Special Article: कुटिलता की चरम सीमा को पार करते आधुनिक कालनेमि
अयोध्या राम मंदिर का चढावा चोरी विवाद निश्चय ही सनातन संस्कृति के अभ्युदय काल में एक दुखद अध्याय है। अब, जब चढावा चोरी
लेखक - मृत्युंजय दीक्षित
अयोध्या राम मंदिर का चढावा चोरी विवाद निश्चय ही सनातन संस्कृति के अभ्युदय काल में एक दुखद अध्याय है। अब, जब चढावा चोरी की दुखद घटना की एसआईटी द्वारा गहन जांच चल रही है ऐसे समय सनातन विरोधी अराजक राजनीतिक दलों ने इस मुददे को अपनी राजनीति चमकाने का एक सुनहरा अवसर समझ लिया है। जो लोग अभी तक पीडीए राजनीति तक ही सीमित थे वे, अत्यंत अशोभनीय तरीके से भाजपा, संघ तथा विश्व हिंदू परिषद पर हमलावर होकर स्वयं को सबसे बड़ा रामभक्त और भाजपा, विहिप व संध को सबसे बडा हिन्दू विरोधी और रामद्रोही साबित करने में जुट गए हैं।
विरोधियों के अनर्गल प्रलाप ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को खुलकर आक्रामक अंदाज में हिंदुत्व की बात करने का अवसर दे दिया है । उन्होंने सपा मुखिया अखिलेश यादव को मथुरा की श्री कृष्णजन्मभूमि की मुक्ति के लिए आगे आने की चुनौती दी है । सपा मुखिया भाजपा नेतृत्व को कटघरे में खड़ा करने के लिए बिना सिर –पैर के कुतर्कों का सहारा लेकर बयानबाजी कर रहे हैं जबकि आमजन तथा रामभक्त सरकार द्वारा उठाये गए कदमों और कार्रवाई को धैर्यपूर्वक देख-सुन रही है और उसे विश्वास है कि अपराधियों को उचित दंड अवश्य मिलेगा ।
वहीं दूसरी ओर जोर –जोर से चिल्लाकर समाचारों को संगीन बनाने वाले कुछ टीवी चैनल दानपत्रों से हुई चोरी पर बहस आयोजित कर रहे हैं जिनमें काफी अभद्र व आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग अत्यंत आक्रामक तरीके से हो रहा है जिसे नियंत्रित करने की आवश्यकता है। आज वही लोग हमलावर हो रहे हैं जिन्होंने अयोध्या विवाद की शुरूआत वर्ष 1947 से लेकर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय आने तक व फिर उसके बाद दिव्य व भव्य राम मंदिर के उदघाटन तक कभी भी विश्व हिंदू परिषद व रामभक्तो के आन्दोलन का समर्थन नहीं किया अपितु , अयोध्या में स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव के शासनकाल में अयोध्या की गलियों व सरयू नदी में रामभक्तों का खून बहाया गया था। 6 दिसंबर को अयोध्या में विवादित ढांचा ढह जाने के बाद भीषण दंगे करवाये गए थे तथा केंद्र की कांग्रेस सरकार ने भाजपा की चार प्रान्तों की सरकारों को बर्खास्त कर दिया गया था। आज वही कालनेमि कपड़े बदलकर सनातनी हो गए हैं ।
पग- पग पर मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति करने वाले ये लोग जिस प्रकार से रामभक्तों के नाम पर विघटनकारी और उत्तेजक बयान दे रहे हैं ऐसे , घडि़याली आंसू बहाने वाले अराजक तत्वों से बेहद सतर्क हो जाने का समय आ गया है । यह सब कुछ जिस प्रकार से घटित हो रहा है उससे यह संकेत भी जा रहा है कि ये लोग एसआईटी की जांच को प्रभावित करके अपना विकृत निहित स्वार्थ सिद्ध करना चाह रहे हैं । इनके मंतव्य बहुत ही गहरे हैं है क्योकि यह लोग अपनी मुस्लिम तुष्टिकरण वाली ओछी राजनीति त्याग नहीं सकते है। राम मंदिर उदघाटन के समय जब विश्व हिुंदू परिषद ने सभी राजनैतिक दलों को आमंत्रित किया था तब इन्हीं सब दलों ने यह कहकर वहां जाने से मनाकर दिया था कि अगर हम वहां चले गए तो हमारा मुस्लिम वोटबैंक बहुत नाराज हो जाएगा।आज वही लोग चढ़ावा चोरी की आड़ में राजनीतिक बयानबाजी कर रहे हैं जिन लोगों ने सत्ता में रहते हुए बंगाल, तमिलनाडु व केरल में बिजली की आपूर्ति इसलिए ठप करवा दी थी कि राम मंदिर का उदघाटन वहां का हिंदू जनमानस टीवी पर न देख सके ।
सबसे अधिक क्रोध और हंसी तो आप पार्टी पर आती है जिस पार्टी को, अपने आपको कट्टर ईमानदार बताकर अभूतपूर्व शराब घेाटाला करने के कारण दिल्ली की जनता नकार देती है जिस दल की सरकार को अब पंजाब की जनता भी डुबाने जा रही है वह भी अपने आपको कट्टर सनातनी बताने लग गई है । जन्मभूमि पर सुलभ शौचालय या अस्पताल बनाने की बात करने वाले वही कालनेमि अयोध्या गए , दान चोरी पर घडियाली आंसू बहाए, भाजपा, विहिप एवं संघ के शीर्ष नेतृत्व को गरियाने के नाम पर रामभक्त हिन्दुओं का अपमान किया । कुटिलता की सबसे तेज चाल आप पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवल ने चली तो प्रदेश के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय भी अवसर क्यों गंवाते वह भी लगे हाथ हो लिए ।
असल में, इस विवाद की आड़ में एक खतरनाक स्तर की राजनीतिक लड़ाई लड़ी जा रही है। आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए सपा व समस्त विरोधी दल एक अलग तरह का हिंदू नैरेटिव पेश करने का प्रयास कर रहे हैं और यह दिखाना चाह रहे हैं कि वह सनातन विरोधी नहीं हैं बल्कि मंदिर व्यवस्था व पुजारियों के एक वर्ग के खिलाफ हैं। इस प्रोपेगेडा के माध्यम से वह भाजपा के राष्ट्रवादी व सांस्कृतिक हिंदुत्व के समानांतर एक ऐसा वर्ग खड़ा करना चाह रहे हैं जो आपस में बंट जाए अर्थात् वह हिंदू बनाम हिदू की लड़ाई करवान चाहते हैं तथा हिंदू समाज को टुकड़ों-टुकड़ों में विभाजित करके अपना स्वार्थ सिद्ध करने की विकृत चाल चल रहे हैं। सपा मुखिया को लगता है कि दलित व मुस्लिम गठजोड़ का वोटबैंक तो बस उनके साथ ही है अब, सवर्ण व पिछडी जातियों में भेद पैदा करके तथा उनके मन में भाजपा के खिलाफ आक्रोश उत्पन्न करके अपना स्वार्थ सिद्ध कर लिया जाए।
किंतु यह सब कुछ सपा के लिए इतना आसान नहीं रहने वाला क्योंकि आमजन मुख्यमंत्री योगी की सनातन छवि के साथ ही उनकी प्रशासनिक क्षमताओं की कायल हो चुकी है । प्रदेश में विकास कार्यों की द्रुतगति के साथ ही अपराधियों पर कठोर कार्यवाही योगी जी की पहचान बन गयी है । वे अपने भाषणों में अपनी सरकार के दौरान किये गए विकास कार्यों का विवरण देने केसाथ ही अपने आक्रामक तेवरों के साथ जनता को बताते हैं कि जो लोग कभी जयश्रीराम का नारा लगाने वालों पर लाठीचार्ज करवाते थे वे आज रामभक्ति की वकालत करने लग गए हैं। टीवी चैनलों की बहस में वही सपाई अपनी छातियां पीट रहे हैं जो कभी कहते थे हम किसी भी हालत में मदिर नहीं बनने देंगे। सपा मुखिया अखिलेश यादव आज रामालय ट्रस्ट के गबन की बात नहीं कर रहे हैं। कांग्रेस के वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट में भगवान राम को काल्पनिक बताया था उसके प्रवक्ता आज टीवी चैनलों पर अपनी छातियां पीट रहे हैं और आंसू बहा रहे हैं आज जब संपूर्ण भारत में मंदिरो का कायाकल्प हो रहा है तब उसे यह लोग भाजपा की लूट का जरिया बताकर सनातन का एक बार फिर अपमान ही कर रहे हैं।
ये वही कालनेमि अराजक तत्व हैं जिन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ हुए भयानक अत्याचार के विरुद्ध कोई आवाज नहीं उठाई इन सेक्युलर नेताओ ने कभी जम्मू -कश्मीर के पंडितों के समर्थन मेंअपनी आवज नहीं बुलंद की, आज वही लोग नकली सनातनी बन गए है।
सपा व विरोधी दल यह सोच रहे है कि उन्हें इस विवाद का राजनीतिक लाभ मिल सकता है किंतु यही उनकी ऐतिहासिक भूल भी सिद्ध होने वाली है।राम मंदिर दानपात्र से चोरी का मामला गंभीर अवश्य है किंतु हिंदू जनमानस को मुख्यमंत्री योगी की सरकार पर पूरा भरोसा है कि केवल योगी सरकार ही इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराएगी और दोषियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई करेगी जिससे भविष्य में पुनः कोई ऐसी धृष्टता करने से पहले दस बार सोचेगा । अभी एक सर्वे आया है जिसके अनुसार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की छवि ,हिंदुत्व, कानून - व्यवस्था,मजबूत प्रशासन और विकास के एजेंडे पर लगातार मजबूत बनी हुई है। लोकसभा चुनावों के बाद यूपी में सपा मजबूत अवश्य हुई थी किंतु बंगाल का चुनाव परिणाम आने के बाद सबसे अधिक भय का वातावरण सपा में ही है जिसे राम मंदिर चढावा विवाद के बहाने छुपाने का प्रयास किया जा रहा है ।
सपा मुखिया अखिलेश यादव चढ़ाव चोरी की घटना से अपना राजनीतिक स्वार्थ सिद्ध करने का असफल प्रयास कर रहे है किंतु उन्हें इसका बहुत बड़ा नुकसान होने वाला हैं क्योकि यूपी में योगी की लोकप्रियता व जनता के मन मे उनके प्रति जो भरोसा कायम है वह अटूट हैं । बस जनता को इन कालनेमियों से सावाधन व सतर्क करते रहना आवश्यक है।
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