मशहूर शायर बशीर बद्र का निधन, उर्दू अदब और ग़ज़ल की दुनिया में शोक की लहर
उत्तर प्रदेश के कानपुर में जन्मे बशीर बद्र की शिक्षा अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से हुई, जहां उन्होंने एमए उर्दू में टॉप किया और उन्हें गोल्ड मेडल मिला। बाद में उन्होंने पीएचडी भी की और मेरठ के कॉलेज में पढ़ाया। उनके गज़ल संग्रह 'इकाई', 'इमेज' और '
उर्दू शायरी और ग़ज़ल की दुनिया के चमकते सितारे डॉक्टर बशीर बद्र का निधन हो गया है। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उन्होंने अपनी शायरी और खास अंदाज से भारत ही नहीं बल्कि अमेरिका, पाकिस्तान, कनाडा और दुबई सहित पूरी दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बनाई थी। वे उन गिने-चुने रचनाकारों में शामिल थे, जिन्हें ग़ज़ल का असली प्रतिनिधि माना जाता था। वरिष्ठ लेखक नामवर सिंह ने भी उनके बारे में लिखा था कि बशीर बद्र समकालीन दुनिया में ग़ज़ल के सबसे लोकप्रिय शायर हैं।
उत्तर प्रदेश के कानपुर में जन्मे बशीर बद्र की शिक्षा अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से हुई, जहां उन्होंने एमए उर्दू में टॉप किया और उन्हें गोल्ड मेडल मिला। बाद में उन्होंने पीएचडी भी की और मेरठ के कॉलेज में पढ़ाया। उनके गज़ल संग्रह 'इकाई', 'इमेज' और 'आमद' के लिए उन्हें उत्तर प्रदेश और बिहार उर्दू एकेडमी द्वारा सम्मानित किया गया था। कला और साहित्य के क्षेत्र में उनके बेहतरीन योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें 'पद्म श्री' सम्मान से भी नवाजा था। इसके अलावा उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार सहित देश के कई बड़े सम्मान मिले।
बशीर बद्र का देवबंद और मेरठ से गहरा नाता रहा। मेरठ में हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान जब उनके घर को नुकसान पहुंचाया गया, तो वे गहरे दुख के साथ हमेशा के लिए भोपाल चले गए थे। देवबंद में आयोजित होने वाले मुशायरों में वे बेहद सादगी के साथ शामिल होते थे। राहत इंदौरी और मुनव्वर राना के बाद बशीर बद्र के जाने से उर्दू अदब और मुशायरों के एक बड़े युग का अंत हो गया है, जिसकी भरपाई होना बेहद मुश्किल है।
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