कर्नाटक की राजनीति में महाबदलाव की आहट: मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बुलाई कैबिनेट की विशेष बैठक, पद छोड़ने के दिए संकेत

मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित की गई इस भावुक कैबिनेट बैठक के भीतर की जो तस्वीरें सामने आई हैं, वे दोनों नेताओं के बीच के गहरे जुड़ाव और संगठन की एकजुटता को दर्शाती हैं। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने संभावित उत्तराधिकारी डीके शिवकुमार को गले लगाया, जबकि

May 28, 2026 - 12:43
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कर्नाटक की राजनीति में महाबदलाव की आहट: मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बुलाई कैबिनेट की विशेष बैठक, पद छोड़ने के दिए संकेत
कर्नाटक की राजनीति में महाबदलाव की आहट: मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बुलाई कैबिनेट की विशेष बैठक, पद छोड़ने के दिए संकेत

  • डीके शिवकुमार के सिर सज सकता है कर्नाटक का मुख्यमंत्री पद का ताज, दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान के साथ बैठक के बाद प्रक्रिया तेज
  • ढाई-ढाई साल के सत्ता समझौते पर अमल की तैयारी: सिद्धारमैया को केंद्र में बड़ी भूमिका और राज्यसभा सीट का प्रस्ताव देकर मनाया गया

दक्षिण भारत के रणनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण राज्य कर्नाटक की राजनीति में इस समय एक बहुत बड़ा और निर्णायक मोड़ आता हुआ दिखाई दे रहा है। लंबे समय से चल रही अंदरूनी खींचतान और कशमकश के बाद आखिरकार राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों पर मुहर लगती नजर आ रही है। वर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने आधिकारिक आवास 'कावेरी' पर कैबिनेट सहयोगियों के लिए एक विशेष नाश्ते की बैठक बुलाई, जिसमें उन्होंने मंत्रियों को अपने पद से इस्तीफा देने के फैसले की जानकारी दी है। इस अप्रत्याशित लेकिन तय माने जा रहे घटनाक्रम के बाद अब यह पूरी तरह से साफ हो गया है कि राज्य के वर्तमान उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार कर्नाटक के अगले मुख्यमंत्री के रूप में कमान संभालने के लिए तैयार हैं। कड़े राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच इस बड़े बदलाव को लेकर बेंगलुरु से लेकर दिल्ली तक के राजनीतिक गलियारों में हलचल अभूतपूर्व रूप से तेज हो चुकी है।

यह पूरा राजनीतिक घटनाक्रम नई दिल्ली में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के साथ हुई कई दौर की मैराथन बैठकों के बाद आकार ले पाया है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और महासचिव केसी वेणुगोपाल की मौजूदगी में दोनों शीर्ष नेताओं को दिल्ली तलब किया गया था। बंद कमरों में हुई इस उच्च स्तरीय चर्चा के दौरान हाईकमान ने सिद्धारमैया को बहुत ही सम्मानजनक तरीके से राष्ट्रीय राजनीति में आने और जून में होने वाले राज्यसभा चुनाव के जरिए दिल्ली स्थानांतरित होने का प्रस्ताव दिया। शुरुआत में हिचकिचाहट दिखाने के बाद, सिद्धारमैया ने राहुल गांधी के सीधे संदेश और पार्टी के अनुशासन का सम्मान करते हुए अपनी सहमति दे दी। उन्होंने साफ किया कि यदि आलाकमान ऐसा चाहता है, तो वे सहर्ष पद छोड़ने के लिए तैयार हैं, जिससे सत्ता के सुचारू हस्तांतरण का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया।

मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित की गई इस भावुक कैबिनेट बैठक के भीतर की जो तस्वीरें सामने आई हैं, वे दोनों नेताओं के बीच के गहरे जुड़ाव और संगठन की एकजुटता को दर्शाती हैं। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने संभावित उत्तराधिकारी डीके शिवकुमार को गले लगाया, जबकि भावुक हुए शिवकुमार ने आगे बढ़कर सिद्धारमैया के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया। इस बैठक के तुरंत बाद गृह मंत्री जी परमेश्वरा ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की कि मुख्यमंत्री ने अपनी विदाई से पहले सभी कैबिनेट मंत्रियों को पिछले तीन सालों के शानदार सहयोग के लिए धन्यवाद देने के लिए यह बैठक बुलाई थी। इसके तुरंत बाद राजभवन से राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मिलने का समय भी मांगा गया है, ताकि सिद्धारमैया अपना आधिकारिक त्यागपत्र उन्हें सौंप सकें और नई सरकार के गठन की वैधानिक प्रक्रिया को शुरू किया जा सके।

सत्ता की साझेदारी का पुराना फॉर्मूला

साल 2023 के विधानसभा चुनावों में जब कांग्रेस को प्रचंड बहुमत मिला था, तब सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार दोनों ही मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार थे। उस समय दिल्ली में सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी की मध्यस्थता में एक गुप्त समझौता हुआ था, जिसके तहत शुरुआती ढाई साल सिद्धारमैया और शेष ढाई साल डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाना तय हुआ था। वर्तमान में उसी वादे को निभाते हुए हाईकमान ने यह कदम उठाया है।

डीके शिवकुमार के समर्थक इस फैसले के बाद से ही भारी उत्साह में हैं और उनके कनकपुरा निर्वाचन क्षेत्र सहित पूरे बेंगलुरु में जश्न का माहौल देखा जा रहा है। समर्थकों ने ढोल-नगाड़ों की थाप पर नाचते हुए और मिठाइयां बांटकर इस ऐतिहासिक दिन का स्वागत किया है। शिवकुमार को कर्नाटक कांग्रेस का सबसे बड़ा संकटमोचक और कुशल रणनीतिकार माना जाता है, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी राज्य में संगठन को जीवित रखा और वित्तीय व प्रशासनिक मोर्चे पर हमेशा अग्रिम पंक्ति में रहकर काम किया। हालांकि, उनके मुख्यमंत्री बनने की राह इतनी भी आसान नहीं रहने वाली है, क्योंकि सिद्धारमैया का खेद पूरी कोशिश में जुटा है कि सरकार के भीतर शक्ति का संतुलन पूरी तरह शिवकुमार के पक्ष में न झुके, जिसके लिए कई नए उपमुख्यमंत्री बनाने का दबाव भी बनाया जा रहा है।

प्रशासनिक और राजनीतिक दृष्टिकोण से इस बदलाव के कई दूरगामी परिणाम देखने को मिल सकते हैं। जहां एक तरफ डीके शिवकुमार के आने से वोक्कालिगा समुदाय के बीच पार्टी की पकड़ और अधिक मजबूत होगी, वहीं दूसरी तरफ सिद्धारमैया के हटने से अहिंदा यानी अल्पसंख्यक, पिछड़े वर्ग और दलितों के उस बड़े सामाजिक गठबंधन को साधे रखना एक बड़ी चुनौती होगी, जिसके दम पर पार्टी ने सत्ता हासिल की थी। इसके अलावा, विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी और जनता दल सेक्युलर भी इस आंतरिक सत्ता परिवर्तन को लेकर सरकार पर भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अस्थिरता के आरोप लगाने के लिए पूरी तरह से तैयार बैठे हैं। ऐसे में शिवकुमार को अपनी नई कैबिनेट को संतुलित रखने के साथ-साथ साल 2028 के आगामी विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी का आधार अभी से मजबूत करना होगा।

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