यूपी में चकबंदी पर बड़ा फैसला: 6 जिलों के 16 गांव प्रक्रिया से बाहर, वर्षों से अटके मामलों में राहत

उत्तर प्रदेश में चकबंदी प्रक्रिया को लेकर बड़ा फैसला। 6 जिलों के 16 गांवों को प्रक्रिया से अलग किया गया, वहीं आजमगढ़ और मीरजापुर के गांवों में काम पूरा हुआ।

By INA News Desk
Oct 1, 2026 - 21:20
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यूपी में चकबंदी पर बड़ा फैसला: 6 जिलों के 16 गांव प्रक्रिया से बाहर, वर्षों से अटके मामलों में राहत

उत्तर प्रदेश में लंबे समय से अटकी चकबंदी प्रक्रिया को तेजी से निपटाने के लिए शासन स्तर पर बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के क्रम में यह व्यवस्था बनाई गई है ताकि किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने में किसी भी तरह की रुकावट न आए। इसी कड़ी में चकबंदी आयुक्त डॉक्टर हृषिकेश भास्कर यशोद ने विशेष परिस्थितियों के चलते छह जनपदों के 16 गांवों को जोत चकबंदी अधिनियम की धारा-6 (1) के तहत प्रक्रिया से पूरी तरह अलग करने का आदेश जारी किया है।

चकबंदी विभाग के अनुसार, जिन गांवों को प्रक्रिया से बाहर किया गया है, वहां या तो तेजी से शहरीकरण हो रहा था, क्षेत्र औद्योगिक विकास अथवा अन्य विकास योजनाओं के अधीन आ चुके थे या फिर वे नदी के कटान से गंभीर रूप से प्रभावित थे। इसके अलावा चकबंदी योग्य भूमि का क्षेत्रफल 40 प्रतिशत से कम होने, स्थानीय स्तर पर आपसी गुटबाजी होने तथा विशेष प्रयासों के बाद भी प्रगति न दिखने के कारण यह निर्णय लिया गया है।

इस व्यवस्था के तहत बदायूं के ग्राम पिण्डौल व बेहटा गुसाई (14 वर्षों से लंबित), सम्भल के ग्राम मैथरा आलपुर, सादातबाडी, लहरावन व बिसारू (12 वर्षों से लंबित), बांदा के ग्राम हटेटीपुरवा, उन्नाव के ग्राम चकरसूलपुर, मुण्डा व नाजिरपुर तथा चित्रकूट के ग्राम पहाड़ी बुजुर्ग, नहरा व अर्की को चकबंदी प्रक्रिया से अलग कर दिया गया है। इसके साथ ही दो वर्षों से प्रक्रियाधीन बांदा के ग्राम रामनगर निस्फ और अमरोहा के ग्राम सिरसा गूजर ऐहतियाली व सतेडा ऐहतियाली को भी इस दायरे से बाहर रखा गया है।

दूसरी तरफ, दशकों से लंबित मामलों को सुलझाते हुए विभाग ने आजमगढ़ के ग्राम कुंजी (34 वर्षों से लंबित) और मीरजापुर के ग्राम बबुरा कला (12 वर्षों से लंबित) में निरंतर निगरानी रखकर जोत चकबंदी अधिनियम की धारा-52 (1) के अंतर्गत कार्य को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। चकबंदी अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि प्राथमिक स्तर पर गाटों में अलग भू-भाग के अधिकार संबंधी मामलों का सही निर्धारण हो और नियमों के अनुसार ही गाटों का विनिमय अनुपात तय किया जाए।

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