Sitapur: नैमिषारण्य में हर्षोल्लास से मनाई गई नाग पंचमी, गुड़िया पर्व की अनूठी परंपरा ने मोहा मन
सावन मास की पंचमी यानी नाग पंचमी का पर्व इस बार सोमवार को पड़ने से नैमिषारण्य में श्रद्धा और आस्था का विशेष
रिपोर्ट: सुरेंद्र मोठी, नैमिषारण्य
नैमिषारण्य/सीतापुर: सावन मास की पंचमी यानी नाग पंचमी का पर्व इस बार सोमवार को पड़ने से नैमिषारण्य में श्रद्धा और आस्था का विशेष रंग देखने को मिला। एक ओर शिवालयों में भगवान शिव, शिवलिंग और नाग देवता की विधि-विधान से पूजा-अर्चना हुई, वहीं दूसरी ओर नैमिष की ऐतिहासिक परंपरा गुड़िया पर्व भी पूरे उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया।
पर्व को लेकर नैमिषारण्य सहित आसपास के गांवों में एक दिन पहले से ही तैयारियां शुरू हो गई थीं। सोमवार की शाम महिलाएं, बच्चे और पुरुष नए परिधान पहनकर बड़ी संख्या में होली टीला पहुंचे। यहां महिलाओं ने गुड़िया को बड़े लाड़-प्यार और श्रद्धा के साथ झूला झुलाया। ढोल-मंजीरों की थाप और गुड़िया पर्व के पारंपरिक गीतों से पूरा वातावरण उत्सवमय हो उठा।
बदल रही परंपरा, सम्मान के साथ झुलाई जा रही गुड़िया
नैमिषारण्य में प्राचीन काल से चली आ रही गुड़िया को पीटने की चली आ रही परंपरा में अब बदलाव देखने को मिल रहा है। नई पीढ़ी और नगरवासियों के एक वर्ग का मानना है कि गुड़िया को पीटना हिंसा और अपमान का प्रतीक है। इसी सोच के साथ कई परिवारों में अब गुड़िया को पीटने के बजाय उसे सम्मानपूर्वक झुलाकर विदा करने की परंपरा को बढ़ावा दिया जा रहा है।
महिलाओं का कहना है कि गुड़िया को सम्मान के साथ झुलाना समाज में बेटियों और महिलाओं के प्रति सम्मान का सकारात्मक संदेश देता है। हालांकि, कुछ परिवारों में पूर्वजों से चली आ रही रीति के अनुसार बच्चों ने गुड़िया को पीटकर भी परंपरा निभाई।
शिवालयों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ किया दर्शन पूजन
नाग पंचमी सोमवार को पड़ने के कारण नैमिषारण्य के प्रमुख शिव मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ रही। भक्तों ने भगवान शिव का जलाभिषेक कर नाग देवता की पूजा की और सुख-समृद्धि की कामना की। श्रद्धालुओं ने मां ललिता देवी मंदिर, मां छेमकाया, बाबा भूतेश्वर नाथ, ललितेश्वर महादेव और सिद्धेश्वर नाथ महादेव मंदिर में दर्शन-पूजन किया।
गुड़िया पर्व के बाद नगरवासी एक-दूसरे के घर पहुंचकर कुशलक्षेम पूछते नजर आए। बच्चों और महिलाओं ने अपने से बड़ों के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया। देर शाम तक घर-घर मेल-मिलाप और शुभकामनाओं का दौर चलता रहा।
नाग पंचमी और गुड़िया पर्व ने एक बार फिर नैमिषारण्य की लोक परंपरा, धार्मिक आस्था और सामाजिक मेल-जोल की खूबसूरत तस्वीर पेश की। पर्व में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी वर्गों की सहभागिता रही और पूरा क्षेत्र उत्सव के रंग में रंगा दिखाई दिया।
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