Yogi Government Economic Growth: उत्तर प्रदेश ने जून में जुटाया 9,165 करोड़ का जीएसटी, पंजाब-कर्नाटक से आगे निकला यूपी
उत्तर प्रदेश ने जून 2026 में 19% की शानदार बढ़त के साथ 9165 करोड़ रुपये का जीएसटी राजस्व एकत्र किया है। यूपी ने पंजाब, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्यों को पीछे छोड़ दिया।
- UP GST Collection Growth: यूपी में जीएसटी संग्रह ने भरी ऊंची उड़ान, 19 फीसदी की रिकॉर्ड बढ़त के साथ कई बड़े राज्यों को पछाड़ा
- यूपी की अर्थव्यवस्था ने रचा नया कीर्तिमान! जून में 19% की छलांग के साथ हासिल किया भारी भरकम GST कलेक्शन, जानें आंकड़े
- लखनऊ: आर्थिक मोर्चे पर यूपी की बड़ी कामयाबी, जून 2026 में 19 फीसदी की प्रभावशाली वृद्धि के साथ 9,165 करोड़ रुपये का जीएसटी संग्रह
उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल मार्गदर्शन में राज्य की अर्थव्यवस्था लगातार नए आर्थिक कीर्तिमान स्थापित कर रही है। देश के प्रमुख औद्योगिक राज्यों को पछाड़ते हुए उत्तर प्रदेश ने जून 2026 के महीने में माल एवं सेवा कर (GST) राजस्व संग्रह में 19 फीसदी की अभूतपूर्व और प्रभावशाली बढ़ोतरी दर्ज की है। इस शानदार आर्थिक प्रदर्शन के चलते राज्य सरकार को जून महीने में कुल 9,165 करोड़ रुपये का भारी-भरकम जीएसटी राजस्व प्राप्त हुआ है। यूपी ने इस दोहरे अंक की वृद्धि दर के साथ पंजाब, कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल जैसे आर्थिक रूप से सुदृढ़ माने जाने वाले राज्यों को काफी पीछे छोड़ दिया है। लगातार दूसरे महीने दर्ज की गई इस मजबूत विकास दर से स्पष्ट संकेत मिलते हैं कि राज्य में कर अनुपालन और व्यापारिक अनुकूलता का माहौल तेजी से विकसित हो रहा है, जो आने वाले समय में प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
यह पूरा मामला उत्तर प्रदेश सरकार के कर राजस्व विभाग द्वारा जून 2026 की अवधि के लिए जारी किए गए केंद्रीय और प्रादेशिक वस्तु एवं सेवा कर (GST) संग्रह के आधिकारिक आंकड़ों से संबंधित है। राज्य में वित्तीय नीतियों के कड़े क्रियान्वयन, कर चोरी पर अंकुश और कारोबारी सुगमता (Ease of Doing Business) के कारण टैक्स कलेक्शन में ऐतिहासिक उछाल देखा गया है। पिछले वर्षों की तुलनात्मक अवधियों और देश के अन्य बड़े राज्यों की तुलना में उत्तर प्रदेश की विकास दर सबसे ऊंची रही है, जो सरकार की वित्तीय स्थिरता और आर्थिक सशक्तिकरण की ओर इशारा करती है।
राज्यों से तुलनात्मक आंकड़े
आधिकारिक रिपोर्ट के विश्लेषण से पता चलता है कि जून 2026 में उत्तर प्रदेश का जीएसटी संग्रह 9,165 करोड़ रुपये रहा, जो जून 2025 में दर्ज किए गए 7,675 करोड़ रुपये के राजस्व के मुकाबले 19 प्रतिशत अधिक है। यदि हम भारत के अन्य शीर्ष प्रगतिशील राज्यों के आर्थिक आंकड़ों पर नजर डालें, तो यूपी की 19 फीसदी की यह विकास दर सबसे उत्कृष्ट दिखाई देती है।
इस अवधि के दौरान अन्य राज्यों का आर्थिक रिपोर्ट कार्ड कुछ इस प्रकार रहा:
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पंजाब: कर संग्रह में 14 प्रतिशत की सराहनीय वृद्धि दर्ज की गई।
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केरल: उपभोक्ता प्रधान राज्य होने के बावजूद केवल 11 प्रतिशत की बढ़त हासिल कर सका।
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कर्नाटक: तकनीकी और आईटी हब होने के बाद भी 10 प्रतिशत की दहाई अंक की वृद्धि पर सिमट गया।
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तमिलनाडु: दक्षिण के इस बड़े औद्योगिक राज्य को बड़ा झटका लगा है, जहां जून में कर संग्रह में 2 प्रतिशत की नकारात्मक गिरावट दर्ज की गई।
इन सभी राज्यों के तुलनात्मक परिदृश्य में उत्तर प्रदेश का 19 फीसदी की विकास दर छूना यह प्रमाणित करता है कि राज्य के विनिर्माण (Manufacturing) और सेवा (Service) दोनों क्षेत्रों में मजबूत आंतरिक मांग बनी हुई है।
यह तीव्र वृद्धि अचानक नहीं हुई है, बल्कि लगातार चल रहे आर्थिक सुधारों का परिणाम है। इससे ठीक एक महीने पहले, यानी मई 2026 में भी उत्तर प्रदेश ने वाणिज्यिक मोर्चे पर शानदार प्रदर्शन किया था। मई 2026 में राज्य को 8,728 करोड़ रुपये का जीएसटी राजस्व प्राप्त हुआ था। यह कलेक्शन मई 2025 के 7,732 करोड़ रुपये की तुलना में 13 फीसदी अधिक रहा था। लगातार दो महीनों (मई और जून) तक कर राजस्व में दहाई अंकों (Double Digit Growth) की निरंतर वृद्धि दर बनाए रखना किसी भी बड़े राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद सकारात्मक माना जाता है।
इस शानदार उपलब्धि पर राज्य के वित्तीय विश्लेषकों और आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में डिजिटलीकरण और पारदर्शी टैक्स प्रणाली का व्यापक लाभ मिल रहा है। व्यापारियों द्वारा समय पर टैक्स जमा करने और प्रशासन द्वारा बाजार को अनुकूल माहौल देने की वजह से कर आधार (Tax Base) का विस्तार हुआ है।
वहीं, औद्योगिक संगठनों (जैसे FICCI और IIA) के पदाधिकारियों ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राज्य में बेहतर बुनियादी ढांचा, एक्सप्रेसवे का जाल और कानून व्यवस्था में सुधार होने से औद्योगिक निवेश बढ़ा है। नए उद्योगों की स्थापना के कारण ही प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर संग्रह में यह ऐतिहासिक उछाल दर्ज किया जा रहा है।
इस बंपर जीएसटी कलेक्शन का उत्तर प्रदेश के बजटीय आवंटन पर सीधा और बड़ा प्रभाव पड़ेगा। कर राजस्व में वृद्धि होने से राज्य सरकार के पास अपने आंतरिक वित्तीय संसाधन मजबूत होंगे। इससे सरकार को केंद्र पर कम निर्भर रहना पड़ेगा और राज्य की लोक-कल्याणकारी योजनाओं, ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विकास, स्वास्थ्य सेवाओं और एक्सप्रेसवे जैसी मेगा बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को बिना किसी वित्तीय बाधा के गति दी जा सकेगी। साथ ही, यह उच्च कर संग्रह वैश्विक और घरेलू निवेशकों को यह संदेश देता है कि यूपी का बाजार पूरी तरह से गतिशील और सुरक्षित है।
राजस्व विभाग के उच्च अधिकारियों के अनुसार, इस आर्थिक गति को आगामी महीनों में भी बनाए रखने के लिए रणनीति तैयार की गई है। डेटा एनालिटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीकों के माध्यम से बिना किसी ईमानदार व्यापारी को परेशान किए, कर वंचकों की पहचान करने का काम तेज किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार एमएसएमई (MSME) सेक्टर को और अधिक रियायतें देकर जीएसटी के दायरे में नए व्यापारियों को पंजीकृत करने के लिए विशेष अभियान चलाने जा रही है, जिससे आगामी तिमाहियों में राजस्व का ग्राफ और ऊंचा जा सके।
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