पंढरपुर में चिकित्सा लापरवाही का बड़ा मामला: डॉक्टर ने बच्चे के दाहिने हाथ के बजाय कर दी बाएं हाथ की सर्जरी।

महाराष्ट्र के प्रसिद्ध धार्मिक शहर पंढरपुर में एक छह वर्षीय बालक के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ होने का मामला प्रकाश में आया है। प्राप्त जानकारी

Mar 30, 2026 - 14:16
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पंढरपुर में चिकित्सा लापरवाही का बड़ा मामला: डॉक्टर ने बच्चे के दाहिने हाथ के बजाय कर दी बाएं हाथ की सर्जरी।
पंढरपुर में चिकित्सा लापरवाही का बड़ा मामला: डॉक्टर ने बच्चे के दाहिने हाथ के बजाय कर दी बाएं हाथ की सर्जरी।
  • मासूम के साथ अस्पताल में बड़ी चूक: बाइलेटरल पॉलीडैक्टिली के इलाज के दौरान गलत अंग का हुआ ऑपरेशन
  • परिजनों का हंगामा और प्रशासन की कार्रवाई: पंढरपुर के निजी अस्पताल में हुई सर्जरी की जांच के लिए समिति गठित

महाराष्ट्र के प्रसिद्ध धार्मिक शहर पंढरपुर में एक छह वर्षीय बालक के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ होने का मामला प्रकाश में आया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह बच्चा 'बाइलेटरल पोस्टएक्सियल पॉलीडैक्टिली' नामक एक जन्मजात बीमारी से ग्रसित था, जिसमें हाथ या पैर में सामान्य से अधिक उंगलियां होती हैं। बच्चे के माता-पिता उसे इस समस्या के समाधान के लिए पंढरपुर के एक निजी अस्पताल में ले गए थे, जहाँ डॉक्टरों ने सर्जरी की सलाह दी थी। परिजनों का दावा है कि बच्चे के दाहिने हाथ की सर्जरी पहले की जानी तय हुई थी, लेकिन ऑपरेशन थिएटर से बाहर आने के बाद जब उन्होंने बच्चे को देखा, तो वे दंग रह गए। डॉक्टरों ने दाहिने हाथ को छूने के बजाय उसके बाएं हाथ का ऑपरेशन कर दिया था, जिसे लेकर अस्पताल परिसर में भारी तनाव पैदा हो गया।

इस घटना के बाद पीड़ित परिवार ने अस्पताल प्रशासन पर घोर लापरवाही और संवेदनहीनता का आरोप लगाया है। परिजनों के अनुसार, उन्होंने सर्जरी से पहले सभी आवश्यक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए थे और स्पष्ट रूप से बताया गया था कि किस हाथ में पहले सुधार की आवश्यकता है। बच्चे के माता-पिता का कहना है कि एक छोटे बच्चे के साथ इस तरह की तकनीकी गलती होना न केवल शारीरिक कष्टदायक है, बल्कि यह डॉक्टर की एकाग्रता और जिम्मेदारी पर भी प्रश्नचिन्ह लगाता है। जैसे ही यह बात अन्य मरीजों और स्थानीय लोगों तक पहुँची, अस्पताल के बाहर भीड़ जमा होने लगी और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को भी सूचना देनी पड़ी। परिवार का आरोप है कि इस गलती के कारण बच्चे को भविष्य में अन्य जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है।

दूसरी ओर, अस्पताल प्रबंधन और संबंधित डॉक्टरों ने इन आरोपों पर अपनी सफाई पेश की है। अस्पताल प्रशासन का तर्क है कि बच्चा 'बाइलेटरल' स्थिति से पीड़ित था, जिसका अर्थ है कि उसके दोनों हाथों में अतिरिक्त उंगलियां मौजूद थीं और दोनों ही हाथों का ऑपरेशन किया जाना अनिवार्य था। डॉक्टरों के अनुसार, सर्जिकल प्रक्रिया के दौरान किसी तकनीकी कारण या स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बाएं हाथ का चयन पहले किया गया होगा। हालांकि, परिजनों का मुख्य विरोध इस बात पर है कि यदि हाथ बदला गया था, तो उन्हें पूर्व में सूचित क्यों नहीं किया गया या उनकी सहमति दोबारा क्यों नहीं ली गई। अस्पताल ने इसे एक गलतफहमी करार दिया है, लेकिन परिजनों के बढ़ते विरोध को देखते हुए मामले की गंभीरता काफी बढ़ गई है।

चिकित्सा जगत में 'बाइलेटरल पोस्टएक्सियल पॉलीडैक्टिली' एक ऐसी स्थिति है जहाँ दोनों हाथों की छोटी उंगली की तरफ एक अतिरिक्त उंगली विकसित हो जाती है। इसके सफल ऑपरेशन के लिए सटीक योजना और अंगों की पहचान अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। पंढरपुर की इस घटना ने 'रॉन्ग साइट सर्जरी' (गलत अंग की सर्जरी) के वैश्विक प्रोटोकॉल के उल्लंघन की ओर ध्यान दिलाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि सर्जरी से पहले अंग पर 'मार्किंग' करना और पूरी टीम के साथ 'टाइम-आउट' सत्र करना अनिवार्य होता है ताकि ऐसी मानवीय भूलों की कोई गुंजाइश न रहे। इस मामले में प्रथम दृष्टया इन सुरक्षा मानकों की अनदेखी नजर आ रही है, जिसने एक मासूम बच्चे के स्वास्थ्य को जोखिम में डाल दिया। मामले की गंभीरता और सार्वजनिक रोष को देखते हुए जिला स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन ने तुरंत हस्तक्षेप किया है। इस पूरी घटना की तह तक जाने के लिए चिकित्सा विशेषज्ञों की एक उच्च स्तरीय जांच समिति गठित कर दी गई है। यह समिति ऑपरेशन थिएटर के रिकॉर्ड, एनेस्थीसिया नोट्स और अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज की जांच करेगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि गलती किस स्तर पर हुई।

इस विवाद के सामाजिक और कानूनी पहलुओं पर विचार करें तो यह मामला उपभोक्ता संरक्षण और चिकित्सा नैतिकता के दायरे में आता है। यदि जांच समिति अपनी रिपोर्ट में डॉक्टरों को दोषी पाती है, तो अस्पताल का लाइसेंस रद्द होने के साथ-साथ संबंधित डॉक्टरों पर कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। पंढरपुर जैसे क्षेत्र में जहाँ लोग बड़ी उम्मीदों के साथ इलाज के लिए आते हैं, ऐसी घटनाओं से डॉक्टरों और मरीजों के बीच के अटूट विश्वास को गहरी चोट पहुँचती है। पीड़ित परिवार अब न्याय की मांग कर रहा है और उन्होंने स्पष्ट किया है कि जब तक दोषियों को सजा नहीं मिलती, वे शांत नहीं बैठेंगे। प्रशासन ने निष्पक्ष जांच का आश्वासन देकर फिलहाल स्थिति को शांत कराया है।

अस्पताल के भीतर सुरक्षा प्रोटोकॉल और संचार की कमी अक्सर इस तरह की अप्रिय घटनाओं का कारण बनती है। सर्जरी से पहले मरीज की पहचान और प्रभावित अंग की पुष्टि के लिए 'सर्जिकल सेफ्टी चेकलिस्ट' का पालन करना हर अस्पताल के लिए अनिवार्य है। यदि पंढरपुर के इस मामले में डॉक्टरों ने बच्चे के बाएं हाथ की सर्जरी किसी चिकित्सकीय आपात स्थिति के कारण की थी, तो भी इसकी जानकारी परिजनों को तत्काल दी जानी चाहिए थी। पारदर्शिता के अभाव ने ही इस विवाद को जन्म दिया है, जो अब एक बड़े प्रशासनिक जांच का विषय बन चुका है। स्वास्थ्य विभाग ने इस घटना के बाद क्षेत्र के अन्य निजी अस्पतालों को भी अपने सुरक्षा मानकों की समीक्षा करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।

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