Agra: विश्व पुस्तक दिवस पर आगरा में सजा भव्य साहित्य महोत्सव, कवियों ने बांधा समां.

विश्व पुस्तक दिवस के उपलक्ष्य में ताज लिटरेचर क्लब द्वारा एक भव्य साहित्य महोत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम दोपहर

By INA News Desk
Apr 27, 2026 - 12:27
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Agra: विश्व पुस्तक दिवस पर आगरा में सजा भव्य साहित्य महोत्सव, कवियों ने बांधा समां.
विश्व पुस्तक दिवस पर ताज लिटरेचर क्लब का भव्य साहित्य महोत्सव आयोजित। 

आगरा। विश्व पुस्तक दिवस के उपलक्ष्य में ताज लिटरेचर क्लब द्वारा एक भव्य साहित्य महोत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम दोपहर 2:00 बजे आगरा पब्लिक स्कूल ऑडिटोरियम, विजय नगर कॉलोनी में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जिसमें आगरा सहित विभिन्न शहरों से दिग्गज कवि, कवयित्री एवं साहित्यकार शामिल हुए। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि हाथरस से पधारे आशु कवि अनिल बोहरे, अध्यक्ष महेश चंद्र शर्मा, संस्थापक राजकुमार शर्मा, भावना वरदान शर्मा एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं माल्यार्पण के साथ किया गया। इसके बाद स्वामी लीला शाह सरस्वती विद्या मंदिर के बच्चों ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

संस्था अध्यक्ष भावना वरदान शर्मा ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि 23 अप्रैल को विश्व पुस्तक दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य लोगों को पुस्तकों के प्रति जागरूक करना और पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देना है। इसी क्रम में ताज लिटरेचर क्लब द्वारा इस भव्य साहित्य महोत्सव का आयोजन किया गया, जिसमें पुस्तक विमोचन, साहित्य चर्चा और पुस्तक प्रदर्शनी भी शामिल रही। कार्यक्रम के दौरान डॉ. अरविंद कपूर की अंग्रेजी काव्य पुस्तक "एजिस ऑफ क्रीसेंडो" का विमोचन किया गया, जिसमें जीवन के विभिन्न पहलुओं पर आधारित कविताओं का संकलन प्रस्तुत किया गया है।

काव्य संध्या में आगरा के अलावा हाथरस, अकोला, दिल्ली, फिरोजाबाद और मथुरा से आए कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। 23 अप्रैल को महान कवि रामधारी सिंह दिनकर की जयंती के अवसर पर उनकी कविताओं का पाठ कर उन्हें श्रद्धांजलि भी अर्पित की गई।

विशिष्ट अतिथियों में अकोला से कवयित्री अंशु छोकर, अमरीश नाथ और राजीव निस्पृह उपस्थित रहे। काव्य पाठ करने वाले प्रमुख कवियों में सुषमा सिंह, राजेंद्र मिलन, अशोक अश्रु, डॉ. शशी गुप्ता, ब्रज बिहारी लाल बिरजू, प्रभु दत्त उपाध्याय, अमिता त्रिपाठी, विजया तिवारी, कामेश मिश्रा ‘सनसनी’, चारुमित्रा, रश्मि जैन, महक, शेषपाल सिंह, संजय गुप्ता, अशोक गोयल, डॉ. ऊषा गिल और अशोक अग्रवाल सहित अनेक कवि शामिल रहे। सभी ने वीर, श्रृंगार और ओज रस की कविताएं प्रस्तुत कर दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी।

कवयित्री अंशु छोकर ने अपनी पंक्तियों—

"हाड़ी रानी, पन्नाधाय, पद्मिनी सी कहानी चाहिए,
आज की बेटी में संस्कारों की रवानी चाहिए।
चूड़ी वाले हाथों से जमकर तलवारें थाम लो,
हर बेटी में लक्ष्मीबाई सी जवानी चाहिए।"

—से श्रोताओं को विशेष रूप से प्रभावित किया।

वहीं आशु कवि अनिल बोहरे ने अपने हास्य-व्यंग्य अंदाज में कहा कि "कवि की कविता सुनना जरूरी है और अच्छा पति बनने के लिए पत्नी की सुनना भी जरूरी है," जिस पर श्रोताओं ने खूब तालियां बजाईं। मीना शर्मा ने अपनी मधुर पंक्तियों "दिल की नगरिया आना, आकर के फिर ना जाना..." से माहौल को भावुक बना दिया। कार्यक्रम का संचालन अनुपमा दीक्षित ने कुशलतापूर्वक किया। इस अवसर पर कार्तिकेय, अर्चना कपूर, चतुर्भुज तिवारी, जगन प्रसाद तेहरिया, गिराज दीक्षित, आनंद राय, नीतू तेहरिया, हेमलता, शैलेन्द्र शर्मा, सुमित भारद्वाज सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। साहित्य महोत्सव के अंत में पुस्तक प्रदर्शनी और साहित्यिक चर्चाओं के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। 

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