AIMIM नेता की मदद से छिपी थी निदा खान, पुलिस ने सुरक्षा शुल्क के बहाने जाल बिछाकर पकड़ा

निदा खान पर आरोप है कि उसने टीसीएस में काम करने वाली अपनी कई महिला सहकर्मियों पर धर्म परिवर्तन के लिए भारी दबाव बनाया था। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, निदा उन्हें कट्टरपंथी विचारधारा की ओर धकेलने के लिए विशेष प्रकार के मो

May 9, 2026 - 09:32
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AIMIM नेता की मदद से छिपी थी निदा खान, पुलिस ने सुरक्षा शुल्क के बहाने जाल बिछाकर पकड़ा
AIMIM नेता की मदद से छिपी थी निदा खान, पुलिस ने सुरक्षा शुल्क के बहाने जाल बिछाकर पकड़ा
  • नासिक धर्मांतरण मामले में पुलिस की बड़ी कामयाबी, औरंगाबाद से गिरफ्तार हुई मास्टरमाइंड निदा खान
  • टीसीएस धर्मांतरण केस में राजनीतिक संरक्षण का खुलासा, मतीन पटेल ने दी थी फरार आरोपी को पनाह

महाराष्ट्र के नासिक में स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की यूनिट में सामने आए कथित धर्मांतरण और यौन उत्पीड़न के मामले ने पूरे राज्य में खलबली मचा दी है। इस मामले की मुख्य आरोपी निदा खान, जो पिछले 25 दिनों से पुलिस को चकमा देकर फरार चल रही थी, अंततः पुलिस के हत्थे चढ़ गई है। नासिक पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) ने तकनीकी और मानवीय खुफिया जानकारी का सटीक समन्वय करते हुए निदा को छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) के नारेगांव इलाके से गिरफ्तार किया है। निदा की गिरफ्तारी न केवल इस मामले के रहस्यों को सुलझाने में महत्वपूर्ण है, बल्कि इसने उन लोगों के चेहरों से भी नकाब हटा दिया है जो कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए उसे शरण दे रहे थे। फरार आरोपी के साथ उसके परिवार के अन्य सदस्यों को भी हिरासत में लिया गया है, जो इस साजिश में शामिल बताए जा रहे हैं।

निदा खान की सटीक लोकेशन का पता लगाना पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई थी, क्योंकि वह लगातार अपने ठिकाने बदल रही थी और किसी भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण का उपयोग करने से बच रही थी। पुलिस को शुरुआती जांच में यह संकेत मिले थे कि उसे स्थानीय स्तर पर राजनीतिक प्रभाव वाले लोगों का समर्थन प्राप्त है। नासिक और छत्रपति संभाजीनगर पुलिस की संयुक्त टीम ने उस इलाके की घेराबंदी की जहां उसके छिपे होने की प्रबल संभावना थी। पुलिस ने पारंपरिक मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया और उन संदिग्धों पर नजर रखी जो निदा के परिवार के संपर्क में हो सकते थे। अंततः, एक पुख्ता जानकारी ने पुलिस को नारेगांव के उस घर तक पहुँचा दिया जहां निदा अपने पिता, मां और भाई के साथ छिपकर रह रही थी।

इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद एआईएमआईएम (AIMIM) के एक स्थानीय नेता की भूमिका भी संदिग्ध रूप से सामने आई है। जांच में पाया गया कि एआईएमआईएम के पूर्व पार्षद मतीन माजिद पटेल ने निदा खान और उसके परिवार को अपने प्रभाव वाले क्षेत्र में छिपाने में सक्रिय मदद की थी। मतीन पटेल ने न केवल उन्हें रहने के लिए सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराया, बल्कि जांच एजेंसियों को गुमराह करने की भी कोशिश की। पुलिस ने मतीन पटेल को पकड़ने के लिए एक बेहद दिलचस्प रणनीति अपनाई। उन्हें किसी आपराधिक मामले के बजाय, उनके द्वारा ली गई पुलिस सुरक्षा के शुल्कों के मिलान और समीक्षा के बहाने थाने बुलाया गया। मतीन पटेल जैसे ही इस झांसे में आकर पुलिस के पास पहुँचे, अधिकारियों ने कड़ाई से पूछताछ शुरू कर दी, जिसमें वे टूट गए और निदा के ठिकाने की जानकारी दे दी। पुलिस द्वारा अपनाई गई इस कूटनीतिक चाल ने यह सिद्ध कर दिया कि तकनीकी सर्विलांस के फेल होने पर मनोवैज्ञानिक दबाव और चतुराई भरे कदम अपराधियों तक पहुँचने का सबसे कारगर रास्ता होते हैं। मतीन पटेल की गिरफ्तारी ने राजनीतिक संरक्षण के उन दावों को पुख्ता किया है, जिनकी आशंका जांच के शुरुआती दिनों से ही जताई जा रही थी।

निदा खान पर आरोप है कि उसने टीसीएस में काम करने वाली अपनी कई महिला सहकर्मियों पर धर्म परिवर्तन के लिए भारी दबाव बनाया था। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, निदा उन्हें कट्टरपंथी विचारधारा की ओर धकेलने के लिए विशेष प्रकार के मोबाइल एप्लीकेशन साझा करती थी और उन्हें हिजाब पहनने के लिए मजबूर करती थी। मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब यह सामने आया कि उसके भाई दानिश शेख ने भी एक महिला कर्मचारी को शादी और धर्म परिवर्तन का झांसा देकर उसका यौन शोषण किया था। एसआईटी अब इस बात की कड़ियों को जोड़ रही है कि क्या यह केवल एक व्यक्तिगत कृत्य था या इसके पीछे किसी संगठित गिरोह का हाथ है जो कॉर्पोरेट जगत में सक्रिय होकर धर्मांतरण का जाल बुन रहा है। एआईएमआईएम नेता की संलिप्तता सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और आरोप लगाया है कि एक खास विचारधारा को थोपने के लिए राजनीतिक पदों का दुरुपयोग किया जा रहा है। पुलिस अब मतीन पटेल और निदा खान के बीच के वित्तीय संबंधों की भी जांच कर रही है। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि क्या फरारी के दौरान निदा को किसी बाहरी संस्था या व्यक्ति द्वारा आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही थी। मतीन पटेल पर अब आरोपियों को संरक्षण देने और कानून की प्रक्रिया में बाधा डालने की गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है।

निदा खान और उसके परिवार से बरामद किए गए मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल दस्तावेजों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है। पुलिस का मानना है कि इन उपकरणों से कई ऐसे राज खुल सकते हैं जो इस सिंडिकेट के मालेगांव और देश के अन्य हिस्सों से जुड़े होने की पुष्टि करेंगे। टीसीएस प्रबंधन ने भी इस मामले में अपना सहयोग देने का आश्वासन दिया है और आंतरिक स्तर पर सुरक्षा ऑडिट शुरू कर दिया है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। जांच का दायरा अब उन अन्य संदिग्धों तक भी बढ़ गया है जिन्होंने निदा खान को छिपने के लिए संसाधन और वाहन उपलब्ध कराए थे।

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