पंजाब स्थानीय निकाय चुनाव में मतगणना से पहले ही आम आदमी पार्टी को मिली बंपर बढ़त, 80 प्रत्याशी निर्विरोध जीते।
पंजाब की राजनीति में बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले स्थानीय निकाय चुनावों (लोकल बॉडी इलेक्शंस) के नतीजों को लेकर राज्य भर
- बिना वोटिंग के ही पार्षद बन गए अस्सी उम्मीदवार, विपक्षी दलों के मैदान छोड़ने से सत्ताधारी दल का दबदबा कायम
- चुनावी नतीजों की घोषणा से पहले ही 'आप' ने दर्ज की ऐतिहासिक जीत, शिरोमणि अकाली दल और कांग्रेस बेहद पीछे छूटे
पंजाब की राजनीति में बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले स्थानीय निकाय चुनावों (लोकल बॉडी इलेक्शंस) के नतीजों को लेकर राज्य भर में उत्सुकता का माहौल बना हुआ है। शुक्रवार सुबह 8 बजे से राज्य के विभिन्न जिलों में निर्धारित केंद्रों पर मतों की गिनती का काम बेहद कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शुरू हो गया है। हालांकि, इस मतगणना प्रक्रिया के पूरी तरह संपन्न होने और अंतिम परिणाम सामने आने से पहले ही राज्य के राजनैतिक परिदृश्य में एक बहुत बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। पंजाब के चुनावी इतिहास में यह एक दुर्लभ वाकया है जब मतपेटियों के खुलने से पहले ही कुल अस्सी उम्मीदवारों ने आधिकारिक तौर पर निर्विरोध जीत हासिल कर ली है। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम ने मतगणना के पहले ही दौर से पूर्व ही विभिन्न राजनैतिक दलों के बीच की हार-जीत के समीकरणों को पूरी तरह से प्रभावित कर दिया है।
इस बार के स्थानीय निकाय चुनावों में सबसे खास और दिलचस्प बात यह रही कि इन अस्सी निर्विरोध चुने गए विजेताओं के खिलाफ किसी भी अन्य राजनैतिक दल या फिर किसी भी निर्दलीय उम्मीदवार ने अपना नामांकन पत्र ही दाखिल नहीं किया था। नामांकन वापस लेने की समय सीमा समाप्त होने के बाद जब चुनाव आयोग द्वारा अंतिम सूची की समीक्षा की गई, तो इन सीटों पर केवल एक-एक उम्मीदवार ही मैदान में शेष बचे थे, जिसके कारण नियमानुसार उन्हें बिना किसी मतदान के ही सीधे विजयी घोषित कर दिया गया। बिना एक भी वोट डाले सीधे तौर पर जीत की दहलीज पार करने वाले इन प्रत्याशियों में राज्य की सत्ताधारी पार्टी आम आदमी पार्टी (आप) के उम्मीदवारों की संख्या सबसे अधिक है, जिसने विपक्षी खेमे में भारी बेचैनी पैदा कर दी है।
निकाय चुनाव की इस प्रारंभिक लेकिन बेहद महत्वपूर्ण आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, निर्विरोध जीतने वाले अस्सी प्रत्याशियों में से अकेले आम आदमी पार्टी के कुल 63 उम्मीदवारों ने एकतरफा जीत दर्ज की है। इस बंपर शुरुआत के साथ ही सत्ताधारी दल ने मतगणना की शुरुआत होने से पहले ही अपने प्रतिद्वंद्वियों पर एक बहुत बड़ी मनोवैज्ञानिक और राजनैतिक बढ़त हासिल कर ली है। इसके विपरीत, राज्य के अन्य प्रमुख राजनैतिक दल इस दौड़ में बहुत पीछे छूट गए हैं। पंजाब की राजनीति में कभी बेहद मजबूत पकड़ रखने वाले क्षेत्रीय दल शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) के केवल 9 उम्मीदवार ही निर्विरोध निर्वाचित होने में सफल रहे हैं, जबकि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को इस सूची में महज 1 सीट से ही संतोष करना पड़ा है, वहीं 7 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने बिना किसी मुकाबले के बाजी मारी है। पंजाब में चल रहे इन स्थानीय निकाय चुनावों को अगले वर्ष यानी 2027 में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव के 'सेमीफाइनल' के रूप में देखा जा रहा है। यही वजह है कि आम आदमी पार्टी, कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी और शिरोमणि अकाली दल जैसी सभी प्रमुख पार्टियों ने जमीनी स्तर पर अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। मतगणना से ठीक पहले आए इन नतीजों ने स्पष्ट रूप से सत्ताधारी दल के सांगठनिक ढांचे की मजबूती को प्रदर्शित किया है, जिसने ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों में विपक्ष के मुकाबले अपना मजबूत आधार तैयार कर लिया है।
राज्य निर्वाचन आयोग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, यह चुनाव पंजाब की 103 नागरिक इकाइयों के लिए आयोजित किया गया था, जिसमें कुल 12 नगर निगम, 76 नगरपालिका परिषद और 21 नगर पंचायतें शामिल हैं। इन सभी स्थानीय निकायों के कुल 1,896 वार्डों में पार्षदों के पदों के लिए कुल 7,555 उम्मीदवार चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। मंगलवार को हुए मतदान के दौरान राज्य भर में कुल 63.94 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। हालांकि, यह मतदान प्रतिशत पिछले चुनाव की तुलना में करीब साढ़े नौ फीसदी कम दर्ज किया गया है, जिसके पीछे शहरी क्षेत्रों में वोटिंग के प्रति देखी गई उदासीनता को एक मुख्य कारण माना जा रहा है।
इस चुनाव के दौरान राज्य के कई हिस्सों से छिटपुट हिंसक झड़पों, पथराव और बूथ कैप्चरिंग के आरोपों की खबरें भी सामने आई थीं, जिसके कारण बठिंडा, पटियाला, समाना और मजीठा जैसे संवेदनशील इलाकों में स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई थी। इन हिंसक घटनाओं और आपसी विवादों को देखते हुए ही शुक्रवार को होने वाली मतगणना के लिए पूरे राज्य में विशेष सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं। जिन सरकारी स्कूलों और कॉलेजों को काउंटिंग सेंटर बनाया गया है, वहां स्थानीय पुलिस के साथ-साथ पंजाब आर्म्ड पुलिस की अतिरिक्त कंपनियों को तैनात किया गया है और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरे राज्य में 'ड्राई डे' घोषित करने के साथ ही संबंधित शैक्षणिक संस्थानों में अवकाश की घोषणा की गई है।
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