सहारनपुर में स्टोन क्रेशर बंद करने की चेतावनी, खनन विभाग पर उत्पीड़न का आरोप लगा कारोबारियों ने बुलाई बैठक

सहारनपुर में खनन विभाग की कथित सख्ती के विरोध में स्टोन क्रेशर संचालक कामकाज ठप करने की तैयारी में हैं। रैंप पट्टों के बहिष्कार और हड़ताल पर मंथन जारी है।

By INA News Desk
Sep 13, 2026 - 14:33
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सहारनपुर में स्टोन क्रेशर बंद करने की चेतावनी, खनन विभाग पर उत्पीड़न का आरोप लगा कारोबारियों ने बुलाई बैठक
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सहारनपुर। जिले में पुलिस और खनन विभाग द्वारा लगातार की जा रही कार्रवाई से नाराज स्टोन क्रेशर स्वामियों ने अनिश्चितकालीन कार्यबंदी और सरकारी पट्टों के बहिष्कार का मन बना लिया है। बेहट क्षेत्र स्थित एक रिसॉर्ट में आयोजित आपात बैठक में खनन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाते हुए कारोबारियों ने कारोबार ठप करने के संकेत दिए हैं। एसोसिएशन से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि लगातार बढ़ते दबाव के चलते इकाइयों का संचालन असंभव होता जा रहा है, जिसको लेकर जल्द ही सामूहिक हड़ताल और जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन की अंतिम कार्ययोजना लागू की जाएगी।

बैठक के दौरान सहमति बनी कि कोई भी संचालक रैंप पट्टा नहीं लेगा और न ही इसके लिए नए आवेदन किए जाएंगे। यह भी तय किया गया कि यदि प्रशासन स्तर से किसी अन्य व्यक्ति या संस्था को ऐसा पट्टा स्वीकृत भी किया जाता है, तो स्थानीय क्रेशर उससे कच्चा माल यानी आरबीएम नहीं खरीदेंगे। इसके साथ ही जब तक समस्याओं का स्थाई निस्तारण नहीं हो जाता, तब तक आगामी खनन पट्टों के अनुबंध और संचालन प्रक्रिया का भी पूर्ण बहिष्कार किया जाएगा। एसोसिएशन ने विरोध स्वरूप बिजली बिल, माल एवं सेवा कर (जीएसटी) तथा अन्य सरकारी देयकों के भुगतान को रोकने का भी प्रस्ताव रखा है।

चौधरी शिवराज सिंह ने बताया कि बैठक में पांच प्रमुख बिंदुओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया है और आगामी बैठक में इन सभी प्रस्तावों पर अंतिम मुहर लगाकर व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा। इस दौरान चौधरी प्रदीप राणा, वीरेंद्र पाल, आदेश सिंह, मोहम्मद शफीक खान और मृत्युंजय शर्मा सहित कई प्रमुख उद्यमियों ने कहा कि यदि प्रशासन ने उनकी समस्याओं का समाधान नहीं निकाला तो कामकाज पूरी तरह बंद करना मजबूरी बन जाएगा। कारोबारियों ने चिंता व्यक्त की कि खनन गतिविधियां ठप होने से न केवल सरकार को बड़े राजस्व का नुकसान होगा और निर्माण कार्य रुकेंगे, बल्कि हजारों दिहाड़ी मजदूरों के सामने आजीविका का गंभीर संकट पैदा हो जाएगा। इस पूरे मामले को लेकर जिले के औद्योगिक व श्रमिक वर्ग में असमंजस का माहौल बना हुआ है।

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