उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में चिकित्सा जगत का अनोखा चमत्कार, एक निजी अस्पताल में महिला ने एक साथ चार बच्चों को दिया जन्म।
उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में स्थित मुरादाबाद जनपद से चिकित्सा विज्ञान और मानवीय कौतूहल को जगाने वाली एक बेहद
- संभल जनपद की रहने वाली प्रसूता ने डॉक्टरों को किया चकित, जच्चा पूरी तरह स्वस्थ लेकिन नवजातों को एहतियातन वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया
- शादी के दो साल बाद गूंजी किलकारियां, दुर्लभ मेडिकल केस को देखने के लिए अस्पताल में उमड़ी उत्सुक लोगों की भारी भीड़
उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में स्थित मुरादाबाद जनपद से चिकित्सा विज्ञान और मानवीय कौतूहल को जगाने वाली एक बेहद ही असाधारण और विस्मयकारी खबर सामने आई है। यहाँ के एक सुप्रसिद्ध और आधुनिक सुविधाओं से लैस निजी अस्पताल में एक महिला ने एक साथ चार बच्चों को जन्म देकर न केवल अपने परिवार को असीम खुशियां दी हैं, बल्कि स्थानीय चिकित्सा जगत को भी पूरी तरह से हैरान कर दिया है। इस अत्यंत दुर्लभ और जटिल प्रसव प्रक्रिया के सफलतापूर्वक संपन्न होने के बाद पूरे अस्पताल परिसर में कौतूहल और हर्ष का माहौल व्याप्त हो गया है। चिकित्सा विज्ञान में इस तरह के मामलों को बेहद संवेदनशील और जोखिम भरा माना जाता है, यही कारण है कि इस सफल प्रसव को देखने और इसके बारे में विस्तार से जानने के लिए अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टरों से लेकर पैरामेडिकल स्टाफ तक सभी लोग इसे एक बड़े चमत्कार के रूप में देख रहे हैं।
इस अनोखे और विस्मयकारी मामले की पृष्ठभूमि और पारिवारिक विवरण पर नजर डालें तो प्रसूता महिला मुरादाबाद के पड़ोसी जिले संभल की रहने वाली है। पारिवारिक सूत्रों से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस महिला का विवाह लगभग दो वर्ष पूर्व बेहद ही सादगीपूर्ण और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ था। शादी के बाद से ही यह दंपत्ति अपने आंगन में किलकारी गूंजने का बेसब्री से इंतजार कर रहा था, लेकिन उन्हें इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि कुदरत उनके घर में एक साथ चार गुना खुशियों की सौगात भेजने वाली है। महिला को जब प्रसव पीड़ा शुरू हुई, तो संभल के स्थानीय स्तर पर उचित और उच्च स्तरीय चिकित्सकीय संसाधन उपलब्ध न होने के कारण परिजनों ने बिना समय गंवाए उन्हें तुरंत मुरादाबाद के इस प्रतिष्ठित निजी चिकित्सालय में लाकर भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों की एक विशेष टीम ने मामले को अपने हाथ में लिया। चिकित्सा विज्ञान की भाषा में एक साथ चार बच्चों के जन्म को 'क्वाड्रुपलेट्स' (Quadruplets) कहा जाता है। वैश्विक स्तर पर और विशेषकर भारतीय उपमहाद्वीप में ऐसे मामले लाखों में से किसी एक महिला के साथ ही सामने आते हैं। इस प्रकार की गर्भावस्था में मां के गर्भ में एक से अधिक भ्रूणों का विकास होता है, जो सामान्यतः फर्टिलिटी उपचारों या फिर पूरी तरह से प्राकृतिक रूप से हार्मोनल बदलावों के कारण हो सकता है। ऐसे मामलों में प्रसव के दौरान जच्चा और बच्चा दोनों की जान को अत्यधिक खतरा बना रहता है, जिसके लिए बेहद अनुभवी गायनेकोलॉजिस्ट और पीडियाट्रिशियन की टीम की आवश्यकता होती है।
अस्पताल के वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञों और सर्जनों की देखरेख में महिला का प्रसव अत्यंत सावधानीपूर्वक और उन्नत चिकित्सा उपकरणों की मदद से कराया गया। चिकित्सकों की टीम ने प्रसूता की नाजुक हालत और गर्भ में बच्चों की स्थिति को देखते हुए सिजेरियन ऑपरेशन (सिsection) करने का त्वरित निर्णय लिया, जो पूरी तरह से सफल रहा। ऑपरेशन थिएटर से बाहर आने के बाद डॉक्टरों ने राहत की सांस लेते हुए बताया कि बच्चों को जन्म देने वाली मां की शारीरिक स्थिति पूरी तरह से स्थिर, सामान्य और स्वस्थ बनी हुई है। महिला को फिलहाल डॉक्टरों की सघन निगरानी में रिकवरी वार्ड में रखा गया है और उनकी हर एक गतिविधि पर नजर रखी जा रही है, ताकि प्रसव के बाद होने वाले किसी भी प्रकार के आंतरिक संक्रमण या रक्तस्राव जैसी जटिलताओं से उन्हें पूरी तरह सुरक्षित रखा जा सके।
दूसरी ओर, एक साथ जन्म लेने वाले इन चारों नवजात शिशुओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर बाल रोग विशेषज्ञों की एक विशेष टीम पूरी तरह से मुस्तैद बनी हुई है। चूंकि एक साथ चार बच्चों का जन्म होने के कारण उनका वजन सामान्य बच्चों की तुलना में काफी कम है और उनके फेफड़े तथा अन्य आंतरिक अंग अभी पूरी तरह से परिपक्व नहीं हुए हैं, इसलिए एहतियात के तौर पर चारों बच्चों को तुरंत अस्पताल के अत्याधुनिक नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) में स्थानांतरित कर दिया गया है। वहां इन नवजातों को जीवन रक्षक प्रणाली यानी वेंटिलेटर और इनक्यूबेटर के सपोर्ट पर रखा गया है ताकि उन्हें गर्भाशय जैसा ही सुरक्षित और अनुकूल वातावरण मिल सके। हालांकि, नवजात शिशुओं की देखभाल कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि वेंटिलेटर सपोर्ट पर होने के बावजूद सभी बच्चे चिकित्सीय दृष्टिकोण से ठीक हैं और उनके स्वास्थ्य में धीरे-धीरे सकारात्मक सुधार देखने को मिल रहा है।
मुरादाबाद के इस निजी अस्पताल में जैसे ही इस अनोखे और चमत्कारी प्रसव की खबर आम जनता और वार्डों में भर्ती अन्य मरीजों के परिजनों तक पहुंची, वैसे ही पूरे अस्पताल में एक उत्सुकता की लहर दौड़ गई। लोग इस ऐतिहासिक पल के गवाह बनने और चारों बच्चों की एक झलक पाने के लिए एनआईसीयू वार्ड के बाहर एकत्रित होने लगे, जिसे देखते हुए अस्पताल प्रशासन को सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने पड़े और वार्ड के सामने लोगों की आवाजाही को पूरी तरह से प्रतिबंधित करना पड़ा। संभल से आए महिला के पति और अन्य करीबी रिश्तेदारों के घरों पर भी बधाई देने वालों का तांता लग गया है, और लोग इसे साक्षात ईश्वर की असीम अनुकंपा और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की एक बहुत बड़ी सफलता के रूप में देख रहे हैं।
चिकित्सकीय इतिहास के दृष्टिकोण से देखा जाए तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इस बेल्ट में पिछले कई सालों के भीतर इस तरह का यह पहला और सबसे अनूठा मामला दर्ज किया गया है। इस सफल ऑपरेशन को अंजाम देने वाली डॉक्टरों की टीम को अस्पताल प्रबंधन की ओर से विशेष रूप से सम्मानित और पुरस्कृत करने की भी योजना बनाई जा रही है, क्योंकि उन्होंने बेहद कम समय में और अत्यधिक जटिल परिस्थितियों के बीच सूझबूझ का परिचय देते हुए जच्चा और सभी चारों बच्चों की जान को सुरक्षित बचा लिया। अस्पताल के प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, आने वाले कुछ दिनों तक बच्चों को पूरी तरह से डॉक्टरों की निगरानी में ही रखा जाएगा और जब उनका वजन सामान्य स्तर पर आ जाएगा और वे बिना किसी बाहरी सपोर्ट के सांस लेने में सक्षम हो जाएंगे, तभी उन्हें उनकी मां को सौंपा जाएगा और अस्पताल से छुट्टी दी जाएगी।
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