UP Revenue Court Digitalization: यूपी में डिजिटल होगी राजस्व न्याय व्यवस्था, मूल अभिलेखों की जगह स्कैन कॉपियों से होगी सुनवाई
उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद ने मूल अभिलेखों की सुरक्षा और मुकदमों के त्वरित निस्तारण के लिए डिजिटल व्यवस्था लागू की है। अब स्कैन प्रतियों से होगी अदालती कार्यवाही।
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- यूपी में जमीन-जायदाद के मुकदमों में बड़ा बदलाव! सुरक्षित रहेंगे मूल कागजात, जानें योगी सरकार की नई डिजिटल व्यवस्था
- लखनऊ: उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद का ऐतिहासिक निर्णय, न्यायालयों में अब प्रमाणित स्कैन प्रतियों के आधार पर होगी कानूनी कार्यवाही
उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक और न्यायिक व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से लैस करने की दिशा में योगी सरकार ने एक और ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में राजस्व परिषद, उत्तर प्रदेश ने एक दूरदर्शी निर्णय लेते हुए राजस्व न्यायालयों में मूल अभिलेखों (Original Documents) के स्थान पर उनकी प्रमाणित पूर्ण स्कैन प्रतियों (Certified Scanned Copies) के आधार पर कानूनी कार्यवाही संचालित करने की व्यवस्था लागू कर दी है। राजस्व परिषद की अध्यक्ष अर्चना अग्रवाल के दिशा-निर्देशों के तहत 4 जुलाई को इस नई व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से पूरे प्रदेश में प्रभावी कर दिया गया। इस अभिनव पहल का मुख्य उद्देश्य महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक सरकारी दस्तावेजों को सुरक्षित रखना तथा वर्षों से लंबित राजस्व मामलों के निस्तारण में तेजी लाना है। आगामी दिनों में इस पूरी व्यवस्था को पूरी तरह से ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से संचालित करने की प्रशासनिक योजना तैयार की जा रही है।
यह पूरा मामला उत्तर प्रदेश की राजस्व न्याय प्रणाली (Revenue Judicial System) में किए गए एक बड़े ढांचागत सुधार से संबंधित है। अब तक जमीनी मुकदमों, परवाना, मानचित्र और नोटशीट से जुड़े मूल सरकारी दस्तावेजों को सुनवाई के लिए एक अदालत से दूसरी अदालत में भौतिक रूप से भेजा जाता था। राजस्व परिषद द्वारा जारी नए आदेश के बाद अब अधीनस्थ न्यायालयों द्वारा तैयार की गई स्पष्ट, क्रमवार और प्रमाणित स्कैन प्रतियों के माध्यम से ही मुकदमों की सुनवाई की जाएगी। केवल अत्यंत दुर्लभ और विशेष परिस्थितियों में ही, जहां न्यायाधीश कारण दर्ज करते हुए आदेश देंगे, मूल फाइलों को अदालत में मंगवाया जा सकेगा।
राजस्व परिषद की अध्यक्ष अर्चना अग्रवाल द्वारा जारी आधिकारिक निर्देशों के अनुसार, ई-गवर्नेंस को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है। पुरानी व्यवस्था में मूल दस्तावेजों को बार-बार जिला मुख्यालयों से लखनऊ या अन्य राजस्व अदालतों में भेजने के कारण उनके फटने, क्षतिग्रस्त होने, पृष्ठों के गुम होने अथवा डाक विलंभ के कारण न्यायिक प्रक्रिया ठप होने की शिकायतें आम थीं।
इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए तय की गई नई कार्यप्रणाली के तहत अब:
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अधीनस्थ न्यायालयों द्वारा भेजी जाने वाली हर एक स्कैन फाइल में प्रत्येक पृष्ठ (Page), आदेश पत्रक (Order Sheet), नोटशीट, संबंधित मानचित्र (Map) और अन्य समस्त साक्ष्य स्पष्ट रूप से शामिल किए जाएंगे।
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फाइलों की गोपनीयता और सत्यता बनाए रखने के लिए संबंधित राजस्व रिकॉर्ड कीपर (RRK) द्वारा एक डिजिटल या भौतिक हस्ताक्षरित प्रमाण-पत्र संलग्न करना अनिवार्य होगा।
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यदि कोई भी फाइल अपूर्ण, धुंधली या अप्रमाणित पाई जाती है, तो संबंधित पटल प्रभारी या आरआरके के खिलाफ सीधे विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
योगी सरकार ने इस बात पर भी जोर दिया है कि इस डिजिटल सुधार को और अधिक व्यापक बनाने के लिए वर्तमान में संचालित आरसीसीएमएस (RCCMS - Revenue Court Computerized Management System) पोर्टल का विस्तार किया जाएगा। भविष्य में फाइलों को ईमेल या पेनड्राइव के बजाय सीधे इस सेंट्रलाइज्ड पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा, जिससे मुकदमों की तारीखों, आदेशों और पत्रावलियों की निगरानी सीधे शासन स्तर से की जा सकेगी। इससे वादियों (आम जनता) को भी अपने मुकदमों की स्थिति ऑनलाइन देखने में सहूलियत होगी।
इस प्रशासनिक निर्णय पर राजस्व अधिकारियों और अधिवक्ताओं ने मिली-जुली लेकिन सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। राजस्व मामलों के जानकारों का कहना है कि इस व्यवस्था से अदालतों का कीमती समय बचेगा और फाइलों के इधर-उधर ट्रांसफर होने में लगने वाला वक्त शून्य हो जाएगा।
वहीं, मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों ने अपने-अपने अधिकार क्षेत्रों में इस आदेश को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए अधीनस्थ कर्मचारियों की कार्यशाला आयोजित करने की बात कही है, ताकि तकनीकी रूप से त्रुटिहीन स्कैन प्रतियां तैयार की जा सकें। आम जनता और किसान संगठनों ने भी इस कदम की सराहना की है, क्योंकि इससे भू-अभिलेखों में हेरफेर की गुंजाइश खत्म होगी।
इस डिजिटल बदलाव का उत्तर प्रदेश की राजस्व न्याय व्यवस्था पर दीर्घकालिक और सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। सबसे बड़ा प्रभाव यह होगा कि सरकारी भू-अभिलेख पूरी तरह से सुरक्षित हो जाएंगे और आगजनी, दीमक या चोरी जैसी घटनाओं से ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स का नुकसान नहीं होगा। दूसरा महत्वपूर्ण प्रभाव यह होगा कि मुकदमों की सुनवाई में पारदर्शिता आएगी, जिससे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा और पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सकेगा।
राजस्व परिषद के आदेशानुसार, सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने जिलों के सभी राजस्व न्यायालयों (जैसे तहसीलदार, एसडीएम, एडीएम और कमिश्नरी कोर्ट) में इस व्यवस्था का प्रभावी अनुपालन 24 घंटे के भीतर सुनिश्चित कराएं। इसके साथ ही, परिवहन विभाग और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की मदद से राजस्व रिकॉर्ड रूम्स को आधुनिक स्कैनर और हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी से लैस करने की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है।
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