5 जोड़ी आंखें और 3 जबड़े: मिलिए। दुनिया के उस रहस्यमयी प्राणी से जिसकी शारीरिक बनावट उड़ा देगी आपके होश
प्रकृति ने इस धरती पर करोड़ों जीवों की रचना की है, जिनमें से कुछ अपनी अद्भुत शारीरिक क्षमताओं और बनावट के कारण वैज्ञानिकों को हमेशा
- प्रकृति का अनोखा अजूबा: 32 दिमाग और 300 दांतों वाला यह जीव जीवविज्ञानियों के लिए बना पहेली
- लीच (जोंक) का अद्भुत संसार: नन्ही सी दिखने वाली जोंक के भीतर छिपा है जटिल तंत्र और 32 दिमागों का पावरहाउस
प्रकृति ने इस धरती पर करोड़ों जीवों की रचना की है, जिनमें से कुछ अपनी अद्भुत शारीरिक क्षमताओं और बनावट के कारण वैज्ञानिकों को हमेशा अचंभित करते रहे हैं। इन्हीं रहस्यों में से एक है 'जोंक' (Leech), जिसे वैज्ञानिक भाषा में 'हिरूडिनिया' कहा जाता है। अक्सर दलदली इलाकों, तालाबों और नदियों के किनारे पाए जाने वाले इस जीव को लोग केवल खून चूसने वाले एक साधारण कीड़े के रूप में जानते हैं। लेकिन जोंक की शारीरिक संरचना किसी काल्पनिक एलियन से कम नहीं है। इसके पास एक या दो नहीं, बल्कि पूरे 32 दिमाग होते हैं। यह जानकर हर कोई हैरान रह जाता है कि महज कुछ सेंटीमीटर का यह जीव इतना जटिल तंत्र कैसे संभालता है। वास्तव में, जोंक का शरीर 32 अलग-अलग खंडों (Segments) में बंटा होता है और हर खंड का अपना एक स्वतंत्र मस्तिष्क होता है जो उस हिस्से की गतिविधियों को नियंत्रित करता है।
जोंक की शारीरिक विशेषताओं की बात करें तो इसकी आंखों की संख्या भी आपको हैरान कर सकती है। इस जीव के पास कुल 5 जोड़ी यानी 10 आंखें होती हैं। हालांकि, इन आंखों की दृष्टि हमारी आंखों की तरह स्पष्ट नहीं होती, लेकिन ये प्रकाश की तीव्रता और परछाई को महसूस करने में बेहद सक्षम होती हैं। ये आंखें जोंक के सिर के ऊपरी हिस्से पर एक कतार में व्यवस्थित होती हैं, जो इसे पानी के भीतर अपने शिकार की हलचल को पहचानने में मदद करती हैं। दृष्टि के साथ-साथ जोंक के पास स्पर्श और कंपन को महसूस करने की जबरदस्त शक्ति होती है, जिससे वह अंधेरे या मटमैले पानी में भी अपने भोजन का सटीक पता लगा लेती है।
इस जीव का सबसे खतरनाक और दिलचस्प हिस्सा इसका मुंह है। जोंक के पास कुल 3 जबड़े होते हैं और प्रत्येक जबड़े में लगभग 100 सूक्ष्म लेकिन अत्यंत पैने दांत होते हैं। इस प्रकार, जोंक के मुंह में कुल 300 दांतों का एक घेरा होता है। जब जोंक किसी जीव की त्वचा पर चिपकती है, तो वह इन दांतों का उपयोग आरी की तरह करती है ताकि त्वचा में सूक्ष्म छेद किया जा सके। दांतों के काटने का तरीका इतना महीन होता है कि शिकार को अक्सर पता भी नहीं चलता कि उसके शरीर से खून चूसा जा रहा है। यह पूरी प्रक्रिया प्राकृतिक इंजीनियरिंग का एक बेहतरीन उदाहरण है, जहाँ सूक्ष्मता और प्रभावशीलता का अद्भुत संगम दिखता है।
क्यों नहीं होता दर्द?
जब जोंक किसी इंसान या जानवर को काटती है, तो दर्द का अनुभव नहीं होता। इसका कारण जोंक की लार में पाया जाने वाला 'एनेस्थेटिक' तत्व है। काटने के साथ ही वह अपनी लार से उस हिस्से को सुन्न कर देती है। इसके अलावा, इसकी लार में 'हिरूडिन' (Hirudin) नामक एक रसायन होता है, जो खून को जमने (Clotting) से रोकता है। इसी वजह से जोंक आसानी से लगातार खून पी पाती है और उसके हटने के बाद भी काफी देर तक खून बहता रहता है। जोंक के प्रजनन और जीवन चक्र की बात करें तो यह एक 'उभयलिंगी' (Hermaphrodite) जीव है। इसका मतलब है कि एक ही जोंक के शरीर में नर और मादा दोनों के प्रजनन अंग मौजूद होते हैं। हालांकि, प्रजनन के लिए इसे दूसरे साथी की आवश्यकता होती है। जोंक अपने अंडे को एक सुरक्षात्मक कवच जिसे 'कोकून' कहा जाता है, उसके भीतर देती है। ये कोकून अक्सर नमी वाली मिट्टी या पानी के भीतर छिपे होते हैं। एक बार भोजन करने के बाद, जोंक महीनों तक बिना कुछ खाए जीवित रह सकती है क्योंकि इसका पाचन तंत्र बहुत धीमा होता है और यह अपने शरीर के वजन से कई गुना अधिक खून एक बार में स्टोर कर सकती है।
प्राचीन काल से ही जोंक का उपयोग चिकित्सा के क्षेत्र में किया जाता रहा है, जिसे 'लीच थेरेपी' कहा जाता है। आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा पद्धतियों में दूषित खून को शरीर से बाहर निकालने के लिए जोंक का सहारा लिया जाता है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में भी सर्जरी के बाद रक्त प्रवाह को सुचारू बनाने और नसों के जमाव को कम करने के लिए जोंक का इस्तेमाल किया जाता है। जोंक की लार में मौजूद 60 से अधिक औषधीय प्रोटीन रक्तचाप को नियंत्रित करने और सूजन कम करने में सहायक पाए गए हैं। इसी उपयोगिता के कारण कई देशों में जोंक का बाकायदा पालन (Leech Farming) किया जाता है। दुनिया भर में जोंक की लगभग 700 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से अधिकांश मीठे पानी में रहती हैं, जबकि कुछ समुद्रों और कुछ नमी वाली जमीन पर भी मिलती हैं। कुछ जोंक की लंबाई 10 इंच तक भी हो सकती है। हालांकि लोग इसे घृणा की दृष्टि से देखते हैं, लेकिन पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) में इसकी भूमिका महत्वपूर्ण है। यह पानी की गुणवत्ता के संकेतक के रूप में भी काम करती है। 32 दिमागों वाला यह जीव हमें यह सिखाता है कि जीवन के विकास की प्रक्रिया में प्रकृति ने अस्तित्व बचाने के लिए कितने जटिल और अनोखे तरीके अपनाए हैं।
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