सहारनपुर में फर्जी रॉयल्टी और ISTP से अवैध खनन का बड़ा खेल, अनजाने में वाहन स्वामियों के नंबरों का दुरुपयोग
सहारनपुर में फर्जी आईडी और रॉयल्टी के जरिए आरबीएम की अवैध आईएसटीपी जारी करने का मामला। वाहन स्वामियों के नंबरों का गलत इस्तेमाल, स्टोन क्रेशर पर भी संदेह।
सहारनपुर में उपखनिज (आरबीएम) के अवैध परिवहन और राजस्व को चपत लगाने के लिए डिजिटल प्रणाली में सेंधमारी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश के फर्जी प्रपत्रों और अनधिकृत रवन्ना नंबरों के सहारे मनजीत सिंह और विकास नाम की संदिग्ध आईडी से सहारनपुर के गंतव्य पते पर धड़ल्ले से इंटर-स्टेट ट्रांजिट पास (आईएसटीपी) तैयार किए जा रहे हैं। बिना किसी वैध रॉयल्टी भुगतान के बड़े पैमाने पर जारी हो रहे इन ई-परमिटों के जरिए अवैध खनन सामग्री को वैध रूप देने का संगठित प्रयास किया जा रहा है।
जांच और तकनीकी पड़ताल में सामने आया है कि आईडी क्रमांक 55732023013701 (मनजीत सिंह) और 88882024015789 (विकास) का उपयोग कर अंतरराज्यीय परिवहन प्रपत्र तैयार किए जा रहे हैं। इन फर्जी प्रपत्रों के जरिए सामग्री को मसूदपुर गढ़ स्थित स्टोन क्रेशर के पोर्टल खाते (लाइसेंस आईडी 31122223990230) पर दर्ज दिखाया जा रहा है। बिना किसी आधिकारिक सत्यापन और वैध शुल्क के क्रेशर के स्टॉक में सामग्री दर्ज कराने का यह खेल सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाने की सुनियोजित साजिश की ओर इशारा कर रहा है।

इस पूरे प्रकरण में सबसे गंभीर पहलू यह है कि जिन व्यावसायिक वाहनों के पंजीकरण नंबरों पर यह फर्जी आईएसटीपी काटी जा रही हैं, उन वाहन स्वामियों को इसकी भनक तक नहीं थी। मामले की परतें उस समय खुलीं जब वास्तविक वाहन स्वामी अपनी गाड़ियों के लिए अधिकृत पोर्टल पर ट्रांजिट पास बनवाने पहुंचे। वहां सिस्टम ने यह दर्शाया कि संबंधित वाहनों के नंबर पर पहले से ही पास जारी हो चुका है।
बिना जानकारी के जिन वाहनों के नंबरों का दुरुपयोग कर अवैध परिवहन प्रपत्र तैयार किए गए, उनमें हरियाणा और उत्तर प्रदेश नंबर की कई भारी गाड़ियां शामिल हैं। इनमें प्रमुख रूप से वाहन संख्या HR58 C5292, HR58 D1229, PB13 BN8221, UP12 CT0137 और UP12 BT7404 के विवरण सामने आए हैं। वाहन स्वामियों के अनुसार, उनकी गाड़ियां मौके पर मौजूद भी नहीं थीं और उनके नंबरों का इस्तेमाल कर खनिजों की फर्जी आवाजाही कागजों में दर्ज कर दी गई।
अवैध खनन माफियाओं द्वारा डिजिटल प्रणाली में किए जा रहे इस फर्जीवाड़े से जहां निर्दोष वाहन स्वामियों पर कानूनी कार्रवाई का खतरा मंडरा रहा है, वहीं खनन और परिवहन विभाग के राजस्व को भी सीधा चूना लगाया जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए खनन विभाग और पुलिस प्रशासन से इस पूरे तंत्र की उच्चस्तरीय जांच कराने और फर्जी आईडी संचालकों के साथ संबंधित स्टोन क्रेशर संचालकों पर कठोर कानूनी शिकंजा कसने की मांग की जा रही है।
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