मथुरा के परिक्रमा मार्ग में भंडारे को लेकर दो गुटों में भीषण खूनी संघर्ष, खुलेआम ताबड़तोड़ फायरिंग से इलाके में मचा हड़कंप।
धार्मिक और आस्था की नगरी मथुरा के महोली गांव क्षेत्र में उस समय अचानक अफरा-तफरी और दहशत का माहौल पैदा हो गया
- पुरुषोत्तम मास की चौरासी कोस परिक्रमा के दौरान पुरानी रंजिश में बरसीं गोलियां, आधा दर्जन लोग गंभीर रूप से घायल
- धार्मिक नगरी मथुरा में हिंसक झड़प के बाद पुलिस प्रशासन सख्त, लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज
धार्मिक और आस्था की नगरी मथुरा के महोली गांव क्षेत्र में उस समय अचानक अफरा-तफरी और दहशत का माहौल पैदा हो गया, जब पवित्र चौरासी कोस परिक्रमा मार्ग गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज उठा। पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर जहां देश-विदेश से आए श्रद्धालु भक्ति भाव में लीन होकर परिक्रमा कर रहे थे, वहीं स्थानीय स्तर पर चल रही एक पुरानी रंजिश ने बेहद हिंसक रूप अख्तियार कर लिया। परिक्रमा मार्ग के समीप महोली इलाके में एक भंडारे के आयोजन को लेकर दो स्थानीय पक्ष आमने-सामने आ गए। शुरुआत में दोनों पक्षों के बीच मामूली कहासुनी और बहस हुई, लेकिन देखते ही देखते इस विवाद ने एक बड़े खूनी संघर्ष का रूप ले लिया, जिससे पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई।
दोनों पक्षों के बीच बढ़ता हुआ विवाद इस कदर हिंसक हो गया कि लाठी-डंडों के साथ-साथ हथियारों का खुला प्रदर्शन होने लगा। कुछ ही मिनटों के भीतर दोनों ओर से लाठियां चलने लगीं और पथराव शुरू हो गया, जिसने वहां मौजूद श्रद्धालुओं और राहगीरों के बीच भगदड़ जैसी स्थिति पैदा कर दी। बात यहीं नहीं रुकी, बल्कि गुस्से से आगबबूला हो चुके कुछ लोगों ने अवैध असलहे निकालकर सरेआम ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। अचानक हुई इस अंधाधुंध गोलाबारी से परिक्रमा मार्ग में भजन-कीर्तन कर रहे श्रद्धालु अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे और दुकानों के शटर धड़ाधड़ गिरने लगे। पवित्र क्षेत्र में इस तरह की हिंसक वारदात ने कानून व्यवस्था की स्थिति को पूरी तरह से हिलाकर रख दिया।
इस भीषण हिंसक झड़प और दोनों तरफ से हुई अंधाधुंध गोलीबारी की चपेट में आने के कारण लगभग आधा दर्जन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। गोलियों के छर्रे और लाठी-डंडों के वार से घायल हुए लोग जमीन पर लहूलुहान होकर गिर पड़े, जिससे मौके पर चीख-पुकार मच गई। घटना की भयावहता को देखते हुए स्थानीय लोगों ने तुरंत एंबुलेंस और पुलिस को इस मामले की जानकारी दी। मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने स्थानीय नागरिकों की मदद से सभी घायलों को तुरंत एंबुलेंस के जरिए नजदीकी जिला अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र भिजवाया, जहां गंभीर रूप से घायल कुछ लोगों की नाजुक स्थिति को देखते हुए उन्हें उच्च चिकित्सा केंद्र के लिए रेफर कर दिया गया। स्थानीय स्तर पर जांच में यह बात सामने आई है कि दोनों पक्षों के बीच काफी समय से पुरानी रंजिश और वर्चस्व की लड़ाई चल रही थी। पुरुषोत्तम मास के दौरान चौरासी कोस परिक्रमा मार्ग पर एक विशेष स्थान पर भंडारा लगाने को लेकर दोनों गुट अपना-अपना दावा ठोक रहे थे। एक पक्ष द्वारा भंडारे की तैयारी शुरू करते ही दूसरे पक्ष ने इसका कड़ा विरोध किया, जिसके बाद पुरानी दुश्मनी की आग भड़क उठी और इस पूरी हिंसक घटना को अंजाम दिया गया।
इस संवेदनशील और पवित्र धार्मिक क्षेत्र में हुई इतनी बड़ी वारदात की सूचना मिलते ही पुलिस के आला अधिकारी भारी पुलिस बल और पीएसी के जवानों के साथ तुरंत महोली गांव पहुंचे। पुलिस ने पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया और परिक्रमा मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था को बेहद कड़ा कर दिया ताकि श्रद्धालुओं में सुरक्षा का भाव पैदा किया जा सके। तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने खुद कमान संभाली और घटनास्थल का मुआयना किया। पुलिस ने मौके से खाली कारतूस और अन्य साक्ष्य एकत्र किए और आरोपियों की धरपकड़ के लिए अलग-अलग टीमों का गठन कर आसपास के संभावित ठिकानों पर छापेमारी शुरू कर दी।
धार्मिक यात्रा के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने में नाकाम रहने और इलाके में इतनी बड़ी हिंसक घटना हो जाने के कारण पुलिस विभाग में भी हड़कंप मच गया है। वरिष्ठ अधिकारियों ने इस पूरे मामले में स्थानीय पुलिस स्तर पर बरती गई लापरवाही को बेहद गंभीरता से लिया है। घटना के वक्त समय पर रेस्पॉन्स न देने और क्षेत्र में खुफिया तंत्र की विफलता को देखते हुए संबंधित क्षेत्र के जिम्मेदार पुलिसकर्मियों और चौकी प्रभारी के खिलाफ तत्काल प्रभाव से बड़ी निलंबन की कार्रवाई की गई है। पुलिस विभाग का मानना है कि यदि स्थानीय पुलिस सजग रहती और पुरानी रंजिश को भांप लेती, तो पवित्र परिक्रमा मार्ग पर इस तरह के खूनी संघर्ष को आसानी से रोका जा सकता था।
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