजुर्ग अपने जीवन के सुनहरे वर्ष गरिमा और मानसिक शांति के साथ व्यतीत कर सकें।

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