Budget Estimates 2025-26: वित्तीय वर्ष 2025-2026 के बजट अनुमानों पर वित्त मंत्री के उद्बोधन के प्रमुख अंश... 

मुख्यमंत्री (Chief Minister ) द्वारा प्रदेश की अर्थव्यवस्था (economy) को वन ट्रिलियन डॉलर (one trillion dollars) बनाए जाने का लक्ष्य रखा गया है। इस हेतु राज्य सरकार द्वारा 10 सेक्टर...

Feb 20, 2025 - 12:05
Feb 20, 2025 - 12:39
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Budget Estimates 2025-26: वित्तीय वर्ष 2025-2026 के बजट अनुमानों पर वित्त मंत्री के उद्बोधन के प्रमुख अंश... 


Budget Estimates 2025-26: वित्तीय वर्ष 2025-2026 के बजट अनुमानों पर वित्त मंत्री ने कहा कि इस वर्ष परम पावन तीर्थनगरी प्रयागराज में महाकुम्भ-2025 का भव्य आयोजन हो रहा है। हम सभी जानते हैं कि महाकुम्भ 144 वर्षों में आता है। यह हम सभी के लिये ही नहीं अपितु सम्पूर्ण भारत देश और पूरे विश्व के लिये परम सौभाग्य का विषय है कि हम अपने जीवनकाल में आस्था, संस्कृति और मानवता के समागम के इस महापर्व के भागी बन सके। 

कुम्भ का वर्णन ऋग्वेद एवं अथर्ववेद में मिलता है। यह भारत की प्राचीन सांस्कृतिक एवं धार्मिक अक्षुण्णता का परिचायक है। कुम्भ मात्र एक धार्मिक, सांस्कृतिक मेला ही नही है, यह एक दुर्लभ खगोलीय घटना भी है। प्रयागराज में आयोजित होने वाले कुम्भ के विषय में पुराणों का यह श्लोक मैं पढ़ना चाहूँगाः

"मेष राशिगते जीवे मकरे चन्द्रभास्करौ।
अमावस्या तदा योगः कुम्भख्यस्तीर्थ नायके ।।

अर्थात बृहस्पति मेष राशि में तथा चन्द्र और सूर्य मकर राशि में जब आते हैं और अमावस्या तिथि हो तो तीर्थो के नायक प्रयाग में कुम्भयोग होता है।

  • महाकुम्भ में देश-विदेश से आये लगभग 53 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने प्रतिभाग किया। 

हमारी प्राचीन आस्था, धर्म और संस्कृति के प्रतीक कुम्भ योग को अनादिकाल से सर्वश्रेष्ठ साक्षात मुक्ति पद की संज्ञा दी गई है। महाकुम्भ में देश-विदेश से आये लगभग 53 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने प्रतिभाग किया। यह सम्पूर्ण विश्व में मनुष्यों का विशालतम समागम था, जिसके मध्य एवं कुशल आयोजन की सराहना सभी ने मुक्तकंठ से की। सम्भवतः इस सदन में उपस्थित सम्मानित सदस्यों ने मानवता के इस महापर्व में प्रतिभाग किया होगा।

हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा हमारे तेजस्वी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने पिछले लगभग आठ वर्षों में प्रत्येक क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है। चाहे वह कानून व्यवस्था हो, आर्थिक विकास हो, औद्योगिक विकास हो, दुर्बल वर्गों को विकास की मुख्यधारा में लाना हो, गरीबी उन्मूलन हो, अवस्थापना विकास हो अथवा वित्तीय समावेशन हो। हमने चिकित्सा सुविधाओं का तीव्र गति से विकास किया है। प्रत्येक क्षेत्र में आधुनिक तकनीक के प्रयोग और नवाचार को विशेष रूप से बढ़ावा दिया गया है।

  • देश की अर्थव्यवस्था को वन ट्रिलियन डॉलर बनाए जाने का लक्ष्य

मुख्यमंत्री द्वारा प्रदेश की अर्थव्यवस्था को वन ट्रिलियन डॉलर बनाए जाने का लक्ष्य रखा गया है। इस हेतु राज्य सरकार द्वारा 10 सेक्टर यथा-कृषि एवं संवर्गीय सेवाएँ, अवस्थापना, उद्योग, आई०टी० एवं इलेक्ट्रॉनिक्स, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, शिक्षा, पर्यटन, नगर विकास, वित्तीय सेवायें, ऊर्जा, पूँजी निवेश आदि चिन्हित करते हुये सेक्टरवार कार्ययोजना तैयार की गई है। प्रदेश सरकार के सम्बन्धित विभागों द्वारा सेक्टरवार कार्य योजना पर कार्य चल रहा है जिसकी समीक्षा नियमित रूप से की जा रही है।

सुचारू नीति कार्यान्वयन, व्यापार को आसान बनाने, ईज ऑफ यूइंग बिजनेस तथा निवेश आकर्षित करने के लिये सत्त विकास के कार्य के प्रति समर्पण भाव से प्रदेश के समस्त अंचलों में संतुलित निवेश का समग्र प्रवाह एवं नागरिकों के जीवन उन्नयन के लिये दीर्घकालिक मूल्यों एवं व्यवस्थाओं को सुनिश्चित किया गया है। हमारी सरकार राज्य को एक मुख्य निवेश केन्द्र तथा देश के ग्रोथ इंजन के रूप में स्थापित करने के अपने मिशन को कार्यान्वित करने हेतु प्रतिबद्ध है।

जिस तरह से मुख्यमंत्री द्वारा एक तपोनिष्ठ कर्मयोगी के समान अहर्निश प्रदेश के विकास के लिये कार्य किया गया है उसके बारे में मैं कहना चाहूँगा-

जिस दिन से चला हूँ मेरी मंजिल पर नजर है
आँखों ने कभी मील का पत्थर नहीं देखा।

  • विश्व स्तरीय इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करने में उत्तर प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रगति की

हाल के वर्षों में उत्तर प्रदेश में निवेश आकर्षण, औद्योगिक एवं अवस्थापना विकास में उल्लेखनीय प्रगति हुई है तथा प्रदेश भारत में सबसे पसंदीदा निवेश गंतव्य के रूप में उभरा है। राज्य सरकार द्वारा अवस्थापना सुविधाओं का त्वरित विकास किया गया है।

कई निवेशोन्मुख नीतियां घोषित की गई है तथा कारोबारी माहौल में अभूतपूर्व सुधार किया गया है, जिससे प्रदेश की छवि आर्थिक रूप से पिछड़े राज्य से परिवर्तित होकर एक प्रगतिशील राज्य के रूप में स्थापित हुई है। विश्व स्तरीय इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करने में उत्तर प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रगति की है। 

राज्य में विकसित हो रही वायु, जल, सड़क एवं रेल नेटवर्क की कनेक्टिविटी से राज्य के उद्योगों एवं मैन्युफैक्चरिंग इकाईयों को अपना माल भारत एवं विदेशों के बाजारों में भेजने के लिये परिवहन के विभिन्न साधनों के बीच निर्बाध रूप से स्विच करने की सुविधा प्रदान करेगी।

कानून व्यवस्था तथा विद्युत आपूर्ति में अभूतपूर्व सुधार, सक्रिय नीतिगत निरूपण एवं इन्वेस्ट यू०पी० में निवेश सारथी, निवेश मित्र तथा ऑनलाइन प्रोत्साहन लाभ प्रबंधन प्रणाली जैसी डिजिटल सुविधाओं से निवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित हुई है, जिससे निवेशकों का विश्वास बढ़ा है तथा राज्य में व्यापार करने के लिये अनुकूल वातावरण सृजित हुआ है।

  • प्रदेश का राजकोषीय घाटा निर्धारित सीमा के अधीन रहा

नीति आयोग, भारत सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2014-2015 से 2022-2023 तक की अवधि के लिये राज्यों की राजकोषीय स्थिति के संबंध में रिपोर्ट प्रकाशित की गयी है, जिसमें उत्तर प्रदेश को अग्रणी (फंट रनर) राज्य की श्रेणी में रखा गया है। समेकित "फिस्कल हेल्थ इन्डेक्स" जो वर्ष 2014 से 2019 की अवधि में 37.0 था, 2022-2023 में बढ़कर 45.9 हो गया है। रिपोर्ट के अनुसार व्यय की गुणवत्ता में व्यापक सुधार हुआ है। वर्ष 2018 से 2023 की अवधि में पूँजीगत व्यय, कुल व्यय के 14.8 प्रतिशत से 19.3 प्रतिशत के मध्य रहा। इस अवधि में यह अनुपात देश के प्रमुख राज्यों के औसत अनुपात से अधिक रहा।

सामाजिक क्षेत्र में पूँजीगत व्यय में 27 प्रतिशत तथा राजस्व व्यय में 9 प्रतिशत वार्षिक दर से वृद्धि हुई। इसी प्रकार, आर्थिक सेवाओं के अन्तर्गत भी पूँजीगत व्यय में पर्याप्त वृद्धि परिलक्षित हुई। वित्तीय वर्ष 2018-2019 में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण पर व्यथ कुल व्यय का 4.9 प्रतिशत था जो वर्ष 2022-2023 में बढ़कर 6.5 प्रतिशत हो गया, जो देश के प्रमुख राज्यों में सर्वाधिक था।

प्रदेश का राजकोषीय घाटा निर्धारित सीमा के अधीन रहा है। राजस्व बचत तथा प्राथमिक बचत के कारण सकल राज्य घरेलू उत्पाद के प्रतिशत के रूप में ऋणग्रस्तता में कमी दर्ज की गयी। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा राज्यों के बजट के संबंध में वित्तीय वर्ष 2024-2025 में प्रकाशित अध्ययन रिपोर्ट के कुछ मुख्य बिन्दु में इस सम्मानित सदन के समक्ष प्रस्तुत करना चाहूँगा।

देश के सभी राज्यों की स्वयं के कर की प्राप्तियों में उत्तर प्रदेश का अंश वर्ष 2022-2023, 2023-2024 एवं 2024-2025 में क्रमशः 9.9 प्रतिशत, 10.5 प्रतिशत एवं 11.6 प्रतिशत रहा जो महाराष्ट्र के उपरान्त देश में सर्वाधिक है।

उक्त वर्षों में सभी राज्यों में राजस्व प्राप्तियों के सापेक्ष ब्याज पर व्यय क्रमशः 12.6, 12.3 एवं 12.1 प्रतिशत रहा जबकि उत्तर प्रदेश में यह प्रतिशत 10.3, 9.4 एवं 8.9 रहा। सकल राज्य घरेलू उत्पाद के प्रतिशत के रूप में सभी राज्यों की स्वयं के कर से प्राप्ति का औसत उक्त वर्षों में क्रमशः 6.5, 7.0 तथा 7.2 प्रतिशत रहा, जब कि उत्तर प्रदेश में यह अनुपात क्रमशः 7.6, 9.8 तथा 10 प्रतिशत रहा।

  • सरकार के कुशल वित्तीय प्रबन्धन का परिचायक

इस अवधि में सकल राज्य घरेलू उत्पाद के प्रतिशत के रूप में सभी राज्यों का विकास व्यय क्रमशः 10.9, 11.9 एवं 12 प्रतिशत रहा, जबकि उत्तर प्रदेश में यह औसत क्रमशः 13.8, 16 एवं 16.7 प्रतिशत रहा। समस्त राज्यों द्वारा कुल व्यय के प्रतिशत के रूप में चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण पर किये गये व्यय के औसत की तुलना में, वित्तीय वर्ष 2018-2019 तथा 2021-2022 के अलावा वर्ष 2017-2018 से 2024-2025 तक उत्तर प्रदेश द्वारा किया गया व्यय लगातार अधिक रहा।

वर्ष 2017-2018 में सभी राज्यों के औसत अनुपात 5.0 प्रतिशत के सापेक्ष उत्तर प्रदेश का अनुपात 5.3 तथा 2024-2025 में 5.6 प्रतिशत के सापेक्ष 5.9 प्रतिशत रहा है। प्रदेश की ऋणग्रस्तता जो वर्ष 2016-2017 की समाप्ति पर जी.एस.डी. पी. का 36.7 प्रतिशत थी घट कर वर्ष 2022-2023 के वास्तविक आँकड़ों में 30.4 प्रतिशत हो गयी है।

उपरोक्त सभी आंकड़े जो भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा देश के सभी राज्यों के बजट का अध्ययन कर प्रकाशित किये गये हैं, से स्पष्ट है कि.... उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा न केवल अपने आंतरिक संसाधनों की अभिवृद्धि पर जोर दिया गया है, अपितु विकास व्यय एवं स्वास्थ्य सेवाओं पर व्यय बढ़ाया गया है और ऋणग्रस्तता में कमी लायी गई है। यह हमारी सरकार के कुशल वित्तीय प्रबन्धन का परिचायक है।

  • वर्ष 2024-2025 में प्रदेश की जी.एस.डी.पी. 27.51 लाख करोड़ रहने का अनुमान

वर्ष 2017-2018 में जब प्रदेश वासियों की सेवा का अवसर हमें प्राप्त हुआ तो प्रदेश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह बदहाल थी तथा जी.एस.डी.पी. मात्र 12.89 लाख करोड रुपये के स्तर पर था। हमारी सरकार के कार्यकाल में हमने प्रदेश की अर्थव्यवस्था को दो गुना कर दिया है। वर्ष 2024-2025 में प्रदेश की जी.एस.डी.पी. 27.51 लाख करोड़ रहने का अनुमान है।

मैं यह भी बताना चाहूंगा कि हम देश में विकास दर में वृद्धि करने वाले राज्यों में अब अग्रणी स्थान पर खड़े हैं। वर्ष 2023-2024 में भारत देश की जी.डी.पी. की वृद्धि दर 9.6 प्रतिशत थी जबकि हमारे प्रदेश की वृद्धि दर 11.6 प्रतिशत रही है। वित्तीय वर्ष 2016-2017 में प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय मात्र 52,671 रुपये थी। मात्र तीन वर्ष की अवधि में प्रति व्यक्ति आय 2019-2020 में बढ़कर 65,660 रुपये के स्तर पर पहुँच गयी। 

इसके उपरान्त कोविड महामारी की विभीषिका के कारण पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था को झटका लगा। इसके बाद मात्र तीन वर्ष में 14.9 प्रतिशत अप्रत्याशित वार्षिक वृद्धि दर प्राप्त करते हुये हम प्रति व्यक्ति आय को वर्ष 2023-2024 में 93,514 रुपये के स्तर पर ले आये हैं।

  • बजट में शोध एवं विकास तथा सूचना प्रौद्योगिकी पर भी ध्यान दिया

वित्तीय वर्ष 2025-2026 के बजट में सम्मिलित प्रमुख योजनाओं का ब्यौरा प्रस्तुत करने के पूर्व में, बजट की संक्षिप्त रूपरेखा इस सम्मानित सदन के समक्ष रखना चाहूँगा। प्रस्तुत बजट का आकार 08 लाख 08 हजार 736 करोड़ 06 लाख रुपये है जो वर्ष 2024-2025 के बजट से 9.8 प्रतिशत अधिक है। बजट में पूँजीगत परिव्यय कुल बजट का लगभग 20.5 प्रतिशत है।

पूँजीगत परिव्यय के अन्तर्गत अवसंरचना निर्माण, विस्तार और निवेश संबंधी व्यय आते हैं। उद्योग, आवागमन, उत्पादों की बाजार तक पहुंच तथा प्रदेश में पूँजी निवेश को आकर्षित करने जैसे महत्वपूर्ण गतिविधियों में पूँजीगत व्यय की भूमिका अत्यन्त महत्वपूर्ण होती है।

इस बजट में अवस्थापना विकास हेतु 22 प्रतिशत, शिक्षा हेतु 13 प्रतिशत, कृषि और सम्बद्ध सेवाओं हेतु 11 प्रतिशत, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में 6 प्रतिशत, सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों हेतु 4 प्रतिशत एवं संसाधन आवंटित किये गये हैं। हमने बजट में शोध एवं विकास तथा सूचना प्रौद्योगिकी पर भी ध्यान दिया है। विधान सभा को आधुनिक आई०टी० सिस्टम्स से लैस करने के लिये बजट में विशेष रूप से व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। यह प्रक्रिया आगे भी चलती रहेगी।

  • नगर निकाय के लिये 2.50 करोड़ रुपये इस प्रकार कुल 145 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित

प्रदेश को आर्टिफिशियल इन्टेलिजेन्स के क्षेत्र में एक हब के रूप में विकसित करने हेतु "आर्टिफिशियल इन्टेलिजेन्स सिटी" की स्थापना तथा साईबर सिक्योरिटी में टेक्नोलॉजी रिसर्च ट्रान्सलेशन पार्क की स्थापना की नई योजना बजट में सम्मिलित की गयी है।

प्रदेश के प्राथमिक एवं उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में आई०सी०टी०लैब तथा स्मार्ट क्लासेज की स्थापना पर कार्य किया जा रहा है। राजकीय पॉलीटेक्निकों में स्मार्ट क्लासेज तथा पूर्णतया डिजिटल लाईब्रेरी की स्थापना की योजना प्रस्तावित की गयी है। आर्टिफिशियल इन्टेलिजेन्स को बढ़ावा देने हेतु सेन्टर ऑफ एक्सीलेन्स की स्थापना प्रस्तावित की गई है।

प्रदेश में साईन्स सिटी, विज्ञान पार्कों और नक्षत्रशालाओं की स्थापना एवं नवीनीकरण की कार्ययोजना बनायी जा रही है। नगर निगमों के अलावा प्रदेश के जनपद मुख्यालय के 58 नगर निकायों को आदर्श स्मार्ट नगर निकाय के रूप में विकसित किये जाने हेतु विभिन्न योजनाओं के कनवर्जेन्स के माध्यम से कार्य कराया जायेगा। इस हेतु प्रति नगर निकाय के लिये 2.50 करोड़ रुपये इस प्रकार कुल 145 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है।

  • गाँधी जयन्ती के अवसर पर 02 अक्टूबर, 2024 से 'जीरो पॉवर्टी अभियान' का प्रारम्भ

मैं इस सम्मानित सदन को बताना चाहूँगा कि उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड द्वारा प्रदेश के जिला मुख्यालयों में कामगार/श्रमिक अड्‌डे बनवाने की योजना पर कार्य किया जायेगा जिसमें कैन्टीन, पीने के पानी, स्नानागार और शौचालय की व्यवस्था करायी जायेगी।

हमारी सरकार द्वारा गाँधी जयन्ती के अवसर पर 02 अक्टूबर, 2024 से 'जीरो पॉवर्टी अभियान' का प्रारम्भ किया गया है। इस अभियान के अन्तर्गत प्रत्येक ग्राम पंचायत से निर्धनतम परिवारों को चिन्हित करते हुये उनकी मूलभूत जरूरतों को पूरा करने के और उनकी वार्षिक आय कम से कम 1,25,000 रुपये के स्तर तक लाये जाने हेतु कार्यवाही की जा रही है।

  • किसान- 03 करोड़ कृषकों को लगभग 79,500 करोड़ रुपये की धनराशि डी०बी०टी० के माध्यम से हस्तांतरित

प्रदेश के विभिन्न वर्गों के उत्थान एवं सशक्तीकरण से सम्बन्धित संक्षिप्त विवरण इस सम्मानित सदन के समक्ष प्रस्तुत करना चाहूँगा- 

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अन्तर्गत लगभग 03 करोड़ कृषकों को लगभग 79,500 करोड़ रुपये की धनराशि डी०बी०टी० के माध्यम से हस्तांतरित की गयी। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजनान्तर्गत वित्तीय वर्ष 2024-2025 में लगभग 10 लाख बीमित कृषकों को लगभग 496 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति का भुगतान कराया गया।

पी.एम. कुसुम योजना के अन्तर्गत वर्ष 2024 में कृषकों के प्रक्षेत्रों पर विभिन्न क्षमता के कुल 22,089 सोलर पम्पों की स्थापना करायी गयी। कृषकों को दुर्घटनावश मृत्यु दिव्यांगता की स्थिति में मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना दिनाँक 14 सितम्बर, 2019 से लागू की गई है।

कृषकों को गन्ना मूल्य भुगतान समय से सुनिश्चित कराने हेतु वर्ष 2017 से एस्क्रो एकाउन्ट मैकेनिज्म प्रारम्भ किया गया है जिसके फलस्वरूप चीनी मिलों में गन्ना मूल्य मद की धनराशि के व्यावर्तन पर पूर्ण अंकुश लगा है।वर्तमान सरकार द्वारा वर्ष 2017 से अब तक लगभग 46 लाख गन्ना किसानों को लगभग 2.73,000 करोड़ रूपये का रिकार्ड गन्ना मूल्य भुगतान कराया गया। 

यह गन्ना मूल्य भुगतान इसके पूर्व के 22 वर्षों के सम्मिलित गन्ना मूल्य से 59,143 करोड़ रूपये अधिक है। औसत गन्ना उत्पादकता 72 टन प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 85 टन प्रति हेक्टेयर बढ़ जाने से किसानों की आय में औसतन 370 रूपये प्रति कुन्तल की दर से 43,364 रूपये प्रति हेक्टेयर की वृद्धि हुई। इसके लिये शोध संस्थानों के वैज्ञानिक, छात्र तथा हमारे परिश्रमी किसान भाई बधाई के पात्र है।

महिला एवं बाल विकास

उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अन्तर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में 96 लाख से अधिक परिवारों की महिलाओं को आच्छादित किया गया है। ग्राम स्तर पर डिजिटल लेन-देन को प्रोत्साहित करने हेतु बी.सी.सखी योजना के अन्तर्गत 39.556 बी. सी. सखी द्वारा कार्य करते हुये 31.103 करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय लेन-देन किया गया व 84.38 करोड रुपये का लाभांश अर्जित किया गया। लखपति महिला योजना के अन्तर्गत 31 लाख से अधिक दीदियों का चिन्हींकन किया गया है तथा 02 लाख से अधिक महिलाएं लखपति की श्रेणी में आ चुकी हैं।

प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के तहत अब तक लगभग 1.86 करोड लाभार्थियों को गैस कनेक्शन वितरित किये जा चुके हैं। उज्जवला योजना के लाभार्थियों को 02 निःशुल्क सिलिण्डर वितरित किये जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश में महिला स्वामित्व वाली प्रोड्यूसर कम्पनियों के गठन हेतु महिला सामर्थ्य योजना संचालित है ।

बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने हेतु सह शिक्षा की व्यवस्था के साथ-साथ बालिका छात्रावास का निर्माण, बालिकाओं का सशक्तिकरण, मीना मंच, आत्त्म रक्षा प्रशिक्षण एवं संवेदीकरण आदि गतिविधियों का क्रियान्वयन किया जा रहा है। उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही मेधावी को पात्रता के आधार पर स्कूटी प्रदान किये की नई योजना लायी जा रही है।

  • युवा- युवा सशक्तिकरण योजना के अन्तर्गत 49.86 लाख स्मार्ट फोन/टैबलेट किए वितरित

स्वामी विवेकानन्द युवा सशक्तिकरण योजना के अन्तर्गत 49.86 लाख स्मार्ट फोन/टैबलेट वितरित किये जा चुके हैं। वित्तीय वर्ष 2025-2026 में इस योजना के तहत टैबलेट उपलबध कराये जायेंगे। प्रतियोगी छात्रों को अपने घर के समीप ही कोचिंग की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के सभी जनपदों में मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना का संचालन किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री शिक्षुता प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत सत्र 2024-25 में 54,833 अभ्यर्थियों को शिक्षुता प्रशिक्षण हेतु योजित किया गया। प्रदेश के शिक्षित एवं प्रशिक्षित युवाओं को स्वरोजगार से जोड़कर नये सूक्ष्म उद्योगों की स्थापना हेतु वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराये जाने के उद्देश्य से वर्ष 2024-2025 में मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान योजना प्रारम्भ की गई है। 

यह अपने तरह की पहली योजना है जिसमें सूक्ष्म उद्यम स्थापित करने हेतु युवाओं को गारण्टी मुक्त एवं ब्याज मुफ्त ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। इस योजना के अन्तर्गत प्रतिवर्ष 01 लाख नये सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना किये जाने का लक्ष्य है।

  • 80 हजार युवक एवं महिला मंगल दलों को प्रोत्साहन स्वरूप खेल सामग्री उपलब्ध करायी जा रही। 

इनोवेशन दिवस के अवसर पर यू० पी० स्टार्टअप संवाद और एक्सपो का आयोजन किया गया जिसमे प्रथम तीन स्टार्टअप्स को क्रमशः 01 लाख, 75 हजार एवं 50 हजार का पुरस्कार तथा शेष 05 को 25-25 हजार रुपये का पुरस्कार प्रदान किया गया। प्रदेश में युवाओं को नवाचार से जोड़ने के लिए इनोवेशन फण्ड की स्थापना पर कार्य किया जा रहा है जिससे प्रदेश में स्टार्टअप ईकोसिस्टम विकसित हो सकेगा।

पी०आर०डी० स्वयं सेवकों के मानदेय में वृद्धि प्रस्तावित है तथा स्वयं सेवकों को लगभग 20 लाख अतिरिक्त रोजगार दिवस उपलब्ध कराये जाने की व्यवस्था की जा रही है। ग्राम पंचायत स्तर पर गठित लगभग 80 हजार युवक एवं महिला मंगल दलों को प्रोत्साहन स्वरूप खेल सामग्री उपलब्ध करायी जा रही है।

मनरेगा योजनान्तर्गत विगत वित्तीय वर्ष 2024-2025 में 26 करोड़ मानव दिवस लक्ष्य के सापेक्ष दिनाँक 8 जनवरी, 2025 तक 27.40 करोड़ मानव दिवस का सृजन किया गया है तथा 3,13,076 परिवारों को 100 दिन का रोजगार प्रदान किया गया है। मानव दिवस सृजन एवं वित्तीय प्रगति में उत्तर प्रदेश देश में प्रथम स्थान पर है। मनरेगा योजनान्तर्गत वित्तीय वर्ष 2024-2025 में महिलाओं की सहभागिता 42 प्रतिशत है।

उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के अन्तर्गत विगत 6 वर्षों में 15.25 लाख युवाओं को निःशुल्क रोजगारपरक प्रशिक्षण प्रदान कर 5.71 लाख युवाओं को रोजगार / स्वरोजगार से जोड़कर सेवायोजित किया गया। अप्रेन्टिस योजना के अन्तर्गत अब तक 2.54,335 युवाओं को उद्योगों व एम.एस.एम.ई. में योजित किया गया।

एक जनपद एक उत्पाद वित्त पोषण योजनान्तर्गत वर्ष 2024-2025 में 17 दिसम्बर, 2024 तक 1,838 लाभार्थियों को लाभान्वित कराते हुये लगभग 10,560 लाख रुपये की मार्जिन मनी वितरित की गयी तथा 34,500 रोजगार का सृजन हुआ। निवेश मित्र के माध्यम से वित्तीय वर्ष 2024-2025 में माह नवम्बर, 2024 तक कुल 6,62,672 उद्यम पंजीकृत हुए जिसमें 59,64,048 रोजगारों का सृजन हुआ।

  • विभिन्न पदों पर सीधी भर्ती के 92.919 पदों पर भर्ती हेतु कार्यवाही प्रचलित

वर्ष 2017 से दिसम्बर 2024 तक आरक्षी एवं समकक्ष, उप निरीक्षक एवं समकक्ष तथा लिपिक संवर्ग आदि के विभिन्न पदों पर कुल 1,56,206 भर्तियां की गयी। वर्तमान में अराजपत्रित श्रेणी के विभिन्न पदों पर सीधी भर्ती के 92.919 पदों पर भर्ती हेतु कार्यवाही प्रचलित है। लगभग 96 लाख एम.एस.एम.ई. इकाईयों की संख्या तथा 1.65 करोड़ लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने के दृष्टिकोण से उत्तर प्रदेश देश के सभी राज्यों में अग्रणी है।

श्रमिक कल्याण

मातृत्व शिशु एवं बालिका मदद योजना के अन्तर्गत माह सितम्बर, 2024 तक 6,22.974 लाभार्थी हैं। निर्माण कामगार मृत्यु व दिव्यांगता सहायता योजना के अन्तर्गत माह सितम्बर, 2024 तक 41,453 लाभार्थी हैं।

कन्या विवाह सहायता योजना के अन्तर्गत पंजीकृत श्रमिक के कुल 02 बालिकाओं के स्वजातीय विवाह की स्थिति में 55,000 रूपये तथा अन्तर्जातीय विवाह की स्थिति में 61,000 रूपये की रकम दिये जाने का प्राविधान है। निर्माण कामगार गम्भीर बीमारी सहायता योजना के अन्तर्गत गम्भीर बीमारियों का इलाज सरकारी अस्पतालों में कराने पर इलाज के व्यय की शत प्रतिशत प्रतिपूर्ति करायी जा रही है।

उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार बोर्ड में पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना/मुख्यमंत्री जन-आरोग्य योजना से आच्छादित कराये जाने की कार्यवाही की जा रही है। आवासीय विद्यालय योजना प्रदेश के 12 जनपदों में संचालित है, जिनमें प्रत्येक विद्यालय में 100-100 बालक एवं बालिकाओं को प्रदेशित किये जाने का प्रावधान है।

निर्माण श्रमिकों के बच्चों को निशुल्क गुणवत्तापूर्ण एवं उद्देश्यपरक शिक्षा उपलब्ध कराने की दृष्टि से प्रदेश के प्रत्येक मण्डल में 360 बच्चों की क्षमता वाला एक-एक अटल आवासीय विद्यालय स्थापित है। इन विद्यालयों की क्षमता भविष्य में बढ़ाकर 1000 प्रति विद्यालय किया जायेगा।

  • प्रदेश 9.57 करोड़ खातों के साथ देश में प्रथम स्थान

वर्तमान में प्रदेश में बैंकों की 20,416 शाखायें, 4,00,932 बैंक मित्र एवं बी०सी०सखी तथा 18,747 ए०टी०एम० सहित कुल 4,40,095 बैंकिंग केन्द्रों के माध्यम से बैंकिग सुविधायें उपलब्ध करायी जा रही है। प्रधानमंत्री जनधन योजना के अन्तर्गत प्रदेश 9.57 करोड़ खातों के साथ देश में प्रथम स्थान पर है।

प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजनान्तर्गत अब तक प्रदेश में 6.52 करोड़ नामांकन के साथ उत्तर प्रदेश प्रथम स्थान पर है। प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजनान्तर्गत अब तक प्रदेश में 2.28 करोड़ नामांकन के साथ उत्तर प्रदेश प्रथम स्थान पर है। अटल पेंशन योजनान्तर्गत अब तक प्रदेश में 1.12 करोड़ नामांकन के साथ प्रदेश का उत्कृष्ट प्रदर्शन रहा है।

  • कानून व्यवस्था- साइबर अपराध में प्रयुक्त 13,83,232 मोबाइल नम्बर ब्लॉक कराये गये। (देश में प्रथम स्थान)

किसी भी समाज के सामाजिक आर्थिक उत्थान के लिये सुदृढ़ कानून व्यवस्था का होना पहली शर्त है। जब हमारी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में कार्यभार सम्भाला था उस समय प्रदेश किस प्रकार की विषम कानून व्यवस्था और गुण्डाराज की गिरफ्त में था यह सभी को मालूम है।

हमारे तेजस्वी मुख्यमंत्री के नेतृत्व एवं मार्ग निर्देशन में हमारी सरकार द्वारा प्रदेश में अपराध के प्रति जीरो टॉलरेन्स की नीति अपनाते हुये गुण्डों, माफियाओं और हर अपराध पेशा लोगों के विरूद्ध अभियान चला कर कार्यवाही की गयी।

कश्ती चलाने वालों ने जब हार के दी पतवार हमें।
लहर-लहर तूफान मिले और संग-संग मझधार हमें।
फिर भी दिखलाया है हमने और आगे दिखा भी देंगे।
इन हालातों में आता है दरिया करना पार हमें ।।

अभियोजन की प्रक्रिया को सुदृढ बनाते हुये अपराधियों को विभिन्न न्यायालयों से सजा दिलाई गई। वर्ष 2017 से दिसम्बर 2024 तक प्रदेश के चिन्हित 68 माफिया अपराधियों के विचाराधीन अभियोगों में प्रभावी पैरवी कर 73 अभियोगों में 31 माफिया अपराधियों को आजीवन कारावास/कारावास व अर्थदण्ड की सजा से दण्डित कराया गया है, जिसमें 02 को फांसी की सजा हुई है।

महिलाओं एवं नाबालिगों के विरूद्ध हुए अपराधों में 27,425 अभियोगों, पॉस्को अधिनियम के 11,254 अभियोगों एवं दहेज हत्या की 3,775 अभियोगों में अभियुक्तों को सजा दिलायी गयी। साइबर अपराध में प्रयुक्त 13,83,232 मोबाइल नम्बर ब्लॉक कराये गये। (देश में प्रथम स्थान)। वर्ष 2017 से दिनांक 31.12.2024 तक कुल पंजीकृत 77,210 अभियोगों के सापेक्ष में 66,475 अभियोगों का निस्तारण कर 43,202 अभियुक्तगणों के विरूद्ध कार्यवाही करते हुए रू0 320.89 करोड़ की धनराशि बरामद की गयी।

अपराधों पर अंकुश लगाये जाने की प्रभावी कार्यवाही के तहत दिनाँक 20 मार्च, 2017 से 23 जनवरी, 2025 तक प्रदेश के विभिन्न जनपदों के दुर्दान्त अपराधियों के विरूद्ध कार्यवाही के दौरान कुल 221 अपराधी मुठभेड़ में मारे गये एवं 8022 घायल हुये। वर्ष 2017 से पूर्व उ०प्र० मे मात्र 04 विधि विज्ञान प्रयोगशालाएं स्थापित थीं। वर्ष 2017 के पश्चात 08 नये जनपद मण्डल में विधि विज्ञान प्रयोगशालाओं की स्थापना की गयी। जनपद अयोध्या, बस्ती, बाँदा, आजमगढ़, मीरजापुर एवं सहारनपुर में 06 नयी विधि विज्ञान प्रयोगशालाओं की स्थापना का कार्य प्रचलित है।

  • कारागार प्रशासन- 24 कारागारों में 3 जी क्षमता के 271 मोबाइल फोन जैमर स्थापित

प्रदेश की 74 कारागारों एवं जनपद न्यायालयों में संचालित वीडियो कान्फेन्सिंग इकाईयों से बन्दियों की रिमाण्ड की कार्यवाही हो रही है। कारागारों की सुरक्षा व्यवस्था हेतु लगभग 4800 सी.सी.टी.वी. कैमरे स्थापित है, जिनकी फीड प्राप्त किये जाने हेतु मुख्यालय में वीडियो वॉल स्थापित है। 24 कारागारों में 3 जी क्षमता के 271 मोबाइल फोन जैमर स्थापित है।

  • वर्तमान में प्रदेश में 80 मेडिकल कालेज

आज से सात-आठ साल पहले प्रदेश में चिकित्सा सुविधायें अत्यन्त जर्जर अवस्था में थीं। प्रत्येक वर्ष प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में संक्रमक रोगों से बड़े पैमाने पर मौतें हुआ करती थीं। प्रदेश में रोगों की पहचान, रोकथाम और इलाज की व्यवस्थायें जनमामान्य को उपलबध नहीं थीं। 

हमने कोविड वैश्विक बीमारी का दौर भी देखा जिसके दौरान प्रदेश में जिस कुशलता के साथ इस विभीषिका का सामना किया गया उसकी प्रशंसा विश्व स्तर पर की गई। आज प्रदेश में चिकित्सा सुविधाओं का प्रसार जिस प्रकार हुआ है. और लगातार हो रहा है वह अदभुत है- 

रात कितनी ही भले हो स्याह आखिर में उसे, मात खानी ही पड़ेगी रोशनी के हाथ से।

चिकित्सा शिक्षा

वर्तमान में प्रदेश में 80 मेडिकल कालेज है जिनमें 44 राज्य सरकार द्वारा संचालित हैं एवं 36 निजी क्षेत्र में है। प्रदेश में 02 एम्स एवं आई०एम०एस०, बी०एच०यू०, वाराणसी तथा जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज, अलीगढ़ संचालित हैं। वर्ष 2024-2025 में 13 स्वाशासी चिकित्सा महाविद्यालय एवं पी०पी०पी० मोड पर 03 जनपदों-महाराजगंज, सम्भल तथा शामली में नवीन मेडिकल कॉलेज स्थापित किये गये हैं।


वर्तमान में प्रदेश में राजकीय एवं निजी क्षेत्र के मेडिकल कालेजों/चिकित्सा संस्थानों/ विश्वविद्यालयों में एम०बी०बी०एस० की 11,800 सीटें तथा पी०जी० की 3971 सीटें उपलब्ध है। केन्द्र सरकार द्वारा वर्ष 2025-2026 में यू०जी० पी०जी० हेतु कुल 10,000 सीटें जोड़े जाने की घोषणा की गई है, जिसमें से 1500 सीटें उत्तर प्रदेश को प्राप्त होंगी। इस हेतु लगभग 2066 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है।

वर्ष 2017 में सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेशियलिटी की कुल सीटों की संख्या 120 थी। शैक्षणिक सत्र 2024-2025 में सीटों की संख्या को बढ़ाकर 250 किया गया। जनपद बलिया तथा बलरामपुर में स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय की स्थापना हेतु क्रमशः 27 करोड़ रुपये तथा 25 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है।

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  • चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण

आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजनान्तर्गत 5.13 करोड़ लोगों के आयुष्मान कार्ड बनाये गये हैं। आयुष्मान कार्ड बनाने में पूरे देश में उत्तर प्रदेश प्रथम स्थान पर है। प्राथमिक स्वास्थ्य इकाईयों को आयुष्मान आरोग्य मन्दिर के रूप में उच्चीकृत किया जा रहा है।

वर्तमान में कुल 22,681 आयुष्मान आरोग्य मन्दिर स्थापित है। उप केन्द्रों से टेलीकन्सलटेशन प्रारम्भ कर ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधायें उपलब्ध कराने का आरम्भ जुलाई, 2020 से किया गया है। प्रदेश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा पोषित पी०पी०पी० मोड पर निःशुल्क डायलिसिस सेवाएं उपलब्ध करायी जा रही हैं। प्रदेश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा पी०पी०पी० मोड पर जनपदीय चिकित्सालयों में सी०टी० स्कैन की निःशुल्क सेवा उपलब्ध करायी जा रही है।

आयुष

प्रदेश के विभिन्न जनपदों में वर्तमान में 2110 आयुर्वेदिक, 254 यूनानी एवं 1585 होम्योपैथिक चिकित्सालयों के साथ ही 08 आयुर्वेदिक कालेज एवं उनसे सम्बद्ध चिकित्सालय, 02 यूनानी कालेज एवं उनसे सम्बद्ध चिकित्सालय तथा 09 होम्योपैथिक कालेज एवं उनसे सम्बद्ध चिकित्सालय संचालित हैं। वित्तीय वर्ष 2025-2026 में महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय, गोरखपुर का निर्माण कार्य पूर्ण किया जाना, जनपद अयोध्या में राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय का निर्माण कार्य पूर्ण किया जाना, जनपद वाराणसी में राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कालेज की स्थापना कराया जाना लक्षित है।

  • अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास

जब वर्ष 2017 में हमने कार्यभार सम्भाला था उस समय प्रदेश में औद्योगिक विकास पूरी तरह से रूका पड़ा था। उद्योग प्रदेश से विस्थापित हो रहे थे। उस समय कोई यह कल्पना भी नहीं कर सकता था कि प्रदेश में उद्योग-धन्धे आयेंगे भी, परन्तु दृढ़ संकल्प, आत्मविश्वास और लक्ष्य प्राप्ति के अथक प्रयासों से कुछ भी सम्भव है-

लोग कहते हैं बदलता है जमाना अक्सर
खास वो हैं जो जमाने को बदल देते हैं।

राज्य सरकार द्वारा ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का सफलतम आयोजन किया गया जिसमें लगभग 36 लाख करोड़ के निवेश के एम.ओ.यू, पर हस्ताक्षर किया गया। 

उक्त समिट के एक वर्ष के अन्दर ही 6.50 लाख करोड़ से अधिक निवेश से या तो वाणिज्यिक उत्पादन प्रारम्भ हो गया है अथवा सम्बन्धित परियोजनायें निर्माणाधीन हैं। जो अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि है।राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में चार नये एक्सप्रेस-वेज के निर्माण का निर्णय लिया गया है।

आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे से गंगा एक्सप्रेस-वे कौसिया, जनपद हरदोई वाया फर्रुखाबाद तक प्रवेश नियंत्रित ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे का निर्माण कराया जायेगा, जिसके लिये 900 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है।

गंगा एक्सप्रेस-वे को प्रयागराज, मिर्जापुर, वाराणसी, चन्दौली होते हुये सोनभद्र से जोड़ने के लिये विन्ध्य एक्सप्रेस-वे के निर्माण के लिये 50 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है।मेरठ को हरिद्वार से जोड़ने हेतु गंगा एक्सप्रेस-वे विस्तारीकरण एक्सप्रेस-वे का निर्माण प्रस्तावित है जिसके लिये 50 करोड़ रुपये की व्यवस्था कराई जा रही है। 

बुन्देलखण्ड रीवा एक्सप्रेस-वे का निर्माण निर्माण प्रस्तावित है जिसके लिये 50 करोड़ रुपये की व्यवस्था कराई जा रही है। बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस-वे के साथ डिफेंस इण्डस्ट्रियल कॉरीडोर परियोजना हेतु लगभग 461 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। इसके अन्तर्गत लगभग साढ़े नौ हजार करोड़ रुपये का निवेश अनुमानित है। लखनऊ में आर्टिफिशियल इन्टेलीजेन्स सिटी के विकास हेतु 5 करोड़ रूपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। साईबर सुरक्षा में टेक्नोलॉजी ट्रान्सलेशन रिसर्च पार्क की स्थापना हेतु 3 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है।

  • सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम

प्रदेश की अर्थव्यवस्था में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। एम.एस.एम.ई. सेक्टर एक महत्वपूर्ण रोजगार परक सेक्टर है, इस प्रकार इन उद्यमों के विकास से जहाँ प्रदेश का समावेशी विकास होता है, वहीं रोजगार सृजन की असीम सम्भावनाएं भी उत्पन्न होती हैं।

प्रदेश के शिक्षित एवं प्रशिक्षित युवाओं को स्वरोजगार से जोड़कर नये सूक्ष्म उद्योगों की स्थापना हेतु वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराये जाने के उद्देश्य से वर्ष 2024-2025 में मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान प्रारम्भ किया गया है। योजना हेतु वित्तीय वर्ष 2025-2026 के बजट में 1000 करोड़ रूपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना हेतु 225 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है।

  • हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग- प्रदेश में लगभग 1.91 लाख हथकरघा बुनकर एवं लगभग 80 हजार हाउस होल्ड

हथकरघा उद्योग कृषि क्षेत्र के बाद उत्तर प्रदेश का सर्वाधिक रोजगार उपलब्ध कराने वाला विकेन्द्रीयकृत कुटीर उद्योग है। प्रदेश में लगभग 1.91 लाख हथकरघा बुनकर एवं लगभग 80 हजार हाउस होल्ड हैं। प्रदेश में 2.58 लाख पावरलूम कार्यरत हैं जिसके माध्यम से लगभग 5.50 लाख पावरलूम बुनकर अपना जीविकोपार्जन कर रहे हैं। 

पीएम मित्र योजना के अन्तर्गत टेक्सटाइल पार्क की स्थापना से सम्बन्धित व्यय हेतु 300 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है।उत्तर प्रदेश वस्त्र गारमेन्टिंग पालिसी, 2022 के क्रियान्वयन हेतु 150 करोड़ रुपये की व्यवस्था कराई जा रही है।अटल बिहारी बाजपेई पॉवरलूम विद्युत फ्लैट रेट योजना हेतु 400 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है।

  • खादी एवं ग्रामोद्योग

प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्र के बेरोजगार व्यक्तियों को खादी एवं ग्रामोद्योग के माध्यम से स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की प्रबल सम्भावनाए है।

मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना के अन्तर्गत वर्ष 2025-2026 में ब्याज उपादान मद में समुचित व्यवस्था प्रस्तावित है, जिसके अन्तर्गत 800 लाभार्थियों को बैंक ऋण उपलब्ध कराया जायेगा, जिससे स्थापित होने वाले नये उद्यमों के माध्यम से 16,000 लोगों को रोजगार उपलब्ध हो सकेगा।पं० दीनदयाल उपाध्याय खादी विपणन विकास सहायता योजना हे 32 करोड़ रूपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। उत्तर प्रदेश माटी कला बोर्ड के संचालन हेतु 11.50 करोड़ रूपये के व्यवस्था प्रस्तावित है।

  • आई०टी० एवं इलेक्ट्रॉनिक्स

उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण नीति 2017 के अन्तर्गत 23.203 करोड़ रूपये तथा उत्तर प्रदेश सूचना प्रौद्योगिकी नीति-20217 के अन्तर्गत 7,004 करोड़ रूपये का निवेश प्रदेश में हुआ है। प्रदेश सरकार की डाटा सेन्टर नीति के अन्तर्गत पूर्व लक्षित 03 डाटा सेन्टर पार्क्स के स्थान पर संशोधित नीति के अन्तर्गत प्रदेश में 30,000 करोड़ रूपये के अनुमानित निवेश से 08 डाटा सेन्टर पार्क्स की स्थापना तथा 900 मेगावॉट क्षमता का लक्ष्य रखा गया है।

सेमीकण्डक्टर क्षेत्र में वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करने के लिये उ०प्र० सेमीकण्डक्टर नीति, 2024 प्रख्यापित की गई है। सेमीकण्डक्टर इकाईयों के लिये डेडीकेटेड प्रावधान आरम्भ करने वाला उत्तर प्रदेश चौथा राज्य है।

राज्य में 8 स्टेट ऑफ आर्ट सेन्टर ऑफ एक्सीलेन्स के केन्द्रों की स्थापना के अन्तर्गत प्रथम सेन्टर ऑफ एक्सीलेन्स का केन्द्र मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में संजय गाँधी पोस्ट ग्रेजुएट इन्स्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइन्सेज में तथा आई.आई.टी. कानपुर नोएडा परिसर में आर्टिफिशियल इन्टेलिजन्स के क्षेत्र में एवं आई.आई.टी. कानपुर परिसर में ड्रोन सेन्टर ऑफ एक्सीलेन्स स्थापित होकर परिचालनरत हो गये हैं।

  • सड़क एवं सेतु- 1450 करोड़ रूपये की बजट व्यवस्था प्रस्तावित

प्रदेश की अर्थव्यवस्था को वन ट्रिलियन डॉलर तक का प्रदेश सरकार के लक्ष्य के दृष्टिगत प्रदेश में नॉर्थ साउथ कॉरिडोर के विकास हेतु मार्गों के चौड़ीकरण/सुदृढीकरण/निर्माण की योजना प्रारम्भ की गयी है, जिसके लिये 200 करोड़ रुपये की बजट व्यवस्था प्रस्तावित है।

प्रदेश में सेतुओं एवं रेल उपरिगामी/अधोगामी सेतुओं के निर्माण हेतु कुल 1450 करोड़ रूपये की बजट व्यवस्था प्रस्तावित है। राज्य राजमार्गों के चौड़ीकरण/सुदृढीकरण कार्यों हेतु 2900 करोड रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है।

राज्य सड़क निधि से सड़कों के अनुरक्षण हेतु 3000 करोड़ रुपये तथा निर्माण हेतु 2800 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। प्रदेश के ग्रामीण मार्गों एवं पुलियों के अनुरक्षण हेतु 2700 करोड़ रुपये की व्यवस्था का प्रस्ताव किया गया है।

कृषि विपणन सुविधाओं हेतु ग्रामीण सेतुओं के निर्माण के लिये 1600 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। शहर वासियों के आवागमन को सुगम बनाने के दृष्टिगत शहरों के बाईपास एवं रिंगरोड तथा चौराहों पर फ्लाईओवर आदि के निर्माण हेतु 1200 करोड़ रुपये की बजट व्यवस्था प्रस्तावित है। औद्योगिक / लॉजिस्टिक पार्क हेतु मार्गों के चौड़ीकरण/सुदृढीकरण/निर्माण कार्य हेतु 800 करोड़ रुपये की बजट व्यवस्था प्रस्तावित है।

मुख्यमंत्री ग्राम योजनान्तर्गत ग्रामीण मार्गों के नवनिर्माण पुनर्निर्माण / मिसिंग लिंक के निर्माण हेतु नई योजना प्रारम्भ की जा रही है। इस योजना हेतु 200 करोड़ रुपये की बजट व्यवस्था प्रस्तावित है। सड़क सुरक्षा के दृष्टिगत दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्रों के सुधार, रोड सेफ्टी कार्यों एवं सौन्दयीकरण हेतु 250 करोड़ रुपये की बजट व्यवस्था प्रस्तावित है।

  • सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग

मध्य गंगा नहर परियोजन स्टेज-2, कनहर सिंचाई परियोजना, महाराजगंज में रोहिन नदी बैराज के पूर्ण होने पर 4.74 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचन क्षमता सृजित होगी जिससे 6.77 लाख कृषक लाभान्वित होंगे। विभिन्न जनपदों में 6,600 राजकीय नलकूपों के आधुनिकीकरण, 2100 नवीन राजकीय नलकूपों के निर्माण तथा डार्क जोन में स्थित 569 असफल राजकीय नलकूपों के पुनर्निर्माण का कार्य प्रगति पर है। 

इन कार्यों से लगभग 238 लाख हेक्टेयर सिंचन क्षमता की पुनर्स्थापना होगी तथा लगभग 2.12 लाख कृषक परिवार लाभान्वित होंगे। नहरों एवं सरकारी नलकूपों से किसानों को मुफ्त पानी की सुविधा हेतु 1300 करोड़ रुपये की बजट व्यवस्था प्रस्तावित है।

प्रदेश के 1750 असफल नलकूपों के पुनर्निर्माण हेतु 200 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। डार्क जोन के असफल 569 नलकूपों के लिये लगभग 9 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। प्रदेश सरकार द्वारा 1551 बाढ़ परियोजनायें पूर्ण की गयी जिससे 32.87 लाख हेक्टेयर क्षेत्र सुरक्षित हुआ है तथा करोड़ों की आबादी लाभान्वित हुई है।

  • नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति

प्रदेश में जल जीवन मिशन के अन्तर्गत प्रदेश के समस्त 2.67 करोड ग्रामीण परिवारों को क्रियाशील गृह नल संयोजन प्रदान कर शुद्ध एवं सत्त पेयजल उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।

उक्त लक्ष्य के सापेक्ष 2.34 करोड़ घरों में क्रियाशील गृह नल संयोजन उपलब्ध कराया जा चुका है। पीने का पानी घर में उपलब्ध होने का महत्व वहीं समझ सकता है जिसके पास यह सुविधा नहीं हो और जिसके घर की महिलाओं, बच्चों को पीने के पानी के लिये दूर-दराज से पानी भरकर लाने के लिये रोज घर से निकलना पड़ता हो।

● घरों में नल से पानी उपलब्ध होने से इन परिवारों को बहुत बड़ी राहत मिली है-

कोई ना हो उदास तो समझो बसन्त है
हर घर में हो उल्लास तो समझो बसन्त है
जो कंठ तरसते रहे पानी को हमेशा
बुझ जाये उनकी प्यास तो समझो बसन्त है।

गंगा को प्रदूषण से मुक्त बनाये रखने एवं उसमें दूषित जल का उत्प्रवाह रोकने के लिये सीवरेज संबंधी कुल 67 परियोजनाएं स्वीकृत हुई है, जिनकी कुल स्वीकृत लागत 14,823 करोड़ रूपये है। वर्तमान तक 39 परियोजनाएं पूर्ण कर संचालित की जा रही है तथा शेष परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं।

जल जीवन मिशन के अन्तर्गत ग्रामीण पेयजल योजनाओं के लिये सामुदायिक अंशदान हेतु 4500 करोड़ रुपये तथा जल जीवन मिशन योजना के अन्तर्गत अनुरक्षण एवं संचालन हेतु करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री लघु सिंचाई योजना के लिये 1100 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है।

ऊर्जा- ग्रामीण क्षेत्र में 20 घण्टे 35 मिनट, तहसील मुख्यालय में 22 घण्टे 36 मिनट तथा जनपद मुख्यालय में 24 घण्टे रही

वर्ष 2017 के पहले प्रदेश में बिजली आपूर्ति की व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई थी। न छात्रों को पढ़ाई के लिये बिजली मिलती थी, न ही किसानों को सिंचाई के लिये। अस्पतालों और औद्योगिक इकाईयों को बिजली नहीं मिलती थी। गर्मियों में पूरे प्रदेश की जनता बदहाल रहती थी। रातों में शहर के शहर अंधेरे में डूबे रहते थे। 

आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। लोगों के घरों में रोशनी है, गर्मियों में निर्बाध बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित की गई है.प किसानों को सिंचाई के लिये बिजली उपलब्ध है। 

● हमारी सरकार ने इस भावना के साथ कार्य किया है-

अजमते जिन्दगी की कसम है हमें, जरें-जरें में महफिल सजा देंगे हम, तेरे दीवारो-दर जगमगा देंगे हम।

वर्ष 2024-2025 में माह दिसम्बर तक औसत आपूर्ति ग्रामीण क्षेत्र में 20 घण्टे 35 मिनट, तहसील मुख्यालय में 22 घण्टे 36 मिनट तथा जनपद मुख्यालय में 24 घण्टे रही। प्रदेश में दिनांक 01 अप्रैल, 2022 से दिनांक 31 दिसम्बर, 2024 तक कुल 1.87,873 निजी नलकूप संयोजन निर्गत किये गये। कृषि फीडरों के पृथक्कीकरण की योजना के अन्तर्गत 4.680 फीडर्स के लक्ष्य के सापेक्ष 3,817 कृषि फीडर्स का निर्माण कराया जा चुका है।

उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम द्वारा वर्ष 2024-2025 में दिसम्बर माह तक 7140 मेगावॉट ताप विद्युत उत्पादन क्षमता व संयुक्त उपक्रम में चलित 1980 मेगावॉट ताप विद्युत उत्पादन क्षमता एवं 37,056 मिलियन यूनिट ताप विद्युत उत्पादन प्राप्त किया गया। गैर पारम्परिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने हेत पम्प स्टोरेज जल विद्युत परियोजना की स्थापना 3953 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित है। यह परियोजना चार वर्षों में पूर्ण होगी। परियोजना हेतु 50 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है।

कोल इण्डिया लिमिटेड के साथ उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड द्वारा संयुक्त उपक्रम के रूप में जनपद जालौन में 500 मेगावॉट की सौर ऊर्जा परियोजना की स्थापना प्रस्तावित है। परियोजना की लागत 2500 करोड़ रुपये अनुमानित है। परियोजना हेतु 150 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है।एन.टी.पी.सी. ग्रीन एनर्जी लिमिटेड तथा उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड द्वारा संयुक्त उपक्रम के माध्यम से तहसील गरौठा जनपद झाँसी में 200 मेगावॉट सौर ऊर्जा संयंत्र की स्थापना प्रस्तावित है, जिसकी अनुमानित लागत 500 करोड़ रुपये है। परियोजना हेतु 80 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है।

  • अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत

प्रदेश में सौर ऊर्जा विद्युत उत्पादन को बढ़ावा देने के लिये प्रख्यापित उत्तर प्रदेश सौर ऊर्जा नीति-2022 के अन्तर्गत आगामी 05 वर्षों में 22,000 मेगावॉट विद्युत उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। अयोध्या शहर को मॉडल सोलर सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त प्रदेश के 16 नगर निगमों एवं नोएडा शहर को भी सोलर सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश राज्य जैव ऊर्जा नीति-2022 के अन्तर्गत कम्प्रेस्ड बायो गैस, बायो-कोल, बायो-डीजल/बायो-एथेनॉल से सम्बन्धित 53 परियोजनाओं की स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है तथा 24 परियोजनाएं स्थापित की जा चुकी हैं।सौर ऊर्जा नीति-2022 के अन्तर्गत रोजगार सृजन एवं कौशल विकास हेतु वर्ष 2025-2026 में 3000 सूर्यमित्रों को कौशल विकास हेतु प्रशिक्षण दिया जायेगा।

  • आवास एवं शहरी नियोजन

प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अन्तर्गत लगभग 17 लाख आवास पूर्ण कर लाभार्थियों को आवंटित किये जा चुके हैं। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में रीजनल रैपिड ट्रॉजिट सिस्टम का दिल्ली-गाजियाबाद मेरठ कॉरिडॉर संचालित है। सम्पूर्ण कॉरिडॉर का निर्माण कार्य जून, 2025 तक पूरा किये जाने का अनुमान है। आवास एवं विकास परिषद तथा विकास प्राधिकरणों में टाउन शिप विकसित किये जाने हेतु मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण/नये शहर प्रोत्साहन योजना लागू है।

प्रदेश की राजधानी लखनऊ के आस-पास के क्षेत्र को सम्मिलित करते हुये स्टेट कैपिटल रीजन गठित किये जाने तथा अन्य रीजन्स के रीजनल प्लान तैयार किये जाने हेतु उत्तर प्रदेश स्टेट कैपिटल रीजन एवं अन्य रीजन विकास प्राधिकरण अधिनियम, 2024 प्रख्यापित है। स्टेट कैपिटल रीजन में 6 जिले क्रमश: लखनऊ, हरदोई, सीतापुर, बाराबंकी, रायबरेली तथा उन्नाव सम्मिलित हैं।

  • नगर विकास- स्मार्ट सिटी योजना हेतु 400 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित

अमृत योजना 2.0 के अन्तर्गत अब तक लगभग 39 लाख पेयजल कनेक्शन उपलब्ध कराये गये हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 हेतु 3150 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है तथा प्रधानमंत्री अवास योजना (शहरी) 20 हेतु लगभग 1732 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। वर्ष 2021 में प्रारम्भ की गयी अमृत 2.0 योजना हेतु 4100 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है।

मुख्यमंत्री ग्रीन रोड इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेन्ट स्कीम (अर्बन) के अन्तर्गत 800 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। प्रदेश के शहरों को बाढ़ की समस्या एवं जलभराव से मुक्ति हेतु अर्बन फ्लड एवं स्टार्म वाटर ड्रेनेज योजना प्रारम्भ की गयी जिसके लिये 1000 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है।

मुख्यमंत्री नगरीय अल्प विकसित मलिन बस्ती विकास योजना हेतु 400 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। नगरीय सेवायें और अवस्थापना विकास की नई योजना हेतु 50 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। राज्य स्मार्ट सिटी योजना हेतु 400 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। कान्हा गौशाला एवं बेसहारा पशु आश्रय योजना हेतु 450 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है।

  • नागरिक उड्डयन

वर्ष 2017 के पूर्व प्रदेश में केवल 4 एयरपोर्ट क्रियाशील थे जबकि वर्तमान में प्रदेश में 16 एयरपोर्ट क्रियाशील हैं। प्रदेश में 4 अन्तर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट क्रियाशील हैं। जेवर एयरपोर्ट के शीघ्र ही संचालित होने के साथ प्रदेश में 5 अन्तर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट हो जायेंगे।

वाराणसी, अलीगढ़ तथा श्रावस्ती एयरपोर्ट का विस्तार, गोरखपुर एयरपोर्ट पर नये टर्मिनल भवन का विकास, आगरा एयरपोर्ट पर नये सिविल एवं तत्संबंधी सुविधाओं का विकास तथा ललितपुर स्थित हवाई पट्टी को एयरपोर्ट के रूप में विकसित किये जाने का निर्णय लिया गया है। घरेलू उड़ानों के अतिरिक्त उत्तर प्रदेश सरकार अब अन्तर्राष्ट्रीय गंतव्यों तक उड़ाने संचालित करने की दिशा में कार्य कर रही है। प्रदेश में जिस प्रकार अवस्थापना सुविधाओं का चतुर्दिक विकास और आयागमन की सुविधाओं का द्रुत गति से विस्तार हुआ है, वह वर्ष 2017 के पहले प्रदेश में रही सरकार के लिये सपने में भी शायद सम्भव नहीं था।

● परन्तु-

लोग यहाँ ख्वाब दिखाते हैं अक्सर
हर एक ख्वाब को सच कर दिया है योगी ने।

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