UP Care Economy Roadmap: उत्तर प्रदेश में केयर इकोनॉमी से खुलेंगे रोजगार के नए रास्ते, 12 विभाग मिलकर तैयार कर रहे खाका

उत्तर प्रदेश में केयर इकोनॉमी को संगठित सेवा क्षेत्र बनाकर रोजगार और महिला सशक्तीकरण का माध्यम तैयार किया जा रहा है। 12 सरकारी विभाग मिलकर बना रहे हैं व्यापक रोडमैप।

By INA News Desk
Sep 15, 2026 - 00:38
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UP Care Economy Roadmap: उत्तर प्रदेश में केयर इकोनॉमी से खुलेंगे रोजगार के नए रास्ते, 12 विभाग मिलकर तैयार कर रहे खाका
  • योगी सरकार का नया विजन: बुजुर्गों, बच्चों और दिव्यांगों की देखभाल बनेगी संगठित आजीविका का साधन, राज्य परामर्श कार्यशाला आयोजित
  • Care Economy in UP: केयरगिवर्स को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण और प्रमाणन, महिलाओं के स्वरोजगार पर मुख्य फोकस
  • समाज कल्याण विभाग की पहल: पीपीपी मॉडल और सीएसआर से सशक्त होगी केयर इकोनॉमी, मंत्री असीम अरुण ने बताए चार मुख्य आधार

उत्तर प्रदेश में बच्चों, बुजुर्गों, दिव्यांगजनों और गंभीर रूप से अस्वस्थ नागरिकों की देखभाल को अब केवल पारिवारिक जिम्मेदारी तक सीमित न रखकर एक संगठित सेवा क्षेत्र (ऑर्गनाइज्ड सर्विस सेक्टर) के रूप में विकसित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। राज्य सरकार ने ‘केयर इकोनॉमी’ (देखभाल अर्थव्यवस्था) को रोजगार सृजन, महिला सशक्तीकरण और समावेशी सामाजिक सुरक्षा का नया मुख्य आधार बनाने की दिशा में रणनीतिक कदम उठाया है। इसी उद्देश्य से लखनऊ के गोमती नगर स्थित भागीदारी भवन में समाज कल्याण विभाग के संयोजन में एक उच्चस्तरीय राज्य परामर्श कार्यशाला आयोजित की गई, जिसका विषय ‘सतत केयर इकोनॉमी का निर्माण: देखभाल कार्य को पहचान, महिलाओं को सशक्तीकरण और समावेशी आजीविका के अवसर’ रहा।

इस कार्यशाला का प्राथमिक उद्देश्य विभिन्न विभागों के बीच सामंजस्य स्थापित करके एक समग्र ‘राज्य केयर अर्थव्यवस्था रोडमैप’ तैयार करना है। पारंपरिक रूप से घरों के भीतर किए जाने वाले अवैतनिक अथवा अनौपचारिक देखभाल कार्यों को आर्थिक मूल्यांकन के दायरे में लाना और कुशल केयरगिवर्स का एक प्रमाणित तंत्र खड़ा करना इस नीति की मुख्य रीढ़ है। सरकार का आकलन है कि जनसंख्या संरचना में आ रहे बदलावों और एकल परिवारों के बढ़ते चलन के बीच आने वाले वर्षों में पेशेवर देखभाल सेवाओं की मांग में भारी इजाफा होना तय है।

नीतिगत दृष्टि: 12 विभागों का संयुक्त समन्वय

केयर इकोनॉमी की अवधारणा को धरातल पर उतारने के लिए राज्य सरकार के 12 महत्वपूर्ण विभागों को एक मंच पर लाया गया है। इनमें समाज कल्याण विभाग के अतिरिक्त स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, महिला एवं बाल विकास, श्रम एवं सेवायोजन, कौशल विकास और व्यावसायिक शिक्षा, दिव्यांगजन सशक्तीकरण तथा वित्त विभाग प्रमुख हैं।

कार्यशाला के दौरान यह रेखांकित किया गया कि बिखरे हुए प्रयासों के स्थान पर जब 12 विभाग अपने बजट, नीतियों और मौजूदा योजनाओं को एक साथ जोड़ेंगे, तो देखभाल के क्षेत्र में एक मजबूत इकोसिस्टम बनेगा। उदाहरण के लिए, कौशल विकास विभाग जहां केयरगिवर्स के लिए मानकीकृत पाठ्यक्रम और प्रमाणन तैयार करेगा, वहीं स्वास्थ्य विभाग प्राथमिक चिकित्सा व पैरामेडिकल कौशल प्रदान करने में तकनीकी सहयोग देगा। श्रम विभाग न्यूनतम मजदूरी और कार्यस्थल सुरक्षा की शर्तें तय करेगा, जबकि समाज कल्याण और महिला कल्याण विभाग लक्षित लाभार्थियों तक सेवाओं की सुलभता सुनिश्चित करेंगे।

कार्यशाला में मंथन: केयर इकोनॉमी के चार मुख्य स्तंभ

राज्यस्तरीय परामर्श सत्र में केयर इकोनॉमी के व्यापक विस्तार के लिए चार प्रमुख स्तंभों पर विस्तृत चर्चा की गई:

  1. अनौपचारिक कार्य की आर्थिक पहचान: घरों में महिलाओं द्वारा किए जाने वाले घरेलू देखभाल कार्यों का व्यवस्थित मूल्यांकन करना और इसे औपचारिक अर्थव्यवस्था में उत्पादक कार्य के रूप में स्वीकृति देना।

  2. रोजगार और स्वरोजगार के द्वार: ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की महिलाओं को देखभाल सेवाओं से जोड़कर उन्हें स्वतंत्र आजीविका के नए साधन उपलब्ध कराना, जिससे महिला श्रम भागीदारी दर में वृद्धि हो सके।

  3. मानक प्रशिक्षण और प्रमाणन: केयरगिवर्स के लिए वैज्ञानिक प्रशिक्षण मॉड्यूल, डिजिटल पंजीकरण और राज्यस्तरीय प्रमाणन व्यवस्था लागू करना, ताकि सेवाएं लेने वाले परिवारों को कुशल और विश्वसनीय कर्मी मिल सकें।

  4. दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता: सेवाओं को वित्तीय रूप से टिकाऊ बनाने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी मॉडल), स्वास्थ्य बीमा योजनाओं में देखभाल सेवाओं का समावेश और कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) फंड का रणनीतिक उपयोग सुनिश्चित करना।

मंत्री असीम अरुण का संबोधन: सामाजिक सुरक्षा और रोजगार का संगम

कार्यशाला को संबोधित करते हुए समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश तेजी से आर्थिक सुधारों और सामाजिक सुरक्षा को एक साथ आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि केयर इकोनॉमी राज्य में बुजुर्गों, वंचितों और दिव्यांगजनों के गरिमापूर्ण जीवन को सुनिश्चित करने के साथ-साथ युवाओं के लिए सम्मानजनक रोजगार का बड़ा अवसर लेकर आएगी।

मंत्री ने स्पष्ट किया कि डिजिटल तकनीक, प्रमाणन और पारदर्शी डेटाबेस के उपयोग से देखभाल सेवाओं में लगे श्रमिकों को औपचारिक पहचान मिलेगी। इससे न केवल उनके शोषण पर रोक लगेगी, बल्कि उन्हें सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और भविष्य निधि जैसी सुविधाओं से जोड़ना भी संभव हो सकेगा। उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला केवल विचार-विमर्श तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसके निष्कर्षों के आधार पर सरकार एक व्यावहारिक नीति और समयबद्ध एक्शन प्लान तैयार करेगी।

विभागीय अधिकारियों का दृष्टिकोण: गुणवत्तापूर्ण सेवाओं का निर्माण

समाज कल्याण विभाग के निदेशक संजीव सिंह ने सत्र के दौरान बताया कि प्रदेश में बढ़ती उम्रदराज आबादी और कार्यशील दंपतियों की संख्या को देखते हुए पेशेवर केयरगिवर्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। यदि इस क्षेत्र को असंगठित छोड़ दिया जाए, तो इससे सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित होती है और कामगारों को उचित पारिश्रमिक नहीं मिल पाता। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि राज्यस्तरीय प्रशिक्षण और प्रमाणन व्यवस्था लागू होने से सेवा प्रदाताओं की विश्वसनीयता बढ़ेगी, जिससे युवाओं के लिए यह एक दीर्घकालिक करियर विकल्प बनेगा।

कार्यक्रम में यूपी सिडको के चेयरमैन वाई.पी. सिंह, महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव मनीषा त्रिघाटिया, राज्य अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष बैजनाथ रावत, अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम के उपाध्यक्ष विश्वनाथ, प्रमुख सचिव समाज कल्याण अनुराग यादव सहित विभिन्न विभागों के नीति निर्धारकों और विषय विशेषज्ञों ने अपने सुझाव प्रस्तुत किए।

आगामी हफ्तों में संबंधित 12 विभागों की एक संयुक्त कार्यसमिति इन सुझावों को संकलित कर अंतिम नीतिगत प्रारूप शासन के समक्ष प्रस्तुत करेगी, जिसे कैबिनेट की मंजूरी के बाद प्रदेश भर में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।

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